यूक्रेन के दक्षिण-पूर्वी जापोरिज्जिया इलाके में रूस की बमबारी में मरने वालों की संख्या बढ़कर 53 हो गई है. सोमवार को रूस ने यहां मानवीय सहायता बांटने वाले एक केंद्र को निशाना बनाया था. इस हमले को इस साल आम नागरिकों पर हुए सबसे घातक हमलों में से एक माना जा रहा है. इलाके के कार्यवाहक गवर्नर मिखाइलो सेमिकिन ने शुक्रवार को टेलीग्राम पर एक पोस्ट में इसकी जानकारी दी.
गवर्नर ने बताया कि कोमिशुवाखा गांव में हमले वाली जगह पर राहत और बचाव का काम पांचवें दिन भी जारी है. इससे पहले यूक्रेन की इमरजेंसी सर्विस ने मृतकों की संख्या 50 बताई थी. एजेंसी के मुताबिक, मुश्किल हालात और रूस के दोबारा हमले के लगातार खतरे के बावजूद बचाव अभियान चलाया जा रहा है.
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कहां हुआ था हमला?
यह हमला अग्रिम मोर्चे के पास बसे कोमिशुवाखा गांव में एक पुराने स्कूल की इमारत पर हुआ था. इस इमारत का इस्तेमाल भूमिगत शेल्टर के तौर पर किया जा रहा था. यहां स्थानीय लोगों को हर हफ्ते मानवीय सहायता भी बांटी जाती थी. हमले के वक्त नागरिक इसी जगह पर मौजूद थे.
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और पुलिस के मुताबिक, रूस ने पहले हमले के बाद दोबारा बमबारी की. इसे 'डबल टैप' हमला बताया गया है. अधिकारियों का दावा है कि इसके बाद नौ और भारी हथियार गिराए गए. इनमें करीब तीन टन का एफएबी ग्लाइड बम भी शामिल था, जिसमें लगभग 1.4 टन विस्फोटक था. इन हमलों में भूमिगत शेल्टर को निशाना बनाया गया.
रूस ने सैन्य ठिकाने पर हमले का किया दावा
यूक्रेन के अधिकारियों ने आरोप लगाया कि रूसी सेना को पता था कि इस जगह पर आम नागरिकों को सहायता दी जाती है. वहीं, रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि हमला इलाके में मौजूद यूक्रेनी सैन्य इकाइयों पर किया गया था और इसमें 25 सैनिक मारे गए. रूस ने जानबूझकर नागरिकों को निशाना बनाने के आरोपों से इनकार किया.
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संयुक्त राष्ट्र के यूक्रेन मानवाधिकार मिशन ने भी हमले की आलोचना की है. उसका कहना है कि यह बमबारी अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के स्पष्ट उल्लंघन की ओर इशारा करती है. मलबे में दबे लोगों की तलाश जारी है और मृतकों की पहचान के लिए डीएनए जांच का भी इस्तेमाल किया जा रहा है.