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मिड-टर्म चुनाव से पहले ट्रंप को बड़ा झटका, सुप्रीम कोर्ट ने डाक वोट के नियम बदलने पर लगाई रोक

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने मिड-टर्म चुनाव से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की डाक मतदान व्यवस्था में नई पाबंदियां लागू करने की योजना पर रोक लगा दी. अब राज्य पुरानी प्रक्रिया के मुताबिक मतदाताओं को डाक मतपत्र भेज सकेंगे. प्रस्तावित नियमों में मतपत्र लिफाफों का एक जैसा फॉर्मेट और पात्र मतदाताओं की लिए ऑनलाइन पोर्टल पर जमा करना अनिवार्य था. लेकिन चुनाव अधिकारियों ने कहा कि मतदान से कुछ सप्ताह पहले इतना बड़ा बदलाव व्यावहारिक नहीं है.

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ट्रंप खुद भी मेल से वोट करते रहे हैं. (File Photo- Reuters)
ट्रंप खुद भी मेल से वोट करते रहे हैं. (File Photo- Reuters)

अमेरिका में होने वाले मिड-टर्म चुनावों के बीच सुप्रीम कोर्ट से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका लगा है. अदालत ने ट्रंप के डाक (मेल) से दिए जाने वाले वोटों पर पाबंदियां लगाने के प्लान पर रोक लगा दी है. इस फैसले के तहत अब अमेरिका के सभी राज्य सालों से चली आ रही पुरानी प्रक्रिया के तहत ही मतदाताओं को डाक मतपत्र भेज सकेंगे. 

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश पर जस्टिस सैमुअल अलिटो और जस्टिस क्लेरेंस थॉमस ने अपनी असहमति जताई. वहीं जस्टिस ब्रेट कवानॉफ ने ये तो माना कि इन पाबंदियों को फिलहाल लागू नहीं किया जाना चाहिए. लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि वो भविष्य में ट्रंप प्रशासन के पक्ष में फैसला सुना सकते हैं.

ट्रंप प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की थी कि कांग्रेस (अमेरिकी संसद) के नियंत्रण के लिए होने वाले इन चुनावों से पहले ही इन नए नियमों को लागू करने की मंजूरी दी जाए. ये मामला बेहद नाजुक है क्योंकि अमेरिका में लगभग एक-तिहाई मतदाता डाक के जरिए ही वोट करते हैं.

सुधार के नाम पर लाखों वोट खारिज होने का था खतरा

चुनाव अधिकारियों का कहना था कि मिड-टर्म चुनाव से महज कुछ हफ्ते पहले पूरी वोटिंग सिस्टम में इस तरह का बड़ा बदलाव करना व्यावहारिक रूप से नामुनकिन था. अलाबामा, नॉर्थ कैरोलिना और विस्कॉन्सिन जैसे राज्यों में नया सिस्टम सक्रिय न होने के बावजूद पहले ही डाक मतपत्र भेजे जाने शुरू हो चुके थे.

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ट्रंप प्रशासन की योजना के तहत सभी राज्यों के लिए डाक मतपत्रों के लिफाफों का एक जैसा फॉर्मेट अपनाना था. इसके साथ ही एक ऑनलाइन पोर्टल पर एलिजिबल वोटर्स की लिस्ट जमा करना अनिवार्य किया जा रहा था. इन नियमों का पालन न करने वाले राज्यों के मतपत्रों को पोस्टल सर्विस से ले जाने से मना किया जा सकता था.

हालांकि, एक व्हिसलब्लोअर रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि इस नई व्यवस्था की वजह से लाखों डाक मतपत्र कभी मतदाताओं तक पहुंच ही नहीं पाते. रिपोर्ट के मुताबिक, ऑनलाइन पोर्टल सही तरीके से तैयार नहीं था और एक छोटी सी बारकोड गलती के कारण मतपत्रों का पूरा बैच खारिज हो सकता था.

डेमोक्रेटिक पार्टी ने भी किया था विरोध

डेमोक्रेटिक पार्टी के राज्य अधिकारियों और नागरिक अधिकार समूहों ने इस योजना को अदालत में चुनौती दी थी. उनका तर्क था कि राष्ट्रपति के पास चुनाव की पूर्व संध्या पर इस तरह के नियम थोपने का कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है, जिससे डाक मतदान प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो जाए. 

निचली अदालतों ने इस तर्क को मानते हुए ट्रंप की योजना पर रोक लगा दी थी. इसके बाद ट्रंप सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था.

यह भी पढ़ें: ट्रंप को कोर्ट से झटका, फेडरल जज ने वीजा कैप नियम पर लगाई रोक, छात्रों और पत्रकारों को मिली राहत

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ट्रंप खुद भी मेल से देते रहे हैं वोट

बता दें किट्रंप लंबे समय से डाक से मतदान का विरोध करते रहे हैं. उन्होंने 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में जो बाइडेन से अपनी हार के लिए गलत तरीके से डाक मतदान को ही जिम्मेदार ठहराया था. हालांकि, दिलचस्प बात ये है कि वो खुद भी अक्सर इसी माध्यम से अपना वोट डालते रहे हैं.

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