यमन में शुक्रवार को सऊदी अरब के हवाई हमलों ने विद्रोहियों के कब्जे वाले मोखा एयरपोर्ट को निशाना बनाया. यह कार्रवाई ईरान समर्थित हूतियों के रणनीतिक लाल सागर बंदरगाह शहर में प्रवेश करने के एक दिन बाद हुई. इस बढ़त से हूती बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के और करीब पहुंच गए हैं, जो महत्वपूर्ण वैश्विक समुद्री मार्ग है और होर्मुज स्ट्रेट के एक अहम विकल्प के तौर पर देखा जाता है.
इस घटनाक्रम से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही, तेल आपूर्ति और यमन में जारी नाजुक संघर्षविराम को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं. इसी बीच ईरान ने यमन की सऊदी नाकाबंदी खत्म करने की मांग की और हूतियों के मोखा में प्रवेश के बाद अपने पहले बयान में सऊदी अरब और हूतियों के बीच बातचीत फिर शुरू करने की अपील की.
हूतियों का गुरुवार को मोखा में प्रवेश सऊदी समर्थित यमनी प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ वर्षों में उनकी सबसे बड़ी क्षेत्रीय बढ़त है. इस कदम के बाद वे बाब अल-मंदेब स्ट्रेट से 80 किलोमीटर के दायरे में आ गए हैं. जुलाई में नाकाबंदी की घोषणा के बाद से हूतियों ने जलडमरूमध्य और लाल सागर में सऊदी शिपिंग पर हमले बढ़ाए हैं और सऊदी अरब के भीतर तेल बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाया है. हूतियों ने कहा है कि यह यमन के उनके कब्जे वाले हिस्सों की सऊदी नाकाबंदी के जवाब में है.
तेहरान को अधिक दबाव मिल सकता है
विशेषज्ञों के मुताबिक, मोखा पर कब्जा, जहां से लाल सागर से निकलने वाले टैंकर मार्गों पर नजर रहती है, वैश्विक तेल और गैस की कीमतें बढ़ाने की ईरान की रणनीति को मजबूत कर सकता है. इससे अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत में तेहरान को अधिक दबाव मिल सकता है. बुधवार को ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के प्रवक्ता ने कहा था कि अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत में यमन को शामिल किया जाना चाहिए.
बाब अल-मंदेब में किसी भी तरह का व्यवधान वैश्विक शिपिंग और कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकता है. आम तौर पर दुनिया के करीब 12 प्रतिशत सामान इस जलडमरूमध्य से भेजा जाता है. लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस के मुताबिक, हूतियों के हमलों के बाद बाब अल-मंदेब से शिपिंग में करीब 60 प्रतिशत की गिरावट आई थी.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर बताया कि ईरान और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों ने गुरुवार को क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने के राजनयिक प्रयासों पर बात की. वहीं, सऊदी समर्थित यमन सरकार की राष्ट्रीय रक्षा परिषद ने हूतियों के सऊदी अरब पर नए हमलों की कड़ी निंदा की.
2022 के बाद बढ़ा खतरा
ताजा लड़ाई से 2022 से काफी हद तक कायम नाजुक संघर्षविराम खत्म होने का खतरा बढ़ गया है. इससे यमन में फिर से गृहयुद्ध शुरू होने की आशंका भी बढ़ी है. यमन में संघर्ष 2014 में हूतियों के उत्तरी और मध्य हिस्सों पर कब्जे के बाद शुरू हुआ था और अगले साल सऊदी अरब युद्ध में शामिल हुआ था. इस संघर्ष में 1.5 लाख लोगों की मौत हुई है और बड़ी संख्या में लोग अकाल की स्थिति की ओर धकेले गए हैं.