अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान डील को लेकर कई बड़ी बड़ी कामयाबियों का जिक्र किया है. उपराष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका ईरान की फ्रीज संपत्तियों को रिलीज कर सकता है. लेकिन इसके लिए अमेरिका की ओर से शर्तें रखी गई हैं. अमेरिकी की ये शर्तें उसके 'लालची प्लान' को दिखाती है.
जेडी वेंस ने कहा है कि अगर ईरान अमेरिकी सोया, मक्का और गेहूं खरीदता है तो उसकी जब्त संपत्तियों को रिलीज किया जा सकता है. अमेरिकी प्रशासन ने पिछले कई सालों से ईरान के अरबों डॉलर को दुनिया भर में जब्त कर रखा है.
जेडी वेंस ने कहा कि अगर ईरान की सरकार का कोई पैसा जारी किया जाता है, तो उसका इस्तेमाल अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मदद करने और अमेरिकी किसानों को अमीर बनाने में किया जाएगा. उन्होंने कहा हम यह पक्का करना चाहते थे कि हम एक ऐसा प्रोसेस बनाएं जिससे अगर हम कभी ईरान की फ्रीज़ की गई संपत्ति को अनफ्रीज़ करें, तो हम यह पक्का कर सकें कि वह पैसा ईरान के लोगों की मदद में जाए, न कि आतंकवाद को बढ़ावा देने में.
उन्होंने कहा अगर ईरान की कोई फ्रीज की गई संपत्ति अनफ्रीज की जाती है, तो उस प्रोसेस पर हमारी मंज़ूरी होगी. और फिर उस पैसे का इस्तेमाल असल में अमेरिकी सोयाबीन, अमेरिकी मक्का और अमेरिकी गेहूं खरीदने में किया जाएगा. अगर ईरान की संपत्ति कभी अनफ्रीज़ की जाती है, तो उससे अमेरिकी किसान अमीर होंगे और ईरान के लोगों को खाना मिलेगा.
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस स्विटजरलैंड के ल्यूसर्न शहर में चल रही बातचीत का अमेरिका की ओर से नेतृत्व कर रहे थे.
जेडी वेंस ने सबसे बड़ी बात जो कही है वो यह है कि ईरानी अपने परमाणु केंद्रों की जांच अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) से करवाने को राजी हो गया है. उन्होंने कहा कि हो सकता है कि एक सप्ताह के अंदर IAEA के अधिकारी ईरान जाकर उसके परमाणु केंद्रों की जांच शुरू कर देंगे.
अमेरिका और ईरान के संबंधों के लिहाज से यह काफी बड़ी घोषणा है. स्विटजरलैंड में बातचीत के बाद वेंस ने कहा कि IAEA इंस्पेक्टरों की वापसी से ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी फिर से शुरू करने में मदद मिलेगी और इससे वॉशिंगटन और तेहरान के बीच एक बड़े समझौते का रास्ता भी खुल सकता है.
इस कदम को एक अहम उपलब्धि बताते हुए वेंस ने कहा कि IAEA इंस्पेक्टरों को फिर से आने देने का ईरान का फ़ैसला "अमेरिकी लोगों के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है, और ईरान में परमाणु हथियारों के कार्यक्रम को हमेशा के लिए खत्म करने या परमाणु-मुक्त बनाने की दिशा में पहला कदम है."
बता दें कि अमेरिका ने पिछली बार की लड़ाई में ईरान के तीन परमाणु केंद्रों इस्फहान, नतांज और फोर्दो पर हमला किया था. बी-2 बॉम्बर विमानों से किए गए इस हमले को लेकर अमेरिका का दावा था कि ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम जमीन में दब गए हैं. ट्रंप इन्हें न्यूक्लियर डस्ट कहते हैं और इसे निकाल कर अमेरिका के कब्जे में लेने का दावा करते हैं.
सोमवार को वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस ने कहा कि ईरान के साथ शांति बातचीत ने फरवरी के आखिर में शुरू हुई जंग को खत्म करने के लिए "एक सफल फाइनल डील की अच्छी नींव" तैयार की है.
वेंस ने पत्रकारों से कहा, "फाइनल डील ही असली मकाम है. हमने नींव रखी है. हमने घर नहीं बनाया है, लेकिन अमेरिकी लोगों के लिए एक अच्छी स्थिति तक पहुंचने के लिए हमने एक सफल नींव तैयार की है."
वेंस की ये बातें तब सामने आईं जब उन्होंने और ईरान के संसदीय स्पीकर मोहम्मद बाघेर गलिबाफ ने सोमवार को दोनों देशों के बीच जंग को हमेशा के लिए खत्म करने के मकसद से शुरुआती बातचीत का एक लंबा दौर पूरा किया.
स्विट्जरलैंड ने इस बातचीत में मध्यस्थता की कोशिश है. बातचीत रविवार को शुरू हुई और सोमवार तड़के तक चली, उसमें कुछ मुश्किल पल भी आए. लेकिन बातचीत से दोनों पक्षों के बीच कुछ समझौते भी हुए.