अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव और बैकडोर बातचीत के बीच पाकिस्तान की भूमिका पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं. अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा है कि ईरान युद्ध में उसकी मध्यस्थता "समस्याओं" से भरा है और इजरायल के प्रति उसका रवैया लंबे समय से नकारात्मक रहा है.
ग्राहम की यह प्रतिक्रिया पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान के लिए अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होना स्वीकार्य नहीं है. सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक टीवी इंटरव्यू में आसिफ ने कहा था कि ऐसे किसी समझौते में शामिल होना पाकिस्तान की "मूल विचारधारा" के खिलाफ होगा.
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ख्वाजा आसिफ ने कहा, "हम उन लोगों के साथ कैसे बैठ सकते हैं जिनकी बात पर एक दिन भी भरोसा नहीं किया जा सकता?" आसिफ ने साफ कहा कि व्यक्तिगत तौर पर वह ऐसे किसी समझौते के पक्ष में नहीं हैं जो पाकिस्तान की बुनियादी सोच से टकराता हो.
समस्याओं से भरी है पाकिस्तान की मध्यस्थता
लिंडसे ग्राहम ने इसके बाद एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, "काफी समय से मेरे लिए साफ है कि पाकिस्तान की मध्यस्थ की भूमिका बेहद समस्याग्रस्त है. इजरायल के प्रति उनकी दुश्मनी बहुत पुरानी है." उन्होंने यह भी कहा कि भले ही वायरल वीडियो पुराना हो सकता है, लेकिन उन्हें लगता है कि पाकिस्तान की सोच आज भी वही है.
अमेरिकी सांसद ने पाकिस्तान से सीधा सवाल करते हुए कहा कि अब उसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस अपील पर जवाब देना चाहिए, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान समेत कई मुस्लिम देशों से अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने को कहा था. ट्रंप ने हाल ही में बहरीन, जॉर्डन, तुर्किये, सऊदी अरब और पाकिस्तान जैसे देशों से इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने की अपील की थी.
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पाकिस्तान की मध्यस्थता पर पहले भी उठे सवाल
यह पहली बार नहीं है जब ग्राहम ने पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाए हों. इससे पहले भी उन्होंने उन रिपोर्ट्स पर चिंता जताई थी, जिनमें दावा किया गया था कि ईरानी सैन्य विमानों को पाकिस्तान के एयरबेस पर जगह दी गई. ग्राहम ने कहा था कि अगर यह सच है तो फिर पाकिस्तान को शांति मध्यस्थ मानना मुश्किल हो जाएगा.
उन्होंने तंज कसते हुए कहा था, "मैं पाकिस्तान पर उतना भी भरोसा नहीं करता जितना मैं उसे फेंक सकता हूं." ग्राहम ने यह भी कहा कि अगर पाकिस्तान वास्तव में ईरानी सैन्य संपत्तियों को सुरक्षा दे रहा है, तो अमेरिका को किसी और मध्यस्थ की तलाश करनी चाहिए.