अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सिंगापुर में कहा कि भारत एक ताकतवर देश है और अपनी सेना को आधुनिक बना रहा है. साथ ही उन्होंने दावा किया कि पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच शांति कराने में अहम भूमिका निभाई. हालांकि भारत इस दावे को पहले से नकारता आया है.
सिंगापुर में हर साल एक बड़ी सुरक्षा बैठक होती है जिसे शांगरी-ला संवाद कहते हैं. इसमें दुनियाभर के रक्षा मंत्री और सेना के बड़े अधिकारी आते हैं. इस साल 44 देश इसमें शामिल हुए. शनिवार को अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने यहां भाषण दिया और कई बड़ी बातें कहीं.
डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-पाक के बीच शांति कराई, हेगसेथ का दावा
हेगसेथ ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच शांति कराने में मदद की. बात यह है कि पिछले साल जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक आतंकी हमला हुआ था जिसमें 26 लोग मारे गए थे. इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन तक सैन्य टकराव हुआ. फिर दोनों देशों के बीच सीजफायर यानी युद्ध विराम हुआ.
ट्रंप और अमेरिका बार-बार यह दावा करते रहे हैं कि उन्होंने यह शांति कराई. लेकिन भारत शुरू से यह कहता आया है कि यह समझौता सीधे भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ. किसी तीसरे देश की कोई भूमिका नहीं थी. भारत ने किसी भी बाहरी मध्यस्थता को साफ नकारा है.
हेगसेथ ने यह भी कहा कि दोनों देश एक दूसरे को खतरे की नजर से देखते रहेंगे और दोनों अपनी सुरक्षा के लिए मिसाइल जैसी ताकत बढ़ाना चाहेंगे. लेकिन अमेरिका इनमें से किसी को अपना दुश्मन नहीं मानता.
पाकिस्तान की भी तारीफ, ईरान से शांति वार्ता में निभा रहा भूमिका
हेगसेथ ने पाकिस्तान की भी खूब तारीफ की. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के फील्ड मार्शल और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ शांति वार्ता में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं. यह एक अनोखा और अच्छा विकास है.
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दरअसल पाकिस्तान इस वक्त अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ी शांति वार्ता में बीच का रास्ता बना रहा है. इस्लामाबाद दोनों देशों का भरोसेमंद दोस्त माना जाता है. पिछले महीने इस्लामाबाद में दोनों पक्षों की बैठक हुई लेकिन कोई डील नहीं हो पाई. पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने कहा है कि अगली बैठक जल्द ही इस्लामाबाद में होगी.
भारत की तारीफ, अमेरिका के साथ मिलकर हथियार बनाने की बात
हेगसेथ ने भारत को लेकर कई अच्छी बातें कहीं. उन्होंने कहा कि भारत एक ताकतवर देश है और अपनी सेना को लगातार आधुनिक बना रहा है. भारत खासतौर पर हिंद महासागर में ताकत का संतुलन बनाए रखने में मदद कर रहा है.
उन्होंने यह भी बताया कि भारत बड़ी और भारी सैन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी फैक्ट्री और सप्लाई की व्यवस्था तैयार कर रहा है. अमेरिका ने भारत के साथ मिलकर हथियार और सैन्य उपकरण बनाने का वादा किया है. इसे को-प्रोडक्शन कहते हैं यानी दोनों देश साथ मिलकर बनाएंगे.
अमेरिका की बड़ी इंडो-पैसिफिक स्ट्रैटेजी क्या है?
हेगसेथ ने यह भी बताया कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र यानी इंडो-पैसिफिक दुनिया का सबसे अहम इलाका है. अमेरिका इस इलाके में शांति और संतुलन बनाए रखना चाहता है. वह नहीं चाहता कि कोई एक देश पूरे इलाके पर अपना दबदबा बना ले. उन्होंने सीधे चीन का नाम लेते हुए कहा कि कोई भी देश, चीन सहित, इस इलाके में अपना वर्चस्व नहीं थोप सकता.
हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका चीन से कोई टकराव नहीं चाहता और ट्रंप के समय से अमेरिका-चीन के रिश्ते पहले से बेहतर हुए हैं.
अमीर देश अपनी सुरक्षा का खर्च खुद उठाएं
हेगसेथ ने एक और बड़ी बात कही. उन्होंने कहा कि जो देश पैसे वाले हैं वे अपनी सुरक्षा का खर्च खुद उठाएं. अमेरिका अब उनके लिए पैसे नहीं लगाएगा. उन्होंने कहा कि अमेरिका को सहयोगी चाहिए, न कि ऐसे देश जो सिर्फ उस पर निर्भर हों. जापान, साउथ कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम, फिलीपींस और भारत जैसे देशों की उन्होंने तारीफ की कि वे अपनी रक्षा में खुद निवेश कर रहे हैं.