होर्मुज स्ट्रेट में ईरानी हमले के जवाब में अमेरिका ने बारूदी बदला लिया है. अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के 80 ठिकानों पर जोरदार एयरस्ट्राइक की हैं. ईरान पर इस बड़े हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि मैं ईरान की किल लिस्ट में नंबर वन हूं.
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, ईरान में खामेनेई की अंतिम यात्रा के दौरान डेथ टू अमेरिका के नारे लगे थे. ट्रंप ने लगे हाथ यह ऐलान भी कर दिया है कि अब शांति समझौता पूरी तरह खत्म हो चुका है और ईरान के साथ अब कोई बातचीत नहीं होगी. ट्रंप ने चेतावनी दी है कि बुधवार की रात एक बार फिर ईरान पर विध्वंसक हमला किया जा सकता है.
ट्रंप की इस खुली धमकी के बाद ईरान ने भी अमेरिका और मिडिल ईस्ट के देशों को इसके विनाशकारी अंजाम भुगतने की चेतावनी दे दी है. बड़ा सवाल यह है कि क्या आज की रात ईरान पर फिर हमला हुआ तो यह युद्ध पूरी दुनिया को चपेट में ले लेगा? क्योंकि ईरान पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का समर्थन अब नाटो (NATO) ने भी कर दिया है.
ईरानी सेना ने अली खामेनेई के अंतिम संस्कार कार्यक्रम के बीच होर्मुज में तीन जहाजों पर हमला किया था. इस ईरानी हमले का मुख्य निशाना कतर और सऊदी अरब के तेल टैंकर बने. ईरानी हमले का बदला अमेरिका ने अपने आक्रामक अंदाज में लिया.
NATO समिट के बाद अंकारा में ट्रंप ने कहा, "उन्होंने कुछ जहाजों पर हमला किया और इसलिए हमने उन पर उससे भी ज्दाया जोरदार हमला किया. जो कुछ भी होगा, वह बहुत जल्दी खत्म हो जाएगा. इससे तेल समेत हालात और भी सुरक्षित हो जाएंगे." ट्रंप ने अपनी पिछली बात दोहराते हुए यह भी दावा किया कि वह तेहरान के निशाने पर हैं. उन्होंने कहा, "ईरान की किल लिस्ट में मेरा नाम नंबर एक है."
इससे पहले अमेरिका ने ईरान के 80 ठिकानों पर भीषण बमबारी कर दी. अमेरिकी सेना का दावा है कि उसने ईरान के सीरिक, केश्म और बंदर अब्बास में एयर डिफेंस सिस्टम, कमांड सेंटर, तटीय रडार, एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम, ड्रोन लॉन्च साइट और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) की 60 से ज्यादा सैन्य नौकाओं को निशाना बनाकर तबाह कर दिया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ ऐलान कर दिया है कि ईरान के साथ हुआ शांति समझौता अब खत्म हो चुका है और आज की रात ईरान पर अमेरिकी सेना का एक और विध्वसंक हमला हो सकता है. इसका सीधा मतलब यही है कि चंद दिनों की शांति के बाद एक बार फिर ईरान और अमेरिका के बीच महायुद्ध की शुरुआत हो चुकी है.
क्या आज की रात ईरान पर भारी पड़ने वाली है?
क्या आज की रात ईरान पर बहुत भारी रहने वाली है? क्या अमेरिकी राष्ट्रपति के आदेश पर ईरान के सैन्य ठिकानों के साथ-साथ उसके तेल डिपो को भी निशाना बनाया जा सकता है? अंकारा में चल रही नाटो समिट में हिस्सा लेने पहुंचे ट्रंप ने ईरान को लेकर अपनी लक्ष्मण रेखा खींच दी है. ट्रंप ने ईरान पर झूठ बोलने और समझौता तोड़ने का आरोप लगाया है.
उन्होंने कहा है, "हमने कल रात उन पर बहुत जोरदार हमला किया था और संभव है कि आज रात फिर से हमला करें. ईरान मिडिल ईस्ट में दबाव बनाता रहा है, लेकिन अब ऐसा नहीं रहेगा. हमने खतरनाक लोगों को निशाना बनाया है. हर बार वे हमला करेंगे, हम जवाब देंगे. मैं शायद आज रात उन्हें फिर से कड़ी सजा दूंगा. मैं उन्हें थोड़ी चेतावनी देता हूं.''

