अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जब दोबारा सत्ता में आए तो पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ मिलकर उन्हें लुभाने की हर कोशिश की. शरीफ-मुनीर की हाइब्रिड सरकार ने उन्हें नोबेल पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किया, अपने खनिज संसाधनों का भंडार अमेरिका के लिए खोलकर रख दिया. इस दौरान व्हाइट हाउस से शहबाज-मुनीर की एक तस्वीर काफी वायरल हुई थी जिसमें पाकिस्तान के सेना प्रमुख ट्रंप को खनिजों और कीमती पत्थरों से भरा एक ब्रीफकेस खोलकर दिखा रहे थे.
दूसरी तरफ, भारत ट्रंप की मनमानियों के सामने तनकर खड़ा रहा और ट्रंप की शर्तों पर कोई भी समझौता करने से इनकार कर दिया. भारत ने न तो ट्रंप की शर्तों पर अमेरिका से ट्रेड डील की और न ही उन्हें खुश करने के लिए उनका नोबेल नॉमिनेशन किया. भारत ट्रंप के 50% टैरिफ के आगे भी नहीं झुका और उनकी धमकियों को अनदेखा कर रूस से कच्चे तेल की खरीद भी जारी रखी.
ट्रंप खुद ही भारत के पास आए ट्रेड डील के लिए और हाल ही में दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता हुआ है. व्यापार समझौते को लेकर पाकिस्तान में शहबाज-मुनीर की काफी फजीहत हुई कि वो बस ट्रंप को खुश करने में रह गए और भारत बाजी मार गया.
ट्रंप प्रशासन ने भारत पर लगा 50% टैरिफ घटाकर 18% कर दिया है. वहीं