ईरान पर इजरायल और अमेरिकी हमलों के बाद पूरे मिडिल ईस्ट पर जंग के बादल मंडराने लगे हैं. ईरान ने अपने पड़ोसी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजरायल पर बड़ा मिसाइल हमला किया है. जिसके जवाब में अरब देशों की प्रतिक्रिया बता रही है कि यह जंग पूरे मिडिल ईस्ट में फैल सकती है.
खाड़ी देश ईरान पर अमेरिकी हमले से पहले खुद को तटस्थ बताने की कोशिश कर रहे थे. कतर, यूएई और सऊदी अरब ने कहा था कि वे इस जंग का हिस्सा नहीं बनेंगे और न ही अपनी जमीन इसके लिए उपलब्ध कराएंगे. लेकिन, ईरान ने भी क्लियर कर दिया था कि इस इलाके में मौजूद हर अमेरिकी बेस का वैध टारगेट होगा. अब जबकि ईरान ने ताबड़तोड़ मिडिल ईस्ट के पड़ोसी देशों पर हमले किए हैं तो पिछले दो घंटे में बारी बारी से इन्हीं पड़ोसियों की प्रतिक्रिया भी आ गई है.
सऊदी अरब: सऊदी अरब ने ईरान के इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है. उन्होंने इसे एक विश्वासघाती आक्रमण करार दिया जो क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरे में डालता है.
यूएई (संयुक्त अरब अमीरात): यूएई ने इसे राष्ट्रीय संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन बताया है. यूएई ने कहा कि वह इस उकसावे वाली कार्रवाई का जवाब देने का पूरा अधिकार सुरक्षित रखता है.
कतर: कतर ने बताया कि उसने अपनी सीमा की ओर आ रही ईरानी मिसाइलों को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट (हवा में ही नष्ट) कर दिया. कतर ने शांति की अपील की है.
कुवैत: कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने देश की ओर आ रही मिसाइलों को बीच में ही रोका. वहां कई धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं.
बहरीन: बहरीन ने बताया कि मनामा में स्थित अमेरिकी नौसेना के '5वें बेड़े' (5th Fleet) के मुख्यालय को निशाना बनाया गया. बहरीन ने इस हमले की निंदा करते हुए इसे क्षेत्र की स्थिरता के लिए खतरा बताया है.
हालांकि, हमले से पहले ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता की मध्यस्थता कर रहे ओमान ने थोड़ी अलग प्रतिक्रिया दी है. एक तरफ उन्होंने इजरायल और अमेरिका के ईरान पर हमले को खेदजनक बताया. और कहा कि ये इंटरनेशनल लॉ के खिलाफ है. यूएन सिक्योरिटी काउंसिल को दखल देकर तुरंत सीजफायर करवाना चाहिए. क्योंकि, इस हमले से मिडिल ईस्ट को कभी न घरने वाले घाव मिलेंगे. दूसरी, जिन देशों पर हमला हुआ उनके पास सेल्फ डिफेंस का पूरा अधिकार है.
क्या पूरा मिडिल ईस्ट जंग में उतरने जा रहा है?
हालात इसी ओर इशारा कर रहे हैं. इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद ईरान ने बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई की है. खाड़ी देशों (सऊदी, यूएई आदि) के ऊपर से मिसाइलें गुजरने और वहां धमाके होने से युद्ध का दायरा बढ़ गया है. अगर इन देशों ने भी जवाबी कार्रवाई की, तो यह एक पूर्ण क्षेत्रीय युद्ध (Regional War) में बदल सकता है.
ईरानी विदेश मंत्री ने 'इंडिया टुडे' इंटरव्यू साफ किए थे इरादे
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में इंडिया टुडे की गीता मोहन को दिए एक खास इंटरव्यू में साफ चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था कि अगर अमेरिका ने ईरान पर हमला किया, तो इस क्षेत्र (मिडिल ईस्ट) में मौजूद सभी अमेरिकी बेस हमारे लिए 'वैध टारगेट' (Legitimate Targets) होंगे. उन्होंने स्पष्ट किया था कि हम इन बेस को अमेरिका का हिस्सा मानते हैं, न कि उस देश का जहां वे स्थित हैं. अराघची ने यह भी बताया था कि ईरान की मिसाइलें केवल डिफेंस के लिए हैं और उनकी रेंज जानबूझकर 2000 किमी तक सीमित रखी गई है. हालांकि, इतनी रेंज पूरे मिडिल ईस्ट को कवर करने के लिए काफी है.
ईरान ने कहां-कहां और कितनी मिसाइलें दागीं?
इजरायल: ईरान ने इजरायल पर सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन फायर किए हैं.
रियाद (सऊदी अरब)ः रियाद के प्रिंस सुल्तान एयरबेस को निशाना बनाकर ईरान ने मिसाइलें दागी. इस अमेरिकी बेस पर धमाके सुने गए.
यूएई: अबू धाबी और दुबई के पास धमाके हुए, जहां मिसाइलें इंटरसेप्ट की गईं. अबू धाबी में मलबे की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत की खबर है.
बहरीन: यहां अमेरिकी नौसेना के बेस को निशाना बनाया गया. यहां पर हुए एक ड्रोन हमले का वीडियो वायरल हो रहा है.
कतर और कुवैत: इन दोनों देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों (जैसे अल उदेद बेस) की ओर मिसाइलें दागी गईं, जिन्हें एयर डिफेंस सिस्टम ने मार गिराया.
किन मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल हुआ?
ईरान ने इस हमले में अपनी सबसे घातक मिसाइल और ड्रोन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया है. मुख्य रूप से मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें (MRBM) जैसे 'शाहब-3' (1,300 किमी रेंज) और 'इमाद' (1,800 किमी रेंज) का उपयोग हुआ है. साथ ही कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों (SRBM) से नजदीकी बेस पर हमला किया गया. इसके अलावा ईरान ने बड़ी संख्या में 'सुसाइड ड्रोन' (कामिकाजे ड्रोन) का इस्तेमाल किया है, जो ग्रुप में हमला करने में माहिर हैं.
कुलमिलाकर, मिडिल ईस्ट में जंग की आग भड़क चुकी है और अगले कुछ घंटे तय करेंगे कि क्या यह दुनिया के लिए एक नया और बड़ा संकट बनने वाला है. यह आग सिर्फ ईरान और इजरायल तक सीमित रहेगी या ये पूरे मिडिल ईस्ट और दुनिया को झुलसाएगी.