ईरान के साथ जारी युद्ध को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख में नरमी के संकेत मिले हैं. उन्होंने कहा है कि अगर ईरान के साथ बातचीत आगे बढ़ती रही, तो अमेरिका को दोबारा युद्ध में लौटने का आदेश देने की जरूरत पड़ने की संभावना बेहद कम है. हालांकि, ट्रंप ने यह भी साफ किया कि फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि ईरान कोई मजबूत समझौता करने के लिए तैयार होता है या नहीं. उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब हाल ही में हुए मिडटर्म चुनाव में उनकी रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका लगा है.
ट्रंप ने 8 नवंबर को CNN से फोन पर बातचीत के दौरान ईरान के साथ फिर से सैन्य कार्रवाई की संभावना पर यह बात कही. उन्होंने कहा, "यह इस बात पर निर्भर करता है कि वे मजबूत समझौते पर हस्ताक्षर करते हैं या नहीं. इसकी जरूरत पड़ने की संभावना बेहद कम है." यानी ट्रंप फिलहाल बातचीत के जरिए विवाद सुलझने की उम्मीद जता रहे हैं. हालांकि, उन्होंने दोबारा हमले का विकल्प पूरी तरह बंद नहीं किया है.
दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में परमाणु कार्यक्रम और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने जैसे मुद्दे अहम हैं. इसी बातचीत की प्रगति पर आगे का फैसला निर्भर करेगा. ट्रंप ने एक दिन पहले भी कहा था कि ईरान के साथ बातचीत में काफी प्रगति हुई है. उन्होंने यह भी कहा था कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा.
हमले की तैयारी का भी जिक्र किया
एक तरफ ट्रंप बातचीत आगे बढ़ने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने सैन्य कार्रवाई की तैयारी का भी जिक्र किया. CNN से बातचीत में उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना इस क्षेत्र में पूरी तरह तैयार है. उनके मुताबिक, अमेरिका ने ईरान में 38 पुलों समेत कई अहम ढांचों को निशाने पर रखा है, जिन्हें एक घंटे में तबाह किया जा सकता है.
हालांकि, ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के बुनियादी ढांचे को नष्ट नहीं करना चाहते, क्योंकि उसे दोबारा बनाने में करीब 10 साल लग सकते हैं. उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान को सैन्य स्तर पर काफी नुकसान पहुंचाया है. इससे साफ है कि बातचीत की उम्मीद के साथ अमेरिका ने दबाव बनाए रखने का विकल्प भी खुला रखा है.
मिडटर्म चुनाव में ट्रंप की पार्टी को लगा झटका
ट्रंप का यह बयान अमेरिका में हुए मिडटर्म चुनाव के कुछ दिन बाद आया है. 3 नवंबर को हुए चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने बड़ी जीत दर्ज की. पार्टी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों में बहुमत हासिल कर लिया. इससे रिपब्लिकन पार्टी का कांग्रेस पर नियंत्रण खत्म हो गया. यह ट्रंप के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने चुनाव प्रचार में अपनी पार्टी के उम्मीदवारों का समर्थन किया था.
चुनाव नतीजों के बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इसे अमेरिका के इतिहास में पीछे जाने वाला कदम बताया था. उन्होंने दावा किया कि चुनाव नतीजों के बाद शेयर बाजार को एक ही दिन में 3 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हुआ. ट्रंप ने यह भी कहा कि वह ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के अपने फैसले से पीछे नहीं हटेंगे.
ईरान युद्ध पर बढ़ सकता है राजनीतिक दबाव
अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में बहुमत मिलने के बाद डेमोक्रेट्स की ताकत बढ़ गई है. अब वे ट्रंप सरकार के फैसलों पर ज्यादा सवाल उठा सकेंगे. ईरान युद्ध, सरकारी खर्च और दूसरे देशों से अमेरिका आने वाले लोगों से जुड़े नियमों पर प्रशासन से जवाब मांग सकते हैं. संसद की समितियां सरकारी अधिकारियों को बुलाकर उनसे सवाल कर सकती हैं. साथ ही, सरकार के फैसलों और नीतियों की जांच भी कर सकती हैं.
ऐसे में ईरान के साथ जारी टकराव ट्रंप के लिए विदेश नीति के साथ-साथ घरेलू राजनीति का भी अहम मुद्दा बन गया है. ट्रंप ने एक तरफ बातचीत के सफल होने की उम्मीद जताई है, तो दूसरी तरफ जरूरत पड़ने पर हमले की तैयारी का दावा भी किया है. अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि ईरान के साथ बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या दोनों देश किसी मजबूत समझौते तक पहुंच पाते हैं.