मिडिल ईस्ट में एक-दूसरे पर हुए हमलों से पहले से ही कमजोर सीजफायर और कमजोर हो गया है. इसके बाद, गुरुवार, 11 जून को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर नए मिलिट्री हमले करने की धमकी दी और कहा है कि अमेरिका आज रात ईरान पर 'बहुत जोरदार हमला' करेगा. उन्होंने दावा किया कि ईरान की मिलिट्री क्षमता पहले ही बहुत कमजोर हो चुकी है.
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि अमेरिका भविष्य में ईरान के बड़े तेल और गैस ठिकानों (जिनमें खार्ग द्वीप भी शामिल है) पर कब्जा कर लेगा.
ट्रंप ने लिखा, "अमेरिका आज रात ईरान पर बहुत जोरदार हमला करेगा."
उन्होंने आगे कहा, "भविष्य में किसी वक्त, हम खार्ग द्वीप और तेल से जुड़े अन्य बुनियादी ढांचों पर कब्जा कर लेंगे और उनके तेल और गैस बाजार पर पूरी तरह से कंट्रोल कर लेंगे, ठीक वैसे ही जैसे हमने वेनेजुएला के मामले में किया है, जो वेनेजुएला और अमेरिका दोनों के लिए बहुत बढ़िया साबित हो रहा है."
जब से यह टकराव शुरू हुआ है, ट्रंप की नजरें लगातार खार्ग द्वीप पर टिकी हैं, जो छोटा होने के बावजूद रणनीतिक रूप से बहुत अहम है. खार्ग द्वीप ईरान के तेल व्यापार की रीढ़ है और देश के ज्यादातर कच्चे तेल के निर्यात को संभालता है. हर दिन, खाड़ी के इस छोटे से द्वीप से करीब 20 लाख बैरल तेल भेजा जाता है, जिसमें से ज्यादातर चीन जाता है. उनके ये बयान टकराव के एक बहुत नाज़ुक मोड़ पर आए हैं. दोनों तरफ से हो रहे नए हमलों की वजह से यह इलाका बड़े युद्ध की ओर बढ़ रहा है और कूटनीति इसके साथ तालमेल बैठाने में संघर्ष कर रही है.
इलाके में नए हमले
शांति कायम करने के लिए राजनयिक बातचीत के बीच इलाके में जंग जारी रही. अमेरिका ने गुरुवार को ईरान के सर्विलांस सिस्टम, कम्युनिकेशन नेटवर्क और एयर डिफेंस साइट्स को निशाना बनाते हुए हमले किए. ये हमले वॉशिंगटन के मुताबिक, ईरान की लगातार आक्रामकता के जवाब में किए गए. ट्रंप ने यह भी इशारा किया कि अगर तेहरान ने जल्द ही अमेरिकी शर्तें नहीं मानीं, तो सैन्य कार्रवाई और तेज हो सकती है.
फॉक्स न्यूज के रिपोर्टर ट्रे यिंगस्ट के मुताबिक, ट्रंप ने कहा कि हमले जल्द ही रुक जाएंगे, लेकिन चेतावनी दी है कि अगर ईरान के नेता तुरंत किसी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करते हैं, तो भारी बमबारी फिर से शुरू हो जाएगी.
इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी इलाके में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए.
आईआरजीसी ने कहा कि उसने 18 अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए, जिनमें कुवैत और बहरीन में एयर बेस और अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े का मुख्यालय शामिल है. ईरानी सेना ने जॉर्डन में अल-अजराक एयर बेस पर हुए एक और मिसाइल हमले की जिम्मेदारी भी ली.
धमकियों के बावजूद बातचीत जारी...
फॉक्स न्यूज़ को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि बढ़ते टकराव के बावजूद वॉशिंगटन और तेहरान एक शुरुआती समझौते की दिशा में काम करते हुए अभी भी संदेशों का आदान-प्रदान कर रहे हैं.
उन्होंने फॉक्स न्यूज़ से कहा, "हम उनसे बातचीत कर रहे हैं, लेकिन देखिए, मेरी प्राथमिकता हमेशा से यही रही है- जैसे खार्ग द्वीप पर कार्रवाई करना... मेरी प्राथमिकता यही होगी. मुझे नहीं पता कि अमेरिका में इसके लिए हिम्मत है या नहीं."
रॉयटर्स द्वारा बताए गए ईरानी और यूरोपीय सूत्रों के मुताबिक, बातचीत करने वाले एक मोटे तौर पर सहमति पर पहुंच गए हैं, लेकिन कई अहम मुद्दों पर अभी भी मतभेद बने हुए हैं. सबसे बड़ी अड़चनों में से एक विदेशी बैंकों में फ्रीज़ ईरानी फंड को जारी करना है.
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खबरों के मुताबिक, ईरान अपने फ्रीज किए गए एसेट्स में से 6 अरब डॉलर से 12 अरब डॉलर के बीच की राशि चाहता है. हालांकि, वॉशिंगटन चाहता है कि फंड जारी करने की प्रक्रिया चरणों में हो और यह केवल मानवीय उद्देश्यों तक ही सीमित रहे.
एक ईरानी सूत्र ने इस टकराव को ऐसा बताया, जो लंबे वक्त तक नहीं चल सकता. सूत्र ने रॉयटर्स को बताया, "सैन्य नजरिए से देखें तो यह जंग एक गतिरोध की स्थिति में है. अमेरिकी ईरान पर हमला करके अपने टारगेट हासिल नहीं कर सके. बातचीत आगे बढ़ी है."
बातचीत की जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक, तेहरान के लिए किसी बड़े समझौते पर पहुंचने की तुलना में फ्रीज किए गए फंड तक पहुंच हासिल करना और टकराव को खत्म करना ज्यादा प्राथमिकता वाला काम लगता है.