अमेरिकी सेना ग्राउंड ब्रेकिंग बदलावों के दौर से गुजर रही है. अमेरिकी आर्मी की घातक और मारक क्षमता को कायम रखने के लिए वहां की सरकार अपने सैनिकों की सालाना 'मर्दाना' टेस्टिंग करवाएगी. अमेरिकी युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने इसकी घोषणा की है. यहां 'मर्दाना' टेस्टिंग से आशय सैनिकों के 'टेस्टोस्टेरोन होर्मोन' टेस्ट से है.
पीट हेगसेथ का मानना है कि युद्ध के मैदान में घातक, मारक और आक्रामक लड़ाकू क्षमता बनाए रखने के लिए सैनिकों में पर्याप्त टेस्टोस्टेरोन होना जरूरी है. इस टेस्ट के जरिये टेस्टोस्टेरोन होर्मोन का स्तर पता लगाया जाएगा जिन सैनिकों में ये स्तर कम होगा उन्हें Testosterone Replacement Therapy (TRT) का विकल्प दिया जाएगा. ताकि ऐसे सैनिक अमेरिकी सेना में अपना सर्वोत्तम योगदान दे सकें.
दरअसल दुनिया की सबसे ताकतवर सेनाओं में गिनी जाने वाली अमेरिकी सेना अब अपने सैनिकों की सिर्फ बंदूक, बम और फिटनेस ही नहीं, बल्कि उनकी टफनेस, किलर इंस्टिक्ंट, बहादुरी और फुर्ती और चपलता पर भी नजर रखेगी. अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने ऐलान किया है कि 30 साल से अधिक उम्र के सैनिकों का हर साल टेस्टोस्टेरोन टेस्ट कराया जाएगा.
हेगसेथ लंबे समय से यह दलील देते रहे हैं कि सेना का काम सामाजिक प्रयोग करना नहीं, बल्कि ऐसे योद्धा तैयार करना है जो दुश्मन पर निर्णायक बढ़त हासिल कर सकें. इसी सोच के तहत अब अमेरिकी सेना में हार्मोन स्तर की निगरानी को भी सैन्य तैयारी का हिस्सा बनाया जा रहा है.
हेगसेथ ने एक वीडियो संदेश में कहा कि इस पॉलिसी का मकसद यह पक्का करना है कि सैनिक मज़बूत और मुश्किल हालात का सामना करने में सक्षम बने रहें, हर काम कर सकें और आधुनिक युद्धक्षेत्र की जरूरतों के लिए मानसिक रूप से तैयार रहें.
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन का यह कदम ट्रंप प्रशासन की उन हालिया कोशिशों के बाद आया है, जिनका मकसद टेस्टोस्टेरोन थेरेपी को ज़्यादा आसानी से उपलब्ध कराना है.
पिछले महीने अमेरिकी स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग ने टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट ट्रीटमेंट पर लगी पाबंदियों को कम करने की योजना का ऐलान किया. इसमें उन पुरुषों को यह हार्मोन देने पर लगी सीमाएं हटाना भी शामिल है, जिनमें उम्र बढ़ने के साथ टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो जाता है.
फिलहाल, अमेरिकी खाद्य और औषधि प्रशासन (FDA) मुख्य रूप से हाइपोगोनैडिज़्म से पीड़ित पुरुषों के लिए टेस्टोस्टेरोन थेरेपी को मंज़ूरी देता है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें टेस्टोस्टेरोन का स्तर असामान्य रूप से कम हो जाता है।
टेस्टोस्टेरोन हार्मोन क्या होता है, क्या काम करता है?
टेस्टोस्टेरोन एक प्रमुख सेक्स हार्मोन है. जो पुरुषों में मुख्य रूप से अंडकोष और महिलाओं में कम मात्रा में अंडाशय तथा एड्रिनल ग्रंथियों द्वारा बनाया जाता है. इसे अक्सर 'पुरुषत्व यानी की मर्दानगी का हार्मोन' कहा जाता है क्योंकि यह पुरुषों में दाढ़ी-मूंछ, भारी आवाज, मांसपेशियों का विकास और हड्डियों की मजबूती जैसे शारीरिक गुणों के लिए जिम्मेदार होता है.
यह हार्मोन मांसपेशियों की ताकत, ऊर्जा, सहनशक्ति, यौन इच्छा, शुक्राणु उत्पादन और मानसिक आत्मविश्वास को भी प्रभावित करता है. उम्र बढ़ने के साथ इसका स्तर धीरे-धीरे कम होने लगता है.
यह शरीर के मेटाबॉलिज्म, लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण और समग्र स्वास्थ्य में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसकी कमी होने पर थकान, मांसपेशियों में कमजोरी, यौन इच्छा में कमी और मूड संबंधी समस्याएं दिखाई दे सकती हैं.
अमेरिका को चाहिए घातक, मारक और आक्रामक सैनिक
टेस्टोस्टेरोन को आमतौर पर पुरुषों की मांसपेशियों की ताकत, सहनशक्ति, आक्रामकता, आत्मविश्वास और शारीरिक क्षमता से जोड़ा जाता है. अमेरिकी रक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों का मानना है कि आधुनिक युद्ध में केवल तकनीक ही नहीं, बल्कि सैनिक की व्यक्तिगत लड़ाकू क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. ऐसे में अगर किसी सैनिक की शारीरिक धार कुंद हो रही है तो उसकी पहचान समय रहते की जानी चाहिए.
हमारा सबसे निर्णायक रणनीतिक फ़ायदा सैनिक है
X पर पोस्ट किए गए एक वीडियो मैसेज में हेगसेथ ने कहा, "भले ही हम अपने हथियार सिस्टम, प्लेटफॉर्म और साजो-सामान पर भारी निवेश करते हैं, लेकिन हमारा सबसे निर्णायक रणनीतिक फ़ायदा हमेशा व्यक्तिगत सैनिक ही होगा."
उन्होंने आगे कहा, "उस फ़ायदे को बनाए रखना हमारा पवित्र कर्तव्य है, इसीलिए हमें लगातार आपके प्रदर्शन, आपकी सहनशक्ति और आपकी दीर्घकालिक सेहत को बेहतर बनाने के नए तरीके खोजने होंगे."
हेगसेथ ने कहा, "यह पहल बनावटी तौर पर क्षमता बढ़ाने के बारे में नहीं है; यह आपकी प्राकृतिक क्षमताओं को बहाल करने और उन्हें बेहतर बनाने, आपकी लंबी उम्र की रक्षा करने और यह पक्का करने के बारे में है कि आपके पास टिके रहने और लड़ने के लिए ज़रूरी बायोलॉजिकल आधार हो. "
उन्होंने आगे कहा, "हम अपने योद्धाओं को दुनिया की सबसे अच्छी मेडिकल देखभाल देने के लिए ज़िम्मेदार हैं. और यह प्रोग्राम उस ज़िम्मेदारी को पूरा करता है. "
'द हिल' की रिपोर्ट के अनुसार, यह पहल ट्रंप प्रशासन के पारंपरिक मर्दानगी पर ज़्यादा जोर देने के बीच शुरू की गई है.
'द हिल' की रिपोर्ट के अनुसार 30 से 79 साल की उम्र के लगभग 5.6 प्रतिशत पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन की कमी होने का अनुमान है. इससे मांसपेशियों का नुकसान, थकान, वज़न बढ़ना और यौन समस्याएं हो सकती हैं.
साथ ही यह डायबिटीज, दिल की बीमारी, ऑस्टियोपोरोसिस और डिप्रेशन जैसी स्थितियों से भी जुड़ा है. हेगसेथ ने कहा, "इन स्वास्थ्य समस्याओं का समय रहते समाधान करके, हम आपको सबसे आगे बनाए रख रहे हैं और आपको वही सहयोग दे रहे हैं जो आप इस देश को अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए करते हैं."