ईरान के साथ युद्ध खत्म करने और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने की कोशिशों के बीच इजरायल ने साफ संकेत दिया है कि वह लेबनान से अपनी सेना हटाने के मूड में नहीं है. इजरायल के वित्त मंत्री बेजालेल स्मोट्रिच का कहना है कि इजरायली सेना आने वाले कई वर्षों तक दक्षिणी लेबनान में बने सुरक्षा क्षेत्र में तैनात रहेगी और अमेरिका के दबाव में भी पीछे नहीं हटेगी.
एक इंटरव्यू में स्मोट्रिच ने कहा कि इजरायल तब तक अपने स्टैंड नहीं बदलेगा, जब तक हिज्बुल्लाह पूरी तरह हथियार नहीं छोड़ देता. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका भी इजरायल की "रेड लाइन्स" को समझता है और उन्हें नहीं लगता कि वॉशिंगटन सेना हटाने की कोई औपचारिक मांग करेगा.
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स्मोट्रिच ने कहा कि इजरायल सिर्फ अस्थायी चौकियां नहीं, बल्कि सुरक्षा क्षेत्र में स्थायी सैन्य ढांचा और बेस भी विकसित कर सकता है. उनके मुताबिक, मौजूदा सीमा व्यवस्था इजरायल की सुरक्षा जरूरतों को पूरा नहीं करती और देश को "रक्षात्मक रूप से सुरक्षित सीमाएं" चाहिए.
इजरायली नेता ने जोर देकर कहा, "जब तक हिज्बुल्लाह हथियार नहीं छोड़ देता, हम एक मिलीमीटर भी पीछे नहीं हटेंगे." स्मोट्रिच ने दावा किया कि इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और रक्षा मंत्री भी उनकी ही सोच रखते हैं.
उधर, ईरान-अमेरिका समझौते को लागू करने के लिए स्विट्जरलैंड में अहम वार्ता शुरू होने जा रही है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी बातचीत में हिस्सा लेने के लिए स्विट्जरलैंड पहुंचे हैं. माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों तक दोनों पक्ष युद्धविराम और समझौते के अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा करेंगे.
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स्विस विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल भी स्विट्जरलैंड पहुंच चुका है. बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में होने वाली यह बैठक अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए समझौते को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम मानी जा रही है.
हालांकि, बातचीत शुरू होने से पहले ही नए तनाव उभरते दिख रहे हैं. ईरान ने एक बार फिर होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद करने का दावा किया है, जबकि लेबनान में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. ऐसे में स्विट्जरलैंड की वार्ता पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यही बातचीत तय कर सकती है कि पश्चिम एशिया में शांति की राह आगे बढ़ेगी या क्षेत्र में फिर जंग भड़क उठेगी.