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200 टैंकर फंसे लेकिन होर्मुज स्ट्रेट पार करने वाले 12 तेल टैंकर किसके? देखें Live Tracker

मध्य पूर्व में जारी युद्ध का असर अब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर साफ दिखाई देने लगा है. होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण सैकड़ों जहाज फंस गए हैं और तेल टैंकरों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है. हालात इतने गंभीर हैं कि बीमा प्रीमियम कई गुना बढ़ गया है और तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है.

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होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकर. (Photo: File/Reuters)
होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकर. (Photo: File/Reuters)

मध्य पूर्व में जारी युद्ध के बीच होर्मुज स्ट्रेट में हालात बेहद खतरनाक होते जा रहे हैं. बीते 24 घंटों में सिर्फ 12 जहाज ही इस अहम समुद्री रास्ते को पार कर पाए हैं, जबकि सामान्य दिनों में रोजाना करीब 60 जहाज यहां से गुजरते थे. बढ़ते खतरे की वजह से सैकड़ों जहाज इस इलाके में फंसे हुए हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है.

जंग शुरू होने के बाद से ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर रखा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने इस इलाके में कड़ा सैन्य नियंत्रण लागू कर दिया है. इस समय जो भी जहाज यहां से गुजरने की कोशिश करता है, उसे ड्रोन बोट, समुद्री बारूदी सुरंगों और तटीय मिसाइलों के खतरे का सामना करना पड़ सकता है.

यह भी पढ़ें: ईरान ने रखीं युद्ध खत्म करने की 3 शर्तें, राष्ट्रपति पेजेशकियन बोले- तभी रुकेगी US-इजरायल से जंग

इसी वजह से करीब 350 जहाज इस इलाके में फंसे हुए हैं, जिनमें 286 तेल टैंकर शामिल बताए जा रहे हैं. इस स्थिति का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है. बीते 24 घंटों में ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 100.55 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है. 

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12 तेल टैंकर किसके थे, कहां से आए और कहां गए?

होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल की मात्रा में भी भारी गिरावट आई है. जहां सामान्य दिनों में रोजाना औसतन 1.83 करोड़ बैरल तेल इस रास्ते से गुजरता था, वहीं अब यह घटकर करीब 16 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया है. हालांकि, जो भी तेल टैंकर स्ट्रेट से होकर गुजर रहा है वो ईरान के पोर्ट से निकल रही हैं. मसलन, ईरान ने अब तक जंग के बीच 13 मिलियन बैरल तेल की सप्लाई इसी होर्मुज स्ट्रेट से की है. 

लाइव ट्रैकर के मुताबिक बीते 24 घंटों में सिर्फ 12 जहाज ही होर्मुज स्ट्रेट पार कर पाए लेकिन ये किसके हैं, यह लाइव ट्रैकर से पता चला है. गौरतलब है कि लाइव ट्रैकर अपडेट होता रहता है, ऐसे में आंकड़े अलग हो सकते हैं. हालांकि, इस बीच बताया जा रहा है कि उन टैंकरों को पार करने की इजाजत मिल रही है जिनके ईरान के साथ बेहतर संबंध हैं. खासतौर से चीन, जो अपनी बड़ी आपूर्ति के लिए ईरान पर निर्भर है.

इस बीच थाईलैंड के झंडे वाले जहाज "मयूरी नरी" को 11 मार्च को प्रोजेक्टाइल से निशाना बनाया गया, जिससे वह क्षतिग्रस्त हो गया और उसके तीन क्रू सदस्य लापता बताए जा रहे हैं. इसके अलावा जापान के कंटेनर जहाज “ONE Majesty” को भी मामूली नुकसान हुआ, जब वह रस अल खैमाह के पास लंगर डाले खड़ा था.

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इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी रिलीज करेगा 40 करोड़ बैरल तेल

बढ़ते संकट को देखते हुए इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने वैश्विक बाजार को स्थिर रखने के लिए अपने आपात भंडार से 400 मिलियन या 40 करोड़ बैरल तेल जारी करने की घोषणा की है. वहीं कूटनीतिक स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है. फ्रांस के नेतृत्व में कई देश मिलकर एक नौसैनिक एस्कॉर्ट मिशन शुरू करने का प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं, जिसे "ऑपरेशन एस्पाइड्स" नाम दिया गया है. इसका मकसद जहाजों को सुरक्षा देते हुए इस समुद्री रास्ते को फिर से सुरक्षित बनाना है.

यह भी पढ़ें: भारी बमबारी के बावजूद नहीं डगमगाई ईरान की सत्ता, US इंटेलिजेंस का दावा- 'इस्लामी शासन नहीं गिरने वाली'

अमेरिका ने 16 माइन बिछाने वाले शिप को बनाया निशाना

हालांकि स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है. अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने हाल ही में ईरान की 16 माइन बिछाने वाली नौकाओं को नष्ट कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद हालात सामान्य नहीं हुए हैं. ईरानी नौसेना के प्रमुख रियर एडमिरल अलीरेजा तांगसिरी ने साफ कहा है कि अब जो भी जहाज इस रास्ते से गुजरना चाहता है, उसे ईरान से अनुमति लेनी होगी.

इस बीच कुछ जहाजों ने सुरक्षा के लिए खुद को "चीन से जुड़ा" बताकर भी इस रास्ते से गुजरने की कोशिश की. कई जहाजों ने अपने सिग्नल में "CHINA OWNER" या "ALL CHINESE CREW" जैसे संदेश प्रसारित किए, क्योंकि चीन को ईरान का बड़ा आर्थिक साझेदार माना जाता है.

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