ईरान पर नए हमले के वक्त का ऐलान ट्रंप पहले ही कर चुके हैं. आज की रात ईरान पर बड़ा हमला संभव है. ईरान पर हमले की धमकी से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ संकेत दे दिए थे कि अब ईरान के साथ सीजफायर पर कोई वार्ता नहीं होगी, अब सिर्फ महायुद्ध होगा. उन्होंने ईरान को बीमार मानसिकता वाला बताते हुए क्रूर और हिंसक कहा है.
ट्रंप ने कहा, "मेरे हिसाब से, युद्धविराम खत्म हो चुका है. मैं अब उनसे कोई वास्ता नहीं रखना चाहता. वे घटिया लोग हैं. जानते हैं घटिया लोग कैसे होते हैं? वे वैसे ही हैं. वे बीमार मानसिकता वाले लोग हैं. उन्हें बीमार सोच वाले लोग ही चलाते हैं. वे बहुत क्रूर और हिंसक लोग हैं. यदि उनके पास परमाणु हथियार होता, तो वे उसका इस्तेमाल जरूर करते."
बहरीन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर हमला
ईरान को लेकर ट्रंप अब आर-पार के मूड में हैं, तो वहीं ईरान ने भी अमेरिकी हमलों के बाद बड़ा दावा किया है. ईरानी सेना की मानें तो अमेरिकी हमलों के ठीक बाद बहरीन के शेख ईसा एयर बेस पर तैनात अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाकर ड्रोन हमला किया गया. ईरान का दावा है कि दक्षिणी ईरान पर हुई अमेरिकी एयरस्ट्राइक का जवाब दे दिया गया है.
ईरान का कहना है, "अमेरिका ने बार-बार सीजफायर का उल्लंघन किया है. इसके नतीजे भुगतने होंगे. अब क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकाने हमारे सैन्य ड्रोन के निशाने पर हैं. बहरीन और कुवैत में 85 अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन ऑपरेशन चलाया गया. इन हमलों में बहरीन स्थित अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट के मुख्यालय शामिल है.''
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अमेरिका पर शांति समझौते की 5 शर्तें तोड़ने का सीधा आरोप लगाया है. उन्होंने कहा, "अमेरिका लगातार समझौते का उल्लंघन कर रहा है. अमेरिका ने होर्मुज में ईरान के अधिकारों में दखल दिया. सैन्य हमलों की धमकी दी. ईरानी तेल निर्यात पर प्रतिबंध लगाए और लेबनान में जारी इजरायली कार्रवाई का समर्थन किया है."

ट्रंप का कड़ा बयान, 'ईरानी सरकार एक कैंसर है'
चाहे ईरानी सेना हो या फिर ईरानी सांसद, सभी ने अमेरिका के साथ सीधे टकराव की चेतावनी दी है. ईरान को भी इस बात का अंदाजा है कि अब शांति समझौते पर वार्ता का कोई मतलब नहीं रह गया है, क्योंकि एमओयू पर सहमति बनने के बाद यह दूसरा मौका है जब दोनों तरफ से हमले जारी हैं. ट्रंप का मानना है कि अब फैसला टेबल पर नहीं, बल्कि जंग के मैदान में होगा.
ट्रंप ने कहा, "ईरान सरकार एक कैंसर है. इसे जल्द से जल्द जड़ से उखाड़ फेंकना होगा. अमेरिकी सेना ने रात भर ईरानी ठिकानों पर बहुत जोरदार हमले किए. ये दुष्ट, बीमार लोग हैं और हमें इस कैंसर से छुटकारा पाना होगा. आपको कैंसर को शुरुआती अवस्था में ही जड़ से उखाड़ फेंकना होगा. ईरान ने अंतिम संस्कार पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय मिसाइलें दागीं.''
उन्होंने कहा कि ईरान को पता है कि अमेरिकी प्रतिक्रिया 20 गुना ज्यादा कठोर थी. ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती. शांति समझौते के बावजूद होर्मुज की खाड़ी में हमला करके ईरान चौतरफा घिर गया है. ईरान के खिलाफ मिडिल ईस्ट के तमाम मुल्क बड़े और कड़े एक्शन की मांग कर रहे हैं. इनमें मध्यस्थता वाले देश भी हैं.