मुंबई के वर्ली और मालाबार हिल जैसे वीआईपी इलाकों में भी पानी की कमी हो गई है. इन इलाकों में आलीशान घरों की कीमतें ₹3 लाख प्रति वर्ग फुट के रिकॉर्ड स्तर को छू रही हैं. गगनचुंबी इमारतों और करोड़ों के सपनों को बेचते इस शहर की कड़वी सच्चाई यह है कि पिछले एक महीने से पानी की कमी से लोग परेशान हैं.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक करीब एक महीने से, शहर के सभी इलाकों में रहने वाले लोग जिनमें शहर के सबसे महंगे घरों में रहने वाले लोग भी शामिल हैं. BMC की तरफ से पानी की सप्लाई में की गई 10% कटौती का सामना कर रहे हैं. यह स्थिति रियल एस्टेट के विकास और शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर की क्षमता के बीच बढ़ते अंतर को दिखाती है.
मुंबई अपनी पानी की अधिकांश आपूर्ति शहर की सीमा से बाहर स्थित सात झीलों के नेटवर्क से करता है, जिनमें भातसा, अपर वैतरणा, मिडल वैतरणा, मोदक सागर, तानसा, विहार और तुलसी शामिल हैं. ये जलाशय मिलकर 1.2 करोड़ से अधिक की आबादी वाले इस शहर को रोजाना लगभग 3,800 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति करते हैं.
मुंबई में पानी की कमी कैसे होगी पूरी
बीएमसी (BMC) के अनुमानों के मुताबिक, मुंबई में पानी की दैनिक मांग 4,200 मिलियन लीटर से अधिक है. मांग और आपूर्ति के बीच के इस अंतर को शहर में सरकारी और निजी तौर पर संचालित वाटर टैंकरों द्वारा पूरा किया जाता है.
जलाशयों के घटते जलस्तर और मानसून आने तक पानी को सुरक्षित रखने की जरूरत को देखते हुए 15 मई 2026 को पानी में कटौती का यह ताजा फैसला लागू किया गया था. बीएमसी अधिकारियों के अनुसार, मुंबई को पीने का पानी देने वाली इन सातों झीलों में अब उनकी कुल भंडारण क्षमता का केवल 13% पानी ही बचा है. अनुमान है कि पानी का यह उपलब्ध स्टॉक अगले 45 से 50 दिनों तक शहर की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है.
पानी की बार-बार होने वाली किल्लत से निपटने के लिए, मुंबई अब दुबई, सिंगापुर और तेल अवीव जैसे वैश्विक शहरों की तर्ज पर सीवाटर डिसेलिनेशन प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है, जो पीने के पानी के लिए बड़े पैमाने पर इसी तकनीक पर निर्भर हैं.
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बीएमसी ने मुंबई के मनोरी में एक डिसेलिनेशन प्लांट विकसित करने का ठेका इजरायल की मशहूर वॉटर टेक्नोलॉजी कंपनी आईडीई टेक्नोलॉजीज (IDE Technologies) को दिया है. यह प्रोजेक्ट शुरुआती चरण में रोजाना 200 मिलियन लीटर समुद्री पानी को पीने योग्य पानी में बदलेगा, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 400 मिलियन लीटर रोजाना करने की क्षमता होगी. इस प्रोजेक्ट को दिसंबर 2025 में महत्वपूर्ण पर्यावरणीय मंजूरियां मिल चुकी हैं और फिलहाल यह अंतिम नियामक मंजूरी के दौर से गुजर रहा है. पूरी तरह शुरू होने के बाद, इससे मुंबई की पानी की कुल जरूरत का 10% हिस्सा पूरा होने की उम्मीद है.
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