अमेरिका में डेमोक्रेट्स की जीत से पाकिस्तान में दो अलग-अलग तस्वीरें दिख रही हैं. वहां के नेताओं को चिंता है कि डोनाल्ड ट्रंप के साथ बनाई गई नजदीकी अब उनके लिए परेशानी खड़ी कर सकती है. वहीं, आम लोग इस जीत को महंगे पेट्रोल और बढ़ती महंगाई से राहत की उम्मीद के तौर पर देख रहे हैं. उन्हें लगता है कि अमेरिकी नीतियों में बदलाव हुआ तो ईरान युद्ध रुक सकता है. इससे तेल की कीमतें घटेंगी और घर का बिगड़ता बजट संभल सकेगा.
पाकिस्तान के लिए यह चुनावी नतीजा इसलिए भी अहम है क्योंकि पिछले दो साल से वहां की सरकार और सेना ट्रंप प्रशासन के साथ रिश्ते मजबूत करने में जुटी थीं. इस दौरान पाकिस्तान ने अमेरिका तक अपनी पहुंच बढ़ाई. ईरान युद्ध के समय दोनों देशों के बीच बातचीत कराने में भी भूमिका निभाई. लेकिन अब अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स का नियंत्रण होने से पाकिस्तान के पुराने समझौतों पर सवाल उठने की आशंका है.
रॉयटर्स ने अमेरिकी चुनाव के बाद पाकिस्तान के लोगों से बात की. कराची के रहने वाले सज्जाद अली ने कहा कि उन्हें मौजूदा अमेरिकी प्रशासन से सार्थक बातचीत की उम्मीद नहीं है. उनके मुताबिक, जब तक अमेरिका की सरकार में बदलाव नहीं होगा, तब तक जारी खून-खराबा खत्म नहीं होगा. उन्होंने कहा कि लोग शांति, आर्थिक सुधार और तेल की बढ़ती कीमतों में कमी चाहते हैं.
कराची के ही आसिम जफर को भी उम्मीद है कि चुनाव के नतीजे ट्रंप की नीतियों पर लगाम लगा सकते हैं. उन्होंने कहा कि इससे अहम नीतियों में बदलाव हो सकता है. साथ ही मुस्लिम देशों के साथ हो रहे अन्याय को रोकने में भी मदद मिल सकती है. यानी पाकिस्तान के आम लोग अमेरिकी चुनाव को अपनी रोजमर्रा की मुश्किलों से जोड़कर देख रहे हैं.
ट्रंप के साथ नजदीकी बढ़ाने में जुटा था पाकिस्तान
पिछले दो साल में पाकिस्तान ने ट्रंप प्रशासन से रिश्ते मजबूत करने पर काफी जोर दिया. इस कोशिश में वहां की सेना की बड़ी भूमिका रही. सेना प्रमुख आसिम मुनीर व्हाइट हाउस तक पाकिस्तान की पहुंच का अहम जरिया बने. ट्रंप कई बार उन्हें अपना पसंदीदा फील्ड मार्शल बता चुके हैं.
जून 2025 में दोनों की वॉशिंगटन में मुलाकात हुई थी. खास बात यह थी कि इस बैठक में पाकिस्तान की नागरिक सरकार का कोई अधिकारी मौजूद नहीं था. पाकिस्तानी सेना के मुताबिक, बातचीत में सुरक्षा के अलावा खनन, ऊर्जा और क्रिप्टोकरेंसी जैसे मुद्दे भी शामिल थे.
इसके बाद पाकिस्तान ने ट्रंप की कई कूटनीतिक पहलों का समर्थन किया. वह उनके बोर्ड ऑफ पीस में शामिल हुआ. पाकिस्तान ने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए भी नामित किया था. इसके पीछे मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष खत्म कराने में उनकी भूमिका का हवाला दिया गया. हालांकि, भारत ने इस दावे को खारिज किया कि लड़ाई अमेरिकी मध्यस्थता से रुकी थी.
ईरान युद्ध में अमेरिका और ईरान के बीच बना था मध्यस्थ
ईरान युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने अमेरिका और तेहरान के बीच संदेश पहुंचाने का काम किया. उसने अप्रैल में दोनों देशों के अधिकारियों की बातचीत की मेजबानी भी की. हालांकि, इस बातचीत के बाद बना इस्लामाबाद समझौता ज्यादा आगे नहीं बढ़ पाया.
इस भूमिका से पाकिस्तान को अमेरिकी प्रशासन तक पहुंच जरूर मिली, लेकिन आम लोगों को इसका बड़ा आर्थिक फायदा नहीं मिला. अमेरिका के एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक ने दिसंबर 2025 में पाकिस्तान की रेको डिक तांबा और सोना परियोजना के लिए 1.25 अरब डॉलर की फंडिंग मंजूर की थी. दूसरी तरफ, अमेरिकी वित्त मंत्रालय से 10 अरब डॉलर की बड़ी आर्थिक सुविधा देने की मांग अब तक पूरी नहीं हुई है.
ट्रंप से जुड़े कारोबार पर उठ सकते हैं सवाल
अब पाकिस्तान की चिंता की एक वजह वहां हुए कुछ कारोबारी समझौते भी हैं. इनमें ट्रंप के परिवार या उनके करीबी लोगों से जुड़े कारोबार शामिल हैं. डेमोक्रेट्स के पास अमेरिकी संसद के दोनों सदनों का नियंत्रण आने के बाद इन समझौतों की जांच हो सकती है.
पाकिस्तान ने ट्रंप से जुड़े वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल की डिजिटल करेंसी USD1 के इस्तेमाल को लेकर बातचीत के लिए समझौता किया था. इसके अलावा न्यूयॉर्क के रूजवेल्ट होटल के दोबारा विकास को लेकर भी एक समझौता हुआ. इस सौदे पर बातचीत ट्रंप के विशेष प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ ने की थी.
पाकिस्तान ने पावरस कंपनी से ड्रोन खरीदने का सीमित ऑर्डर भी दिया था. इस कंपनी के निवेशकों में ट्रंप के बेटे डोनाल्ड जूनियर और एरिक शामिल हैं. ऐसे में डेमोक्रेट्स इन सौदों की पड़ताल कर सकते हैं. हालांकि, व्हाइट हाउस की प्रवक्ता अन्ना केली ने रॉयटर्स से कहा था कि इन समझौतों में हितों का कोई टकराव नहीं है.
पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी का कहना है कि इस्लामाबाद ने ट्रंप की टीम के साथ लेन-देन और सीधी पहुंच पर आधारित रिश्ते बनाए थे. उनके मुताबिक, ट्रंप के दोस्तों और परिवार से जुड़े कुछ समझौते आगे शायद जारी न रह पाएं.
पाकिस्तान के पास अब भी कुछ रास्ते
डेमोक्रेट्स की जीत का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्ते पूरी तरह खराब हो जाएंगे. जानकारों का मानना है कि आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और ईरान के साथ बातचीत में पाकिस्तान की भूमिका ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर अमेरिका की दोनों पार्टियां साथ आ सकती हैं.
लेकिन पाकिस्तान के आम लोगों के लिए फिलहाल सबसे बड़ा सवाल पेट्रोल की कीमत और घर का खर्च है. उन्हें उम्मीद है कि वॉशिंगटन में बदले सियासी समीकरण का असर ईरान युद्ध पर पड़ेगा. अगर युद्ध थमता है और तेल की कीमतें घटती हैं, तो महंगाई से परेशान परिवारों को कुछ राहत मिल सकती है.