बेंगलुरु में एक आरामदायक नौकरी, एमबीए की डिग्री और एक उज्ज्वल करियर का रास्ता छोड़कर किसान की बेटी ने वो कर दिखाया, जो बहुत से लोग नहीं कर पाते हैं. 26 साल की खुशबू ने रिलायंस रिटेल की नौकरी छोड़कर खुद का स्टार्टअप खड़ा किया और एक सफल बिजनेस बना दिया.
इस साल की शुरुआत में उन्होंने रिलायंस रिटेल में अपनी नौकरी छोड़ दी और मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में स्थित अपने गांव लौट आईं, ताकि उस सफल केले की खेती का बिजनेस शुरू कर सकें, जिसे वह अपने परिवार के खेतों में बचपन से देखती आ रही थीं.
केले की खेती से मोटा मुनाफा कमाने के लिए उन्होंने चिप्स का कारोबार शुरू किया और आज केले के चिप्स बनाने के उनके व्यवसाय को कई राज्यों से ऑर्डर मिल रहे हैं. साथ ही इस बिजनेस से वह बड़े स्तर पर रोजगार भी पैदा कर रही हैं. उन्होंने एक ऐसा मॉडल पेश किया जा रहा है, जिससे उन्हें उम्मीद है कि किसानों को अपनी उपज से अधिक कमाई करने में मदद मिल सकती है.
कौन हैं खुशबू
5 फरवरी, 2000 को बुरहानपुर जिले के बोरसर गांव में जन्मी खुशबू एक किसान परिवार से आती हैं. उनके पिता युवराज पाटिल किसान हैं और कृषि उनके बचपन से ही उनके जीवन का अभिन्न अंग रही है. उन्होंने बुरहानपुर के सेंट टेरेसा हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ाई की और शतरंज की एक उत्साही खिलाड़ी भी थीं. लगभग पांच सालों तक, उन्होंने जिला और मंडल स्तर पर प्रतिस्पर्धा की और लगातार शीर्ष तीन में स्थान हासिल करने के बाद राज्य स्तरीय टूर्नामेंटों में भाग लिया. एनडीटीवी से बात करते हुए खुशबू ने कहा कि शतरंज ने उन्हें धैर्य, अनुशासन और रणनीतिक सोच विकसित करने में मदद की.
जब हुआ 70 लाख का नुकसान
वित्त वर्ष 2017-18 में क्लास 12 पास करने के तुरंत बाद, परिवार पर विपत्ति आई. एक भीषण तूफान ने उनके केले के बागानों को नष्ट कर दिया, जिससे लगभग 70 लाख रुपये का नुकसान हुआ. परिवार पहले से ही कर्ज में डूबा हुआ था और इस आर्थिक झटके ने हालात और भी बदतर कर दिए. नतीजतन, खुशबू को किसी बड़े संस्थान में पढ़ने की योजना छोड़नी पड़ी और इसके बजाय उसने बुरहानपुर के एक स्थानीय कॉलेज में दाखिला लिया और पढ़ाई के साथ-साथ काम भी करने लगी. इस कठिन दौर का असर उनके पिता पर भी पड़ा, जिनका मानसिक तनाव काफी बढ़ गया. उनकी मां, अनीता पाटिल, परिवार को एकजुट रखने वाला स्तंभ बनीं.
इस अनुभव ने खुशबू पर अमिट छाप छोड़ी और किसानों की आय में सुधार लाने और बाजार और मौसम संबंधी झटकों के प्रति उनकी संवेदनशीलता को कम करने के तरीके खोजने के उनके संकल्प को और मजबूत किया.
व्यवसाय की बारीकियां सीखना
2018 में, वह इंदौर चली गईं, जहां उन्होंने ट्रैवेल मैनेजमेंट में एक कोर्स पूरा किया और छह महीने तक काम किया. इसके साथ ही, उन्होंने बुरहानपुर के सेवा सदन कॉलेज से स्नातक की उपाधि भी हासिल की. उनमें एत्रोप्योनोर की छबि बचपन से थी. उन्होंने 'खुश पार्लर डिजाइनिंग' नाम से एक छोटा व्यवसाय शुरू किया, जो सफल रहा. बाद में उन्होंने कर्जत के यूनिवर्सल बिजनेस स्कूल से एमबीए की डिग्री हासिल की. अपने एमबीए के दौरान, उन्होंने लगातार दो सालों तक कॉलेज ओलंपिक प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल जीता.
ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने रिलायंस रिटेल के बेंगलुरु स्थित मुख्यालय में फैशन और लाइफस्टाइल डिपॉर्टमेंट में सहायक प्रबंधक के रूप में काम शुरू किया, जहां उन्हें लगभग 7 लाख रुपये का सालाना सैलरी मिलता था. इस पद ने उन्हें व्यवसाय रणनीति, व्यापार, संचालन, बिक्री, विकास और रिटेल सेल्स को समझने का अनुभव मिला.
कॉर्पोरेट करियर क्यों छोड़ दिया?
नौकरी में सफलता के बावजूद, खुशबू खुद को लगातार अपने घर पर किसानों द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियों के बारे में सोचते हुए पाती थीं. समय बीतने के साथ, उन्हें एहसास हुआ कि समस्या कृषि उत्पादन की कमी नहीं बल्कि खेती के स्तर पर पैसे और ब्रांडिंग का अभाव है. उन्होंने किसानों को मंडी के भावों और बिचौलियों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय, अपनी उगाई हुई फसलों से अधिक आय कमाने वाले तरीके तलाशने शुरू किए. इसी विचार के चलते उन्होंने आखिरकार अपनी नौकरी छोड़ दी और जनवरी 2026 में बुरहानपुर लौट आईं.
केले के चिप्स का ब्रांड बनाना
बुरहानपुर केले की खेती के लिए फेमस है, इसलिए केले के चिप्स बनाना एक सरल बिजनेस लगा. अपने परिवार के सहयोग से, उन्होंने अपने माता-पिता के नाम पर 'युवराज और अनीता पाटिल एंटरप्राइजेज' की शुरुआत की, जिसमें 8-10 लाख रुपये का निवेश किया. यह उद्यम उनके अपने बाग के केलों का उपयोग करके चिप्स का निर्माण करता है. अभी इस कारोबार में 10 लोग काम करते हैं और अब ये बुरहानपुर से बहार भी फैल गया है.