ईरान युद्ध के कारण दुनिया भर में तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं. इसके असर को कम करने के लिए साउथ अफ्रीका ने एक बड़ा फैसला लिया है. साउथ अफ्रीका सरकार ने अप्रैल महीने के लिए ईंधन शुल्क (Fuel Levy) में कटौती करने की घोषणा की है.
ट्रेड यूनियनों और व्यापारिक समूहों के भारी दबाव के बाद साउथ अफ्रीका सरकार ने ये कदम उठाया है. सरकार ने अप्रैल के लिए सामान्य ईंधन शुल्क में 3 रैंड प्रति लीटर की कटौती की है. इस कटौती के बाद पेट्रोल पर टैक्स 1.10 रैंड और डीजल पर 0.93 रैंड प्रति लीटर रह जाएगा.
हालांकि, इस राहत के बावजूद जनता पूरी तरह आश्वस्त नहीं है. क्लो फ्लॉक नाम के एक ड्राइवर ने अपनी चिंता जताते हुए कहा, ये मुझे बहुत भरोसा नहीं दिलाता है, पता नहीं ये राहत कब तक रहेगी और वो इसे फिर से कब बढ़ा देंगे. मैं बहुत घबराया हुआ हूं.
वित्त और पेट्रोलियम मंत्रालयों के मुताबिक, इस कटौती से सरकार को लगभग 6 अरब रैंड (350.69 मिलियन डॉलर) के टैक्स का नुकसान होगा. सरकार इसकी भरपाई दूसरे माध्यमों से करने की योजना बना रही है. राहत के बावजूद, अप्रैल में पेट्रोल की कीमतों में 15% और डीजल की थोक कीमतों में करीब 40% की बढ़ोतरी हो सकती है.
उबर ड्राइवर मकोंडिसी न्योनी ने कहा, 'उम्मीद है, जैसा कि उन्होंने कहा, बढ़ोतरी मामूली होगी और इससे मदद मिलेगी, लेकिन फिलहाल हम बहुत परेशान हैं.'
वित्त मंत्री एनोक गोडोंगवाना ने बताया कि सरकार मिडिल-ईस्ट के हालात पर नजर रख रही है. अगर युद्ध जारी रहा, तो इस राहत को मई और जून तक बढ़ाया जा सकता है. साउथ अफ्रीका के फ्यूल इंडस्ट्री एसोसिएशन के सीईओ अवहाफनी त्शिफुलारो ने कहा कि जनता अब संकट के समय सरकार से ऐसी ही दखलअंदाजी की उम्मीद करती है, जैसा 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान हुआ था.
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लेसोथो में मिट्टी के तेल के लिए मची होड़
साउथ अफ्रीका की सीमा से लगे देश लेसोथो में हालात बहुत खराब है. वहां कीमतों में भारी बढ़ोतरी की अफवाहों के चलते लोग मिट्टी का तेल (पैराफिन) खरीदने के लिए लंबी लाइनों में लग गए हैं. स्थानीय निवासी बोकांग शाले ने बताया, हमने सुना है कि आज शाम इसकी कीमत 100% बढ़ जाएगी, इसलिए हम अपने बचे हुए पैसों से सस्ता पैराफिन खरीद रहे हैं.