मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर ईरान के बड़े हमले ने हालात को और ज्यादा गंभीर बना दिया है. इस हमले में कई अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं और सैन्य विमानों को भी भारी नुकसान पहुंचा है. खास बात यह है कि इससे पहले ही ईरान साफ चेतावनी दे चुका था कि जहां-जहां अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं, वे सभी ठिकाने उसके निशाने पर होंगे.
रिपोर्ट के मुताबिक, यह हमला मिसाइल और ड्रोन दोनों से किया गया. एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार कम से कम 12 सैनिक घायल हुए हैं, जिनमें दो की हालत गंभीर बताई जा रही है. हमले में अमेरिकी वायुसेना के रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट को भी नुकसान पहुंचा है, जिससे सैन्य ऑपरेशन्स पर असर पड़ सकता है. प्रेस टीवी ने सैटेलाइट इमेज शेयर किया है जिसमें ईरानी जवाबी हमलों में निशाना बने अमेरिकी बोइंग KC-135 स्ट्रैटोटैंकर पर हमले की तस्वीर देखी जा सकती है.
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सऊदी में इस ताजा हमले से पहले 1 मार्च को भी इसी एयरबेस पर हमला हुआ था, जिसमें 26 वर्षीय अमेरिकी सैनिक बेंजामिन पेनिंगटन की मौत हो गई थी. यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब ईरान और अमेरिका के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है. 28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध में अब तक 300 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक घायल हो चुके हैं, जबकि 13 सैनिकों की मौत हो चुकी है. हालांकि, इनमें से कई सैनिक इलाज के बाद फिर से ड्यूटी पर लौट चुके हैं.
इस बीच, राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि युद्ध खत्म होने के बाद सऊदी अरब और इजरायल के बीच रिश्तों को सामान्य करने का समय आ गया है. उन्होंने "अब्राहम अकॉर्ड" का जिक्र करते हुए कहा कि मिडिल ईस्ट में स्थिरता के लिए यह जरूरी कदम होगा. हालांकि, सऊदी अरब ने साफ कर दिया है कि वह फिलिस्तीन मुद्दे के समाधान के बिना इजरायल से संबंध सामान्य नहीं करेगा.
दूसरी तरफ, ईरान ने कुछ नरमी के संकेत भी दिए हैं. जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के सामने ईरानी राजदूत अली बहरीनी ने कहा कि तेहरान मानवीय मदद और कृषि से जुड़ी सप्लाई को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए गुजरने देने के लिए तैयार है. यह बयान ऐसे समय आया है जब इस अहम समुद्री रास्ते के प्रभावित होने से दुनिया भर में तेल, गैस और खाद्य आपूर्ति पर असर पड़ रहा है.
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कुल मिलाकर तस्वीर साफ है कि एक तरफ हमले तेज होते जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कूटनीतिक कोशिशें भी जारी हैं. लेकिन फिलहाल हालात यही इशारा कर रहे हैं कि यह जंग जल्दी खत्म होती नहीं दिख रही.
ईरान की तरफ से पहले हीकड़ी चेतावनी सामने आई थी. ईरानी सेना ने कहा था कि खाड़ी देशों में ऐसे होटल, गेस्टहाउस या कोई भी जगह जहां अमेरिकी सैनिक ठहरे हुए हैं, उन्हें भी सैन्य लक्ष्य माना जाएगा. खास तौर पर बहरीन और यूएई का नाम लेते हुए यह संकेत दिया गया था कि अब सिर्फ सैन्य ठिकाने ही नहीं, बल्कि नागरिक जगहें भी खतरे में आ सकती हैं.
इसके अलावा, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कथित तौर पर खाड़ी क्षेत्र के लोगों से अपील की है कि वे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए अमेरिकी सैनिकों की लोकेशन की जानकारी गुप्त रूप से साझा करें. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुवैत, कतर, बहरीन और सऊदी अरब में मौजूद कम से कम 13 अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले हुए हैं, जिनसे वे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. इसी वजह से हजारों सैनिकों को अपने बेस छोड़कर होटलों और अन्य नागरिक इलाकों में शिफ्ट होना पड़ा है.