स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास 'एमटी सेटेबेलो' नाम के एक समुद्री जहाज हादसे में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई है. केंद्रीय बंदरगाह, शिपिंग एंड वॉटरवेज मिनिस्टर सर्बानंद सोनोवाल ने इस घटना में तीन भारतीय नाविकों की मौत होने की पुष्टि की है.
पलाऊ के झंडे वाले इस कमर्शियल जहाज पर हुए हादसे के बाद व्यापक स्तर पर खोजबीन की गई थी. शुरुआती रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान दुर्घटना का शिकार हुए क्रू मेंबर्स में से दो भारतीय नाविकों के शव बरामद कर लिए गए थे.
इसके बाद लापता चल रहे तीन अन्य भारतीय क्रू मेंबर्स को भी अब मृत घोषित कर दिया गया है. केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस पूरे हादसे को भारत के समुद्री परिवार के लिए एक बड़ा नुकसान बताया है. उन्होंने इस दुखद घड़ी में मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की है.
मोदी सरकार देगी परिवारों को पूरा सहयोग
केंद्र की मोदी सरकार ने पीड़ित परिवारों को ढाढस बंधाया है. सरकार ने भरोसा दिया है कि इस हादसे का शिकार हुए और जान गंवाने वाले सभी भारतीय नाविकों के परिवारों को हर मुमकिन और पूरा सहयोग दिया जाएगा. दुःख की इस घड़ी में सरकार पूरी मुस्तैदी के साथ उनके साथ खड़ी है और उन्हें अकेले नहीं रहने देगी.
सुरक्षित बचे क्रू मेंबर्स की तुरंत होगी घर वापसी
इसके साथ ही केंद्र सरकार ने रेस्क्यू किए गए बाकी क्रू मेंबर्स को तुरंत और सुरक्षित वापस उनके वतन (भारत) भेजने की व्यवस्था किए जाने के निर्देश दिए हैं. शिपिंग मिनिस्ट्री और सरकार के आला अधिकारी ये सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि जिन नाविकों की इस हादसे में जान गई है, उनके पार्थिव शरीर जल्द से जल्द भारत लाए जा सकें.
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सरकार की कोशिश है कि कानूनी और कूटनीतिक प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा करके शवों को समय पर परिजनों को सौंप दिया जाए, ताकि उनके परिवार पूरे रीति-रिवाज के साथ उनका अंतिम संस्कार कर सकें.
आजतक संवाददाता शिवानी शर्मा से बात करते हुए मृतकों में से एक आदित्य शर्मा के पिता राजेश शर्मा ने कहा, 'कल शाम को मुझे शिपिंग कंपनी से फोन आया था कि मिसाइल से हमला हुआ है. इस हमले में जो तीन क्रू मिसिंग हैं उसमें एक मेरा बेटा भी है. उसके बाद हमें कोई भी कॉल नहीं आई तो हम यही कोशिश कर रहे हैं कि लोकल ऑथोरिटी से, प्रशासन से या हमारे सांसद अनुराग ठाकुर, विदेश मंत्री जयशंकर से अपील है कि मेरे बेटे की डेड बॉडी हम तक पहुंचा दी जाई.'
मृतक के पिता ने आगे कहा, 'लोकल एडमिनिस्ट्रेशन से हमारे पास लोग आए थे कि आपकी रिक्वेस्ट हमने विदेश मंत्रालय को भेजी है. मेरा बेटा 23 साल का था और उसकी ये पहली जॉइनिंग थी. वो मई के आखिर में ही ओमान की तरफ आया था. मुझे सुबह, दोपहर शाम उसका मैसेज आता था और एक-दो दिन में वीडियो कॉल पर बात भी होती थी. मेरी आखिरी बार संडे को उससे बात हुई थी. उसने मुझे बताया था कि मेरे जहाज के करीब ही हमला हुआ था.'