नाव हादसा: एक ही परिवार के 13 बच्चों की मौत, मांओं की चीख सुन रो पड़े लोग, DM से लिपटकर बिलख पड़े परिजन

वैशाली के राघोपुर में गंगा नदी पर हुए नाव हादसे ने कई परिवारों को ऐसा जख्म दिया है, जिसकी भरपाई शायद कभी नहीं हो सकेगी. हादसे में एक ही परिवार के 13 बच्चों की मौत हुई है. बच्चों को खोने वाली मांओं के रोने और डीएम को गले लगाकर बिलखने का दृश्य हर किसी को झकझोर देने वाला है.

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जैसे ही बच्चों का शव घर पहुंचा वहां कोहराम मच गया (Photo: ITG) जैसे ही बच्चों का शव घर पहुंचा वहां कोहराम मच गया (Photo: ITG)

रोहित कुमार सिंह

  • हाजीपुर ,
  • 14 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 11:58 AM IST

बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर में गंगा नदी का किनारा इस बार ऐसी चीखों का गवाह बना, जिन्हें सुनकर किसी का भी कलेजा कांप जाए. जिस घर में बच्चों की आवाजें गूंजती होंगी, वहां अब मातम पसरा है. जिन बच्चों के साथ परिवार ने भविष्य के सपने देखे होंगे, वे एक झटके में जिंदगी से दूर हो गए. हाजीपुर नाव हादसे में 14 बच्चों की मौत की खबर ने पूरे इलाके को गम में डुबो दिया है. इनमें एक ही परिवार के 13 बच्चों के मारे जाने की बात सामने आने से इस त्रासदी का दर्द और गहरा हो गया है.

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सबसे ज्यादा झकझोरने वाला दृश्य उस मां का बताया जा रहा है, जो अपने बच्चों को खोने के बाद खुद को संभाल नहीं पा रही थी. वह जिलाधिकारी वर्षा सिंह से लिपटकर फूट-फूटकर रो पड़ी. उस वक्त उसके आंसुओं में सिर्फ बच्चों को खोने का गम नहीं, बल्कि उन तमाम उम्मीदों के टूटने का दर्द भी था, जिन्हें एक मां अपने बच्चों के साथ जोड़कर देखती है.

बच्चों को खोने का दर्द बयां करना मुश्किल

बच्चे किसी भी परिवार की सबसे बड़ी उम्मीद होते हैं. उनकी छोटी-छोटी शरारतें, घर लौटने का इंतजार, साथ बैठकर खाना खाना और भविष्य को लेकर बुने गए सपने ही घर की दुनिया बनाते हैं. लेकिन जब एक ही हादसे में परिवार के कई बच्चे छिन जाएं, तो उस खालीपन को शब्दों में बयान करना मुश्किल हो जाता है. 

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श्राद्ध का भोज खाने गए थे बच्चे, वापसी में पलट गई नाव

जानकारी के मुताबिक, बच्चे पास के गांव में श्राद्ध का भोज खाने के लिए नाव से गए थे. किसी ने शायद यह नहीं सोचा होगा कि जिस यात्रा पर वे सामान्य दिनों की तरह निकल रहे हैं, वही उनके परिवारों के लिए जिंदगी का सबसे दर्दनाक दिन बन जाएगी. प्रत्यक्षदर्शी रवि यादव ने बताया कि बच्चे नाव पर सवार होकर पास के गांव गए थे. उनके मुताबिक, नाव को बच्चे ही चला रहे थे. वापसी के दौरान गंगा नदी में नाव पलट गई और बच्चे हादसे का शिकार हो गए. राघोपुर का इलाका बाढ़ से प्रभावित रहता है. ऐसे क्षेत्रों में नाव केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि कई गांवों के लिए रोजमर्रा की जरूरत भी होती है. नदी पार करना स्थानीय लोगों की जिंदगी का हिस्सा है. इस हादसे ने एक बार फिर बाढ़ प्रभावित इलाकों में नावों की सुरक्षा, उनकी नियमित जांच और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.

नाव में मिला बड़ा छेद, ओवरलोडिंग की आशंका

हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान के दौरान एसडीआरएफ की टीम ने नदी में पलटी नाव को बाहर निकाला. नाव की जांच में उसके एक हिस्से में बड़ा छेद दिखाई दिया. प्रत्यक्षदर्शी रवि यादव ने दावा किया कि गांव में उपलब्ध कराई गई सरकारी नाव काफी पुरानी और जर्जर हो चुकी थी. उनके मुताबिक, नाव पर बच्चे सवार थे और उसे भी बच्चे ही चला रहे थे. स्थानीय लोगों ने भी नाव के काफी पुराना होने की बात कही है. राघोपुर के पूर्व विधायक और भाजपा नेता सतीश राय ने भी नाव की जर्जर स्थिति का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि यह बाढ़ प्रभावित इलाका है और गांव में नाव कई साल पहले उपलब्ध कराई गई थी.

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मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है. उन्होंने प्रशासन को राहत और बचाव कार्य तेजी से पूरा कराने तथा घायलों का बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए.

 

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