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ईरान समझौते का चेहरा बने जेडी वेंस, चूक हुई तो टूट सकता है मिशन 2028 का सपना!

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस हफ्ते ईरान युद्ध खत्म करने के लिए ट्रंप के साथ हुए शुरुआती समझौते के सबसे बड़े बचावकर्ता बनकर सामने आए, कई इंटरव्यू दिए, वीडियो जारी किया और अब स्विट्जरलैंड में बातचीत के नए दौर की शुरुआत से पहले अपनी ही पार्टी के संदेहों का जवाब दे रहे हैं.

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डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि ईरान समझौता अगर सफल नहीं हुआ तो वेंस ज़िम्मेदार होंगे
डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि ईरान समझौता अगर सफल नहीं हुआ तो वेंस ज़िम्मेदार होंगे

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस हफ्ते अपनी नई किताब के प्रचार में व्यस्त रहने वाले थे, लेकिन ईरान युद्ध खत्म करने के लिए हुए शुरुआती समझौते ने उनकी किताब की चर्चा को पीछे कर दिया है. वेंस अब उसी समझौते का सबसे प्रमुख बचाव कर रहे हैं, जिसे उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ तेहरान के साथ आगे बढ़ाया है.

रिपब्लिकन नेता वेंस ने कई इंटरव्यू दिए हैं, एक वीडियो भी जारी किया है और इस समझौते को कामयाबी बताया है. देर फरवरी में जब ट्रंप ने संघर्ष शुरू किया था, तब वेंस इस मुद्दे पर ज्यादा बोलते नहीं दिखे थे. अब वह शुक्रवार को स्विट्जरलैंड जाकर ईरान के साथ बातचीत के नए दौर की शुरुआत कर सकते हैं. पहले उम्मीद थी कि वह समझौते के औपचारिक हस्ताक्षर समारोह में शामिल होंगे, लेकिन ट्रंप ने बुधवार को खुद ही उस पर औपचारिक हस्ताक्षर कर दिए.

समझौते का चेहरा बने वेंस, जोखिम भी बढ़ा

ईरान युद्ध खत्म करने की कोशिश के इस समझौते के साथ वेंस का नाम अब सीधे जुड़ गया है. अगर वह 2028 में व्हाइट हाउस की दौड़ में उतरते हैं, तो यह दांव उनके लिए राजनीतिक फायदा भी ला सकता है, क्योंकि वह एक अलोकप्रिय संघर्ष को खत्म कराने वाले चेहरे के रूप में पेश हो सकते हैं. दूसरी तरफ, अगर समझौता बिगड़ता है तो निशाना भी उन पर आ सकता है. ट्रंप ने बुधवार को मजाक में कहा, अगर यह काम कर गया तो श्रेय मैं लूंगा, और अगर नहीं चला तो मैं जेडी को दोष दूंगा.

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व्हाइट हाउस ने बयान जारी कर वेंस को राष्ट्रपति का दायां हाथ और राष्ट्रीय सुरक्षा टीम का अहम सदस्य बताया. व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ओलिविया वेल्स ने कहा कि इसी वजह से वेंस को विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जैरेड कुशनर के साथ इन बातचीतों की अगुवाई का भरोसा दिया गया. उनके मुताबिक, ट्रंप और उनकी टीम ने युद्धक्षेत्र और बातचीत की मेज, दोनों जगह जो हासिल किया है, वह अमेरिकी सुरक्षा को लंबे समय तक मजबूत करेगा.

समझौते के ब्योरे पर बढ़ा विरोध

रविवार को अमेरिका की ओर से ईरान के साथ समझौता ज्ञापन पर डिजिटल हस्ताक्षर होने के बाद इस हफ्ते विरोध बढ़ने लगा. इसमें कंजरवेटिव खेमे की आवाजें भी शामिल रहीं. उपराष्ट्रपति के प्रवक्ता ल्यूक श्रोडर ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ रिपब्लिकन मध्य पूर्व में शांति लाने और यह सुनिश्चित करने की राष्ट्रपति की कोशिशों को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं कि ईरान कभी परमाणु हथियार न हासिल करे.

