इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के निधन की झूठी खबरें फैलाई जा रही थीं. इस बीच उनका एक नया वीडियो सामने आया है, जिसमें वह एक शॉप में कॉफी पीते हुए दिखाई दे रहे हैं. लेकिन ईरान के आसमान से बरसती मिसाइलों और जमीन पर मची चीख-पुकार के बीच तेहरान की सत्ता का सबसे बड़ा चेहरा आज एक रहस्यमयी परछाईं बन चुका है. पिता की मौत के बाद मोजतबा ख़ामेनेई को सुप्रीम लीडर तो चुन लिया गया लेकिन उनकी खामोशी ने दुनिया भर की खुफिया एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं. व्हाइट हाउस से लेकर तेल अवीव तक बस एक ही सवाल गूंज रहा है कि क्या नया सुल्तान वाकई सलामत हैं या फिर रिवोल्यूशनरी गार्ड्स किसी बड़े सच को छुपा रहे हैं? 92 करोड़ के इनाम और कोमा की खबरों के बीच मोजतबा का गायब होने की खबर क्या तेहरान की कोई सोची-समझी चाल है या फिर कुछ और?
आखिर कहां हैं मोजतबा खामेनेई?
मोजतबा खामेनेई के बारे में कई तरह के दावे सामने आ रहे हैं. ब्रिटिश अखबार 'द सन' ने दावा किया है कि मोजतबा खामेनेई कोमा में हैं, जबकि कुछ अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि मिसाइल हमलों में वह गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी उनके हालात को लेकर संदेह जता चुके हैं. इसी बीच अमेरिका ने मोजतबा खामेनेई का सुराग देने वाले को 92 करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर दिया है.
पद संभालने के बाद से सामने नहीं आए मोजतबा खामेनेई
मोजतबा खामेनेई को लंबे समय तक ईरान की राजनीति में पर्दे के पीछे की असली ताकत माना जाता रहा है, लेकिन अब वह खुद ही रहस्य बन गए हैं. अमेरिकी-इजरायली हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी. इसके बाद 8 मार्च 2026 को उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर चुना गया. हालांकि पद संभालने के बाद से वह अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं.
12 मार्च को प्रसारित हुआ संदेश
12 मार्च को उनका पहला संदेश ईरान के सरकारी चैनल प्रेस टीवी पर प्रसारित किया गया, लेकिन उसमें न तो उनकी आवाज सुनाई दी और न ही उनका कोई वीडियो दिखाया गया. इस कारण सवाल उठने लगे हैं कि क्या ईरान का नया सर्वोच्च नेता सुरक्षित है या फिर इस समय सत्ता की असली कमान इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के हाथों में है और वह मोजतबा के नाम पर फैसले ले रही है. 92 करोड़ रुपये का इनाम और नेता का गायब होना मोजतबा खामेनेई को दुनिया का सबसे बड़ा रहस्य बना रहा है.
ईरान के सरकारी मीडिया ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के युद्धाभ्यास का वीडियो भी जारी किया है. इस अभ्यास के दौरान कुछ समय के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद किया गया. वीडियो में आईआरजीसी के नौसेना प्रमुख अलीरेज़ा तंगसिरी हेलिकॉप्टर से पूरे अभियान की निगरानी करते दिखाई देते हैं. इसके बाद ईरानी नौसेना की टुकड़ियों ने कुछ जहाजों पर मिसाइल से हमला किया. कई जहाजों को निशाना बनाकर ईरान ने यह संदेश देने की कोशिश की कि युद्ध की स्थिति में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज कितना संवेदनशील हो सकता है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ट्रंप का बयान
इधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर लगातार बयान दे रहे हैं. 3 मार्च को उन्होंने कहा था कि जरूरत पड़ने पर अमेरिकी नौसेना होर्मुज से गुजरने वाले तेल टैंकरों को सुरक्षा दे सकती है. 9 मार्च को उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने तेल आपूर्ति रोकने की कोशिश की तो अमेरिका कड़ा जवाब देगा. 11 मार्च को ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की समुद्री सुरंगों और नौसेना को काफी नुकसान पहुंचाया है. 13 मार्च को उन्होंने फिर कहा कि अमेरिकी नौसेना टैंकरों को सुरक्षा देगी.
हालांकि 14 मार्च तक टैंकरों की सुरक्षा की योजना लागू नहीं हो सकी. इस दौरान ट्रंप ने यह जरूर बताया कि अमेरिका ने ईरान के तेल भंडार वाले खर्ग द्वीप पर हमला किया है. 15 मार्च को ट्रंप का रुख कुछ बदला हुआ नजर आया और उन्होंने कहा कि होर्मुज से तेल लेने वाले देशों को भी इस रास्ते की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी और अमेरिका इसमें मदद करेगा.
दुनिया भर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का असर
दरअसल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का करीब 20 प्रतिशत रास्ता है. अगर यहां तनाव बढ़ता है तो इसका असर पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है. ट्रंप अब उम्मीद जता रहे हैं कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य प्रभावित देश भी इस इलाके में अपने युद्धपोत भेजेंगे ताकि इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.
इस बीच क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. हाल ही में चीन के 'हैलन जर्नी' नाम के एक कार्गो जहाज को, जो होर्मुज की ओर जा रहा था, रास्ता बदलकर संयुक्त अरब अमीरात के तट की ओर लौटना पड़ा. उसे रास्ते में एक अन्य जहाज 'मयूरी नारी' पर हुए हमले की जानकारी मिली थी, जिसे ओमान के पास नुकसान पहुंचा था.
ओमान के सलालाह बंदरगाह पर भी ईरानी ड्रोन हमलों की खबर सामने आई, जिससे वहां आग लग गई. वहीं खाड़ी देश बहरीन के मुहर्रक इलाके में भी हमला हुआ, जहां जेट इंजन और तेल का भंडार मौजूद है और बहरीन का मुख्य हवाई अड्डा भी स्थित है.
इन घटनाओं के बीच अमेरिका लगातार दुनिया को भरोसा दिला रहा है कि वह होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा. लेकिन ईरान की चेतावनियां और लगातार हो रहे हमले इस समुद्री मार्ग को वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार के लिए एक बड़ी पहेली बना रहे हैं.