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'ईरान आज सिर्फ बातचीत के लिए जिंदा', डोनाल्ड ट्रंप को सुलह का भरोसा नहीं? युद्धपोतों में फिर लोड गोला-बारूद

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता विफल होती है तो अमेरिका फिर से ईरान पर हमले शुरू कर सकता है. उन्होंने कहा कि अमेरिकी युद्धपोतों को आधुनिक हथियारों से तैयार किया जा रहा है और अगले 24 घंटे बेहद अहम होंगे.

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि डील नहीं तो ईरान पर फिर बरसेंगे अमेरिकी हथियार (Photo: AP)
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि डील नहीं तो ईरान पर फिर बरसेंगे अमेरिकी हथियार (Photo: AP)

अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर को टिकाऊ बनाने के लिए इस्लामाबाद में बातचीत शनिवार को होगी. लेकिन बातचीत से पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कह दिया है कि अगर यह बातचीत फेल हुई तो अमेरिकी जंगी जहाज ईरान पर दोबारा हमले के लिए तैयार हैं और उन पर पहले से भी ताकतवर हथियार लादे जा रहे हैं.

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान वाले यह बात समझ ही नहीं रहे हैं कि उनके पास कोई ताकत नहीं है. वे सिर्फ दुनिया को थोड़े समय के लिए परेशान कर सकते हैं, क्योंकि उनके पास अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ते हैं. सच्चाई यह है कि आज वे जिंदा हैं तो सिर्फ इसलिए कि बातचीत कर सकें.

कुछ हफ्ते पहले अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर सैन्य हमले किए थे. ट्रंप के अपने शब्दों में 'हमने उन्हें तबाह कर दिया था.' इसके बाद दोनों देशों के बीच दो हफ्ते का सीजफायर यानी अस्थायी तौर पर जंग रोकने का समझौता हुआ. यह समझौता बहुत नाजुक है. इसी को पक्का करने और आगे की शर्तें तय करने के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में बातचीत तय की गई है.

डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?

राष्ट्रपति ट्रंप ने न्यूयॉर्क पोस्ट अखबार को इंटरव्यू दिया. इसमें उन्होंने कहा कि अमेरिकी जंगी जहाजों पर अभी से पहले से भी बेहतर और ताकतवर हथियार लादे जा रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि अगर बातचीत से कोई समझौता नहीं हुआ तो इन हथियारों का इस्तेमाल किया जाएगा और बहुत असरदार तरीके से किया जाएगा. साथ ही उन्होंने कहा कि अगले 24 घंटों में पता चल जाएगा कि बातचीत किस दिशा में जाती है.

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ईरान की तरफ से कौन बातचीत में शामिल होगा?

ईरान की तरफ से विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालीबाफ इस्लामाबाद में बातचीत में हिस्सा लेंगे. गौर करने वाली बात यह है कि अराघची ने जंग से पहले भी बातचीत में कहा था कि ईरान को यूरेनियम को समृद्ध करने का पूरा हक है.

यूरेनियम का मामला क्या है?

यूरेनियम एक ऐसी धातु है जिसे एक खास प्रोसेस से गुजारने पर परमाणु हथियार बनाए जा सकते हैं. ईरान कह रहा है कि उसे यूरेनियम को इस प्रोसेस से गुजारने का हक है. अमेरिका को डर है कि ईरान इसी यूरेनियम से परमाणु बम बना सकता है. 

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान के लोग सामने आकर कहते हैं कि वो परमाणु हथियार नहीं बनाएंगे लेकिन जाकर मीडिया से कहते हैं कि वो यूरेनियम समृद्ध करते रहेंगे. उन्होंने कहा कि हमें नहीं पता कि वो सच बोल रहे हैं या झूठ.

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बातचीत में किन मुद्दों पर होगी चर्चा?

इस्लामाबाद की बातचीत में कई बड़े मुद्दे हैं. पहला और सबसे अहम मुद्दा है कि ईरान के पास जो करीब 1000 पाउंड यानी करीब 450 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम जमीन के नीचे गहरे बंकरों में दबा है, उसे अमेरिका को सौंपना होगा. 

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दूसरा मुद्दा है होर्मुज की खाड़ी को पूरी तरह खोलना. यह दुनिया का सबसे जरूरी तेल का समुद्री रास्ता है और अभी तक बहुत कम जहाज वहां से गुजर पाए हैं. 

तीसरा मुद्दा है कि ईरान जो हमास, हिजबुल्लाह जैसे क्षेत्रीय संगठनों को पैसा और हथियार देता है वो बंद करे. चौथा मुद्दा है ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम यानी लंबी दूरी तक मार करने वाले रॉकेट कार्यक्रम का भविष्य. और पांचवां मुद्दा है कि ईरान चाहता है कि अमेरिका उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंध यानी पाबंदियां हटाए.

बातचीत के नतीजे पर दुनिया की नजर क्यों है?

अगर यह बातचीत कामयाब रही तो जंग पूरी तरह रुकेगी, होर्मुज खाड़ी खुलेगी और तेल के दाम नीचे आएंगे. इसका सीधा असर भारत समेत पूरी दुनिया पर पड़ेगा. लेकिन अगर बातचीत टूटी तो ट्रंप ने साफ कह दिया है कि जहाजों पर हथियार तैयार हैं और हमले फिर शुरू हो जाएंगे.

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