समझौते का पाठ कब जारी होगा, इस पर अधिकारियों के जवाब बदलते रहे. इस बीच ड्राफ्ट की लीक कॉपियों पर डेमोक्रेट और रिपब्लिकन सांसदों के साथ-साथ इजरायल और इजरायल समर्थक समूहों ने नाराजगी और शक जताया. आलोचकों का कहना था कि 2 महीने की बातचीत की अवधि खोलने के लिए बने इस समझौते में ईरान को शुरुआत में फायदा मिलता दिख रहा है, जबकि बदले में बहुत कम गारंटी है. साथ ही, ट्रंप ने संघर्ष शुरू करने की जो वजह बताई थी, यानी ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना, वह सवाल अभी भी अनसुलझा है.

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वेंस लगातार कह रहे हैं कि ईरान को अपनी जिम्मेदारियां पूरी करनी होंगी. उन्होंने मंगलवार को फॉक्स न्यूज चैनल के कार्यक्रम फॉक्स एंड फ्रेंड्स में कहा, अगर वे ठीक तरह से व्यवहार नहीं करते हैं, तो उन्हें इस समझौते का कोई फायदा नहीं मिलेगा.

बढ़ते सवालों और विरोध के बीच अमेरिका ने बुधवार को समझौते का पाठ पत्रकारों को दे दिया. इसमें कहा गया है कि ईरान के उच्च स्तर पर समृद्ध यूरेनियम के भंडार, जिसके मलबे के नीचे दबे होने की बात मानी जा रही है, को कम से कम अंतरराष्ट्रीय निगरानी में पतला किया जाना होगा. इसमें यह भी कहा गया है कि ईरान परमाणु हथियार न तो खरीदेगा और न ही विकसित करेगा, हालांकि ऐसी प्रतिबद्धता वह पहले भी करता रहा है. इसके आगे सिर्फ इतना साफ है कि अमेरिका और ईरान, ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत करेंगे. बाकी प्रतिबद्धताओं पर अभी काम होना बाकी है.

पाठ जारी होने के बाद भी दक्षिणपंथी खेमे की आलोचना जारी रही. युद्ध का समर्थन कर चुके कंजरवेटिव रेडियो होस्ट एरिक एरिक्सन ने बुधवार को कहा, यह अमेरिका का आत्मसमर्पण है. टेक्सास के रिपब्लिकन सीनेटर टेड क्रूज, जिन्हें 2028 के संभावित दावेदारों में देखा जाता है, ने समझौते की आलोचना की और कहा कि राष्ट्रपति को दुर्भाग्य से गलत सलाह मिल रही है.

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ट्रंप खेमे में दरार, वेंस की सफाई

यह संघर्ष अब अपने चौथे महीने में पहुंच चुका है और इसने ट्रंप के व्यापक मेक अमेरिका ग्रेट अगेन गठजोड़ में दरार डाल दी है. एक तरफ वे लोग हैं जो ईरान के खिलाफ और सख्त रुख चाहते थे, और दूसरी तरफ वे लोग हैं जो ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट विदेश नीति और नो न्यू वॉर्स के संदेश से जुड़े थे. रिपब्लिकन आलोचक भी अब वेंस की भूमिका पर उंगली उठा रहे हैं. सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या यह समझौता 2015 में डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति बराक ओबामा के दौर के परमाणु समझौते जैसा है, और क्या यह नया समझौता ट्रंप के घोषित युद्ध उद्देश्य पूरे करता है.

साउथ कैरोलिना के रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम, जो ट्रंप के सहयोगी और ईरान पर सख्त रुख रखने वाले नेता माने जाते हैं, पहले इस समझौते को लेकर सशंकित थे. उन्होंने सोशल मीडिया पर वेंस को इस डील का आर्किटेक्ट कहा था. समझौता जारी होने के बाद ग्राहम ने हल्का समर्थन जताते हुए कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और दूसरे मुद्दों पर अमेरिका कोई स्वीकार्य और सत्यापित समझौता कर पाएगा या नहीं, यह अभी तय नहीं है, लेकिन कोशिश करने में उन्हें कम नुकसान दिखता है.

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डेली वायर के राय संपादक बेन डोमेनेक ने फॉक्स न्यूज पर कहा कि इस समझौते के बारे में वह जो कुछ सुन रहे हैं, वह खराब लगता है. उन्होंने वेंस की पहली किताब हिलबिली एलेजी का जिक्र करते हुए तंज कसा और कहा कि क्या रिपब्लिकन पार्टी किसी तरह की हिलबिली ओबामा वाली पार्टी बनती जा रही है.

ट्रंप प्रशासन ने अब तक कांग्रेस को समझौता ज्ञापन के ब्योरे पर औपचारिक ब्रीफिंग नहीं दी है, लेकिन वेंस ने कैपिटल हिल पर कुछ रिपब्लिकन सीनेटरों से चुपचाप संपर्क शुरू कर दिया है. ओहायो के रिपब्लिकन सीनेटर बर्नी मोरेनो, जो वेंस के करीबी सहयोगी हैं, ने कहा कि उपराष्ट्रपति अपनी ही पार्टी के संदेह करने वालों को भी शांत कर पाएंगे, क्योंकि जेडी सिर्फ राष्ट्रपति का संदेश पहुंचा रहे हैं और राष्ट्रपति सबको गलत साबित कर देंगे.

नॉर्थ डकोटा के रिपब्लिकन सीनेटर केविन क्रेमर ने कहा कि यह डील वेंस की राष्ट्रीय सुरक्षा और भू-राजनीतिक समझ को जरूर बढ़ाती है. वेंस ओहायो से 2 साल तक अमेरिकी सीनेटर रहे थे, उसके बाद वह उपराष्ट्रपति बने. हालांकि क्रेमर ने यह भी माना कि अगर समझौता पटरी से उतरता है तो जोखिम रहेगा. उन्होंने कहा कि अच्छी बात यह मानी जा सकती है कि अगर आप नंबर 1 व्यक्ति नहीं हैं, तो आप श्रेय ले सकते हैं और जोखिम या आलोचना से बच सकते हैं, लेकिन शायद इतनी आसानी से नहीं.

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इस हफ्ते दिए इंटरव्यू में वेंस ने अपनी पार्टी के संदेह करने वालों से सीधे बात करने की कोशिश की. मेगिन केली के कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि आलोचक इस समझौते को लेकर ईरानी प्रचार पर भरोसा कर रहे हैं. साथ ही, उन्होंने पार्टी के सख्त रुख वाले खेमे की कुछ नाराजगी को स्वीकार भी किया और गैर-हस्तक्षेपवादी लोगों को भरोसा दिलाने की कोशिश की कि ईरान का यह संघर्ष इराक युद्ध जैसा दलदल नहीं है, जहां वह मरीन के रूप में सेवा कर चुके हैं. वेंस ने कहा कि हम कभी उस तरह के दलदल में नहीं फंसने वाले थे, जिसकी बहुत से लोग चिंता कर रहे थे, क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप जॉर्ज डब्ल्यू बुश नहीं हैं.

डेमोक्रेट नेताओं का कहना है कि ईरान डील का चेहरा बनने के साथ वेंस ही नहीं, इस प्रशासन का हर वह नेता जिसके मन में राष्ट्रपति पद की महत्वाकांक्षा है, इस नतीजे से जुड़ जाएगा. इसमें विदेश मंत्री मार्को रुबियो का नाम भी लिया जा रहा है, जो समझौते के आखिरी चरणों में काफी हद तक चुप रहे. हवाई के डेमोक्रेटिक सीनेटर ब्रायन शैट्ज ने कहा कि उनके हिसाब से इस प्रशासन का कोई भी सदस्य ईरान युद्ध और अर्थव्यवस्था से जुड़े कामकाज के आधार पर ही ऊपर जाएगा या नीचे आएगा, और इसमें कोई अपवाद नहीं है.

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कुल मिलाकर, जेडी वेंस की नई किताब की चर्चा ईरान समझौते के शोर में दब गई है. अब वह इस डील के सबसे बड़े समर्थक के रूप में सामने हैं, लेकिन इसके साथ राजनीतिक जोखिम भी उतना ही बड़ा हो गया है. समझौता आगे बढ़ता है या अटकता है, दोनों हालत में वेंस का नाम उसके साथ जुड़ा रहेगा.

(इनपुट: पीटीआई)

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