आज हमारी थाली में सजने वाले फल और सब्जियां कितने सुरक्षित हैं, इसे लेकर अक्सर सवाल उठते हैं. हाल ही में सरकार ने लोकसभा में आंकड़े पेश कर देश में खाद्य सुरक्षा, कृषि उत्पादन और व्यापार की वास्तविक स्थिति सामने रखी है.
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में बताया कि, पिछले तीन सालों (2023-24 से 2025-26) में राष्ट्रीय स्तर पर 70,652 सैंपल की जांच की गई, इनमें से केवल 3.1% (2,223 सैंपल) में कीटनाशकों के अवशेष FSSAI की तय सुरक्षित सीमा यानी MRL (Maximum Residue Limit) से अधिक पाए गए. इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि बाजार की हर सब्जी जहरीली है। 96.9% सैंपल सुरक्षित पाए गए हैं. 2005 से चल रही इस निगरानी व्यवस्था (MPRNL) में GPS लोकेशन के जरिए खेतों तक की ट्रैकिंग की जा रही है ताकि सुरक्षित कृषि पद्धतियों को बढ़ावा दिया जा सके.
भारत फल और सब्जियों का शुद्ध निर्यातक बना हुआ है, वर्ष 2016-17 में जहां इनका निर्यात 2.45 अरब डॉलर था, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 3.93 अरब डॉलर (लगभग 58.2 लाख टन) हो गया, हालांकि, बढ़ती घरेलू मांग के कारण आयात भी 1.78 अरब डॉलर से बढ़कर 3.82 अरब डॉलर पहुंच गया है.
फसल उत्पादन के सही अनुमान के लिए 'डिजिटल जनरल क्रॉप एस्टीमेशन सर्वे' अब 23 राज्यों में लागू है. इसमें फसल कटाई के आंकड़े मोबाइल ऐप और GPS फोटो के साथ दर्ज होते हैं, हितधारकों के सुझावों के बाद सरकार ने 'ड्राफ्ट शुगर्स ऑर्डर, 2026' को वापस ले लिया है.,
खाद्य तेल और रबर की स्थिति
खाद्य तेलों का आयात घटाने के लिए शुरू किए गए राष्ट्रीय मिशन के तहत अब तक 2.98 लाख हेक्टेयर में ऑयल पाम की खेती शुरू हो चुकी है, जिसके नतीजे अगले 4-5 वर्षों में पूर्ण उत्पादन के साथ दिखेंगे. वर्ष 2025-26 में भारत ने 9.05 लाख टन रबर का उत्पादन किया, जबकि 4.59 लाख टन का आयात करना पड़ा. अंतरराष्ट्रीय बाजार के प्रभाव से रबर की औसत कीमतें ₹197 से बढ़कर ₹253 प्रति किलो तक पहुंची हैं.
आंकड़े साफ करते हैं कि डरने के बजाय जागरूक रहने की जरूरत है. सरकार का ध्यान केवल कीटनाशकों के उपयोग को रोकने पर नहीं, बल्कि एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) के जरिए सुरक्षित उत्पादन, डिजिटल निगरानी और आयात पर निर्भरता घटाने पर है.
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