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अमेरिकी ब्लॉकेड को ऐसे चकमा देगा ईरान, दूसरे देशों का झंडा लगाकर तेल वेसेल निकालने की तैयारी

अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नाकेबंदी के लिए नौसेना बल तैनात कर दिए हैं. ऐसे में ईरान भी शैडो फ्लीट के जरिए इस नाकेबंदी को चकमा देने की तैयारी कर रहा है. ईरान के 23 जहाज ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर छुपे हुए हैं और फर्जी झंडे लगाकर अमेरिकी नाकेबंदी को 'धोखा' देकर होर्मुज से निकल सकते हैं और कच्चे तेल का निर्यात कर सकते हैं.

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ईरान अमेरिकी नाकेबंदी को पार करने की रणनीति बना रहा है. (Photo- ITG)
ईरान अमेरिकी नाकेबंदी को पार करने की रणनीति बना रहा है. (Photo- ITG)

ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर समझौता खत्म होने के बाद दोनों देश एक बार फिर एक-दूसरे पर टूट पड़े हैं. ईरान पर दबाव बनाने के लिए अमेरिका ने एक बार फिर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नाकाबंदी कर दी है. अब ईरान इस अमेरिकी नाकाबंदी को चकमा देकर निकलने की तैयारी कर रहा है. 

होर्मुज पर नाकाबंदी करने के लिए अमेरिका ने उत्तरी अरब सागर में दो एयरक्राफ्ट कैरियर्स और 1,000 से ज्यादा नौसैनिकों सहित कम से कम 19 वॉरशिप्स तैनात की हैं. अब ईरान शैडो फ्लीट (गुप्त जहाजी बेड़ा) के जरिए अमेरिकी नाकेबंदी को मात देगा.  

CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान से जुड़े कम से कम 23 जहाज इस समय तैनात हैं, जो अपने ट्रैकिंग सिस्टम को बंद या मैनिपुलेट करके 'डार्क' या 'शैडो फ्लीट' की तरह काम कर रहे हैं.

छिपने के लिए नए पैंतरे अपना रहा ईरान

समुद्री खुफिया जानकारी देने वाली फर्म 'विंडवर्ड' की मानें तो 23 ईरानी जहाज अमेरिकी नौसेना की नजरों से बचने के लिए बेहद मुश्किल पैंतरे अपना रहे हैं. ये जहाज खुद को छुपाने के लिए दूसरे देशों के फर्जी झंडे लगा रहे हैं. इसके साथ ही अपने ट्रांसपोंडर बंद कर रहे हैं और अपनी असली पहचान छुपाने (आइडेंटिटी स्पूफिंग) जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं.

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बता दें कि ईरान लंबे समय से ऐसे ही शैडो फ्लीट का सहारा लेता रहा है. अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने के लिए ईरान एक कॉम्पलेक्स शिपिंग नेटवर्क के जरिए कच्चा तेल बेचता है, जिसमें चीन अब भी उसका सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है.

'टैंकरट्रैकर्स' के आंकड़ों के मुताबिक, तमाम नई पाबंदियों के बावजूद ईरान ने जून के महीने में करीब 5 करोड़ बैरल कच्चे तेल का निर्यात किया है.

खरीदारों के इंतजार में खड़े हैं तेल टैंकर

रिपोर्ट में बताया गया है कि इन 23 जहाजों में से 10 जहाज इस समय कच्चे तेल या दूसरे माल से लदे हुए हैं. वहीं 13 जहाज खाली हैं जो नए माल की लोडिंग के इंतजार में हैं. इसके अलावा, सात प्रतिबंधित VLCC (बेहद बड़े कच्चे तेल के टैंकर) इस समय हिंद महासागर में मौजूद हैं. ये सभी टैंकर ईरानी तेल से पूरी तरह लदे हुए हैं और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों का इंतजार कर रहे हैं.

यह भी पढ़ें: होर्मुज में जान गंवा चुके नौ भारतीय नाविक... भारत ने ईरानी दूतावास को किया तलब

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका ने पहले भी जब ईरान की नाकेबंदी की थी, तो उससे ईरानी तेल निर्यात में भारी कमी तो आई थी, लेकिन वो उसे पूरी तरह रोकने में नाकाम रहा था. हालांकि, उस नाकेबंदी की वजह से ईरान में महंगाई बेकाबू हो गई थी और देश पर आर्थिक दबाव बेहद बढ़ गया था. अब देखना ये है कि अमेरिका के इस कड़े पहरे को ईरान का ये गुप्त जहाजी बेड़ा कैसे भेद पाता है.

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इस बीच, ईरान के तेल मंत्री मोहसिन पाकनेजाद ने बताया कि अमेरिका के 60 दिनों की प्रतिबंध छूट रद्द करने के बावजूद देश का कच्चा तेल निर्यात सामान्य रूप से जारी है. उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम मंत्रालय ने अमेरिकी पाबंदियों को बेअसर करने के लिए पहले से ही पुख्ता सिस्टम तैयार कर रखा है, जिसे कभी बंद नहीं किया गया था.

पाकनेजाद ने अमेरिकी फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका ने अपने वादों को तोड़ा है और इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (MoU) की धारा 10 का सीधा उल्लंघन किया है, जिसमें इस 60 दिनों की छूट का जिक्र था.

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