पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बलूचिस्तान की हिंसा पर एक बार फिर से जुबानी जमा खर्च किया है और भारत को कथित 'आतंकवाद' का जिम्मेदार ठहराया है. लेकिन पाकिस्तान ने इसके लिए रत्ती भर भी सबूत नहीं दिखाया है. दरअसल बलूचिस्तान लिब्रेशन आर्मी के हमले में 42 सुरक्षाकर्मियों की मौत के बाद पाकिस्तान का टॉप लीडरशिप बौखलाया हुआ है.
बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा पहुंचे शहबाज शरीफ ने कहा कि यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक पाकिस्तान में आखिरी फसादी खत्म नहीं हो जाता.
भारत पर भड़ास निकालते हुए शहबाज ने कहा कि, "इसमें कोई शक नहीं है कि हमारा मशरिकी हमसाया इस फ़ितना में हर तरह से पूरी तरह शामिल है."
शहबाज ने कहा, "वे इन्हें और उनके समूहों को पैसा और हथियार मुहैया करा रहे हैं. अफ़गानिस्तान में मौजूद ये लोग मिलकर बलूचिस्तान और KP में हमले करते हैं."
प्रधानमंत्री शरीफ ने कहा, "इसी तरह, कुछ 'खारिजी' ताक़तें भी शामिल हैं, जिनके बारे में मैं यहां और कुछ नहीं कहना चाहता." उन्होंने सेना के प्रवक्ता की हालिया टिप्पणी को दोहराया कि इन हमलों के पीछे भारत और "भारत के साथ जुड़ी ताक़तों" का हाथ था.
पाकिस्तान BLA विद्रोहियों के हमले के पीछ हमेशा से भारत का हाथ बताता है लेकिन अपने दावे के समर्थन में कभी कोई सबूत पेश नहीं करता है. इस बार भी शहबाज शरीफ ने सिर्फ जुबानी कहा कि इन हमलों के पीछे भारत का हाथ है.
बता दें कि पाकिस्तान के बलूचिस्तान में पिछले चार दिनों में 42 सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं, जबकि पाकिस्तान के सुरक्षाकर्मियों का दावा है कि उसके जवानों ने 54 विद्रोहियों को मार गिराया है.
भारत ने पहले भी पाकिस्तान के ऐसे दावों निराधार और बकवास कहते हुए खारिज किया है.
इधर रावलपिंडी में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए सेना के प्रवक्ता ने कहा कि हाल के दिनों में 'तीन बड़ी आतंकवादी घटनाएं' हुईं. 5 जुलाई को क्वेटा के बाहरी इलाके में एक सशस्त्र हमला, 6 जुलाई को ज़ियारत में एक पुलिस चौकी पर हमला और बुधवार को बेला में एक सेना के काफिले पर घात लगाकर हमला.
इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने आतंकवादियों और उनके मददगारों को चेतावनी दी कि वे कड़े जवाब के लिए तैयार है. अहमद शरीफ चौधरी ने भी हमलों के पीछे भारत और अफगानिस्तान पर भी बेबुनियाद आरोप लगाए और कहा कि यह भारत और भारत के साथ उन ताकतों का काम है जो पाकिस्तान के सम्मान, समृद्धि और स्थिरता को बर्दाश्त नहीं कर सकते.