अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने गुरुवार को NATO देशों की बैठक में यूरोपीय सहयोगियों पर तीखा हमला बोला. उन्होंने घोषणा की कि यूरोप में तैनात अमेरिकी सैन्य बलों की अगले छह महीनों में व्यापक समीक्षा की जाएगी. उन्होंने साफ कहा कि भविष्य में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी इस बात पर निर्भर करेगी कि यूरोपीय देश अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी कितनी तेजी और गंभीरता से अपने हाथ में लेते हैं.
ब्रुसेल्स में नाटो रक्षा मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए हेगसेथ ने कहा कि यह केवल औपचारिक समीक्षा नहीं होगी, बल्कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यूरोप अपनी रक्षा का नेतृत्व स्वयं करे और अमेरिका पर निर्भरता कम करे.
हेगसेथ ने आरोप लगाया कि ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के दौरान कुछ यूरोपीय सहयोगियों ने अमेरिकी सेना को अपने सैन्य अड्डों, हवाई मार्गों और आवश्यक सुविधाओं के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी. उन्होंने इसे शर्मनाक बताते हुए कहा कि सहयोगी देशों के इस रवैये ने अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा को खतरे में डाला.
यूरोप की नीतियों पर भी साधा निशाना
अमेरिकी रक्षा मंत्री ने यूरोपीय देशों की नीतियों पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि यूरोप ने टैंक, लड़ाकू विमान और एयर डिफेंस सिस्टम जैसे रक्षा संसाधनों की बजाय जेंडर इक्विटी, जलवायु परिवर्तन और कल्याणकारी योजनाओं पर अधिक ध्यान दिया, जिससे रक्षा बजट प्रभावित हुए. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यूरोप ने अपनी सीमाएं लंबे समय तक खुली रखीं और रक्षा तैयारियों की अनदेखी की.
हालांकि नाटो महासचिव मार्क रूटे ने बैठक में बताया कि यूरोपीय देशों और कनाडा ने पिछले वर्ष रक्षा खर्च में 90 अरब डॉलर की बढ़ोतरी की, जो 2024 की तुलना में करीब 20 प्रतिशत अधिक है.
'NATO 3.0' बनाना चाहता है ट्रंप प्रशासन
हेगसेथ ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन नाटो को एक नए स्वरूप 'NATO 3.0' में बदलना चाहता है, ताकि संगठन भविष्य के किसी भी खतरे का प्रभावी ढंग से सामना कर सके. उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका अब अपनी सैन्य प्राथमिकताओं का पुनर्गठन कर रहा है और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन से संभावित टकराव को ध्यान में रखते हुए संसाधनों को पुनर्संतुलित करना चाहता है.
दरअसल नाटो की सामूहिक सुरक्षा गारंटी यानी इसके संस्थापक समझौते के अनुच्छेद 5 के तहत, सभी 32 सहयोगी देश यह प्रतिज्ञा करते हैं कि उनमें से किसी एक पर भी हमला सभी पर हमला माना जाएगा. हालांकि, यह उन्हें सैन्य सहायता प्रदान करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं करता, भले ही कई देश ऐसा करेंगे.
संक्षेप में, अमेरिका अब इस बात में कटौती कर रहा है कि यदि कोई सहयोगी देश आर्टिकल 5 को लागू करता है, तो वह कितनी मदद करेगा. नाटो में अमेरिका के पास अब तक की सबसे बड़ी सेना है. हालांकि, अमेरिका का यूरोप में तैनात अपने परमाणु हथियारों को हटाने का कोई इरादा नहीं है, जो नाटो की निवारक क्षमता के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं.
यूरोप में अमेरिकी सैन्य सहायता होगी सीमित
बता दें कि कुछ हफ्ते पहले अमेरिका ने अपने सहयोगियों को संकेत दिया था कि भविष्य में किसी नाटो सदस्य पर हमला होने की स्थिति में वह पहले की तरह विमानवाहक पोत, हवाई ईंधन भरने वाले विमान, युद्धक विमान और अन्य सैन्य संसाधन स्वतः उपलब्ध नहीं कराएगा. इसके बाद नाटो के सैन्य नेतृत्व ने यूरोप की सुरक्षा के लिए वैकल्पिक योजनाओं पर काम शुरू कर दिया है.
हालांकि अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वह यूरोप में तैनात अपने परमाणु हथियारों को वापस नहीं लेगा. इन्हें नाटो की सामूहिक सुरक्षा और प्रतिरोधक क्षमता का सबसे महत्वपूर्ण आधार माना जाता है. इसी को रेखांकित करते हुए नाटो के न्यूक्लियर प्लानिंग ग्रुप ने 19 वर्षों बाद पहली बार एक संयुक्त बयान जारी किया. बयान में कहा गया कि गठबंधन की रणनीतिक परमाणु ताकत नाटो की सुरक्षा की सर्वोच्च गारंटी बनी रहेगी.
साथ ही सदस्य देशों ने परमाणु क्षमताओं के आधुनिकीकरण, परमाणु योजना को मजबूत करने और बदलते सुरक्षा माहौल के अनुरूप रणनीति विकसित करने पर भी सहमति जताई.