TATA-महिंद्रा-मारुति को भी सता रहा E20 पेट्रोल का डर! रिपोर्ट में दावा

इथेनॉल पर एक नई रिपोर्ट सामने आई है. इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कंपनियां ई20 फ्यूल में मिलावट को लेकर चिंतित थी. इस पर कंपनियों के एक्जीक्यूटिव्स एक दूसरे से चर्चा भी कर रहे थे. हालांकि, पिछले महीने के आखिर में SIAM ने सरकार को एक शिकायत भेजी थी, जिसे बाद में वापस ले लिया गया था. आइए जानते हैं क्या पूरा मामला.

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E20 पेट्रोल को लेकर पिछले महीने SIAM ने एक लेटर सरकार को भेजा था. (Photo: ITG) E20 पेट्रोल को लेकर पिछले महीने SIAM ने एक लेटर सरकार को भेजा था. (Photo: ITG)

आजतक ऑटोमोबाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 13 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 8:28 PM IST

इथेनॉल पर विवाद और नए-नए खुलासे थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. कुछ दिनों पहले ही पेट्रोल में इथेनॉल की मिलावट को लेकर SIAM (सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स) ने सरकार को भेजी अपनी शिकायत वापस ले ली. पेट्रोल में इथेनॉल की ब्लेंडिंग को सरकार के सुरक्षित बताने के कुछ ही घंटों में इस शिकायत को वापस ले लिया गया था.

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सीआईएएम का कहना था कि शिकायत में दिए कुछ आंकड़ों की और जांच की जरूरत है. लेकिन ये कहानी यहां पर खत्म नहीं हुई. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ऑटो सेक्टर के एक्जीक्यूटिव्स के बीच हुई बातचीत में पता चलता है कि कंपनियां ई20 फ्यूल को लेकर चिंता कर रही थीं. 

20% इथेनॉल वाले पेट्रोल पर चर्चा

टाटा मोटर्स, मारुति सुजुकी और महिंद्रा पेट्रोल में 20 परसेंट इथेनॉल की मिलावट को लेकर अपनी चिंता पर चर्चा कर रही थीं. इन कंपनियों के डेटा में इंडस्ट्री के किए गए सबसे व्यापक फ्यूल टेस्टिंग को शामिल किया गया. सरकार ने E20 को प्रदूषण कम करने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए लागू किया था.

1 अप्रैल से देशभर में ई20 फ्यूल को लागू कर दिया गया. एक ओर E20 फ्यूल को लेकर लोग अपनी गाड़ियों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर परेशान हैं. दूसरी ओर ऑटोमेकर्स भी इससे चिंतित थे. कार कंपनियों के एक्जीक्यूटिव्स के बीच ईमेल पर हुई बातचीत बताती है कि कंपनियां E20 पेट्रोल में मौजूद क्लोराइड और मॉइस्चर को लेकर परेशान हैं. 

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कंपनियों की मानें, तो इनकी वजह से गाड़ियों में दिक्कत हो रही है. हालांकि, सार्वजनिक तौर पर कंपनियां E20 फ्यूल का समर्थन कर रही हैं. SIAM ने भी 28 जुलाई को ई20 पेट्रोल में मिलावट को लेकर भेजी गई अपनी शिकायत को वापस ले लिया था. इसकी वजह कुछ आंकड़ों की जांच की जरूरत बताया गया था.

रॉयटर्स की मानें, तो कई ऑटोमेकर्स ने एक साल में 21 राज्यों के 250 से ज्यादा पेट्रोल पंप से फ्यूल सैंपल इकट्ठा करके जांच की थी. इनमें से 18 राज्यों के कई सैंपल में क्लोराइड की मात्रा और मॉइस्चर काफी ज्यादा पाई गई थी. 

SIAM ने क्यों वापस ली शिकायत

हालांकि, इस मामले में SIAM ने बताया कि इन आंकड़ों को इंटरनल सर्कुलेशन, चर्चा और वैलिडेशन के लिए जुटाया गया था. सीआईएएम का कहना है कि टेस्टिंग का आधार और सैंपल साइज निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त नहीं था. इसलिए सरकार को भेजे गए लेटर को वापस ले लिया गया था. इस मुद्दे पर SIAM साइंटिफिक स्टडी की प्लानिंग कर रहा है. 

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वहीं इस मुद्दे पर मिनिस्ट्री ऑफ पेट्रोलियम एंड नैचुरल गैस ने कोई जवाब नहीं दिया है. हालांकि, पेट्रोलियम मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को कहा कि SIAM से लेटर मिलने से दो हफ्ते पहले ही तेल कंपनियों ने पेट्रोल पंपों पर मिलावट की जांच शुरू कर दी थी.

उन्होंने बताया कि सिर्फ चार मामले ही इससे जुड़े हुए मिले हैं. सरकारी तेल कंपनियों ने बताया कि रैंडम और साइंटिफिक टेस्ट में तेल में मिलावट को लेकर कोई चिंता करने वाली बात नहीं मिली है. महिंद्रा ने बताया कि ईमेल के आधार पर निकाले गए रिजल्ट पूरी तरह से गलत हैं. वहीं मारुति और टाटा ने कोई जवाब नहीं दिया है. 

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