इजरायल में संसदीय चुनाव में बहुमत गंवाने के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं. उनकी पार्टी लिकुड ने चुनाव में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए अरब पार्टियों पर वोट चुराने का आरोप लगाया था. हालांकि, इस मामले में गिरफ्तार किए गए तीन संदिग्धों में से दो को रविवार को रिहा कर दिया गया. इससे चुनाव नतीजों पर सवाल उठाने की लिकुड की कोशिश को झटका लगा है.
पुलिस ने 27 अक्टूबर को मतदान शुरू होने से पहले तीन राजनीतिक कार्यकर्ताओं को नकदी से भरे लिफाफों के साथ गिरफ्तार किया था. उन पर कथित तौर पर वोट खरीदने की कोशिश का आरोप था. इसके दो दिन बाद पुलिस ने चार अन्य संदिग्धों को भी गिरफ्तार किया. पुलिस के मुताबिक, इन लोगों के संबंध इस्लामिस्ट पार्टी राआम से थे. हालांकि, पार्टी ने किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किया है.
रविवार को एक जज ने पुलिस की तरफ से संदिग्धों पर और पाबंदियां लगाने की मांग पर सवाल उठाए और कुछ मांगों को खारिज कर दिया. इसके बाद पुलिस ने बताया कि एक संदिग्ध को कुछ शर्तों के साथ रिहा कर दिया गया है, जबकि दूसरे को आठ दिन तक घर में नजरबंद रखने का आदेश दिया गया है. तीसरे संदिग्ध की हिरासत दो दिन के लिए बढ़ा दी गई है.
नेतन्याहू के गठबंधन को झटका देने वाले नतीजे
120 सदस्यों वाली इजरायली संसद नेसेट में नेतन्याहू के सहयोगी दलों के गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं. पिछली संसद में इस गठबंधन के पास 68 सीटें थीं. वहीं, उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले दलों को 48 सीटें मिली हैं. अरब पार्टियों ने कुल 19 सीटें जीती हैं, जिनमें राआम की आठ सीटें शामिल हैं.
नेतन्याहू विरोधी दोनों खेमों के पास मिलकर सरकार बनाने के लिए पर्याप्त सीटें हैं, लेकिन यह साफ नहीं है कि वे साथ आने पर सहमत होंगे या नहीं. नेतन्याहू ने संकेत दिया है कि आइजेनकोट का अरब पार्टियों के साथ गठबंधन करना देशद्रोह जैसा होगा. राआम के नेता मंसूर अब्बास ने गिरफ्तारियों को अलोकतांत्रिक बताया है. उन्होंने कहा कि यह चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने की कोशिश है.
विदेशी दखल के आरोपों पर भी विवाद
लिकुड पार्टी ने चुनाव में विदेशी दखल का आरोप भी लगाया है. चुनाव आयोग के अनुरोध पर इजरायल की सुरक्षा एजेंसी शिन बेट ने इसकी जांच शुरू की है. हालांकि, चुनाव समिति के प्रमुख और सुप्रीम कोर्ट के जज नोआम सोलबर्ग ने रविवार को कहा कि अगर विदेशी दखल के आरोप सही भी साबित होते हैं, तब भी इससे पूरी चुनाव प्रक्रिया या नतीजों की विश्वसनीयता प्रभावित नहीं होगी.
इस बयान पर लिकुड ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब गंभीर आरोपों की जांच चल रही है, तो चुनाव समिति के प्रमुख पहले से नतीजों पर असर नहीं पड़ने की बात कैसे कह सकते हैं.
वहीं, आइजेनकोट ने नेतन्याहू पर चुनाव नतीजों को अवैध साबित करने के लिए संगठित अभियान चलाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि नेतन्याहू कतर के विपक्षी दलों को समर्थन देने की बात कहकर संदेह पैदा कर रहे हैं. कतर ने चुनाव को प्रभावित करने के लिए किसी तरह की फंडिंग करने से इनकार किया है.
अब राष्ट्रपति करेंगे सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू
चुनाव नतीजों को इसी सप्ताह आधिकारिक रूप से प्रमाणित किया जाना है. इसके बाद राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग बुधवार से संसद में चुने गए दलों के नेताओं से मुलाकात करेंगे. वह उनसे जानेंगे कि वे किस नेता को प्रधानमंत्री बनते देखना चाहते हैं. इसके बाद राष्ट्रपति उस उम्मीदवार को सरकार बनाने का मौका देंगे, जिसके पास गठबंधन बनाने की सबसे ज्यादा संभावना होगी.
अगर गठबंधन की कोशिशें नाकाम रहती हैं तो किसी दूसरे उम्मीदवार को मौका दिया जा सकता है. ऐसा नहीं होने पर अगले साल की शुरुआत में इजरायल में फिर चुनाव हो सकते हैं.