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'कतर को बलि का बकरा न बनाएं', नेतन्याहू के चुनावी दखल के आरोपों पर दोहा का पलटवार

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कतर पर चुनावों में विदेशी हस्तक्षेपके आरोप लगाए थे. अब कतर के विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. कतर के प्रवक्ता माजिद अल-अंसार ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि कुछ इजरायली राजनेता और मीडिया जानबूझकर कतर के खिलाफ गलत प्रचार कर रहे हैं.

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नेतन्याहू ने विदेशों पर इजरायल चुनाव में दखल देने का आरोप लगाया था. (Photo- AP/FB)
नेतन्याहू ने विदेशों पर इजरायल चुनाव में दखल देने का आरोप लगाया था. (Photo- AP/FB)

कतर के विदेश मंत्रालय ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लगाए गए विदेशी हस्तक्षेप और चुनावों को प्रभावित करने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसार ने इन सभी दावों को पूरी तरह बेबुनियाद और खतरनाक करार दिया है.

कतर के प्रवक्ता ने कहा कि हम उन तमाम आरोपों को खारिज करते हैं, जिनमें ये कहा गया है कि कतर ने इजरायली चुनावों में दखल दिया है या परिणामों को प्रभावित करने के लिए कोई फंडिंग की है.

उन्होंने कहा कि कुछ इजरायली राजनेता और मीडिया का एक वर्ग जानबूझकर कतर के खिलाफ दुष्प्रचार अभियान चला रहा है, ताकि हालिया चुनावों के बाद देश को इजरायल के आंतरिक राजनीतिक विवादों में घसीटा जा सके.

माजिद अल-अंसार ने कहा कि इजरायली राजनीति में कभी बेंजामिन नेतन्याहू को खरीदने, कभी इजरायली वामपंथियों और अब ताजा आरोपों में 'अरब वोट' को प्रभावित करने का जो दावा किया जा रहा है, अगर उन पर यकीन किया जाए तो ऐसा लगेगा मानो पूरा इजरायल ही कतर के कब्जे में है.

बलि का बकरा न बनाया जाए- कतर

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कतर ने कहा कि इजरायली चुनावी भाषणों में बार-बार कतर का नाम घसीटना कुछ नेताओं की कतर के लिए पागलपन को दिखाता है. अपनी राजनीतिक नाकामियों को छिपाने के लिए कतर को बलि का बकरा नहीं बनाया जाना चाहिए. ऐसे नेताओं को दूसरों पर आरोप मढ़ने के बजाय अपने मतदाताओं पर ध्यान देना चाहिए, आम जनता का जीवन सुधारना चाहिए और क्षेत्र में पैदा हुए नुकसान को ठीक करना चाहिए.

फिलिस्तीन के समर्थन पर अड़ा रहेगा कतर

कतर के प्रवक्ता ने बताया कि देश का इजरायल की आंतरिक राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है. देश के आंतरिक मामलों में दखल देने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने ये भी कहा कि चुनावों के बाद बनने वाली किसी भी इजरायली सरकार को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का सम्मान करना चाहिए.

माजिद अल-अंसार के मुताबिक फिलिस्तीनी मुद्दे पर गंभीरता से बात होनी चाहिए और 1967 की सीमाओं के आधार पर पूर्वी यरुशलम को राजधानी बनाते हुए एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य के अधिकार को मान्यता दी जानी चाहिए. इस तरह के बेबुनियाद आरोप उनकी मध्यस्थता की भूमिका, मानवीय प्रयासों और क्षेत्रीय शांति के संकल्प को डिगा नहीं सकते.

यह भी पढ़ें: इजरायल में अब होगा क्या? किसकी बनेगी सरकार, ट्रंप की एंट्री के बाद नेतन्याहू के अगले मूव पर नजर

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उन्होंने आगे कहा कि कतर अपने अंतरराष्ट्रीय साझीदारों के साथ मिलकर कूटनीति के जरिए संघर्षों को सुलझाने का काम जारी रखेगा और अपने नाम का इस्तेमाल संकीर्ण राजनीतिक एजेंडे के लिए नहीं होने देगा.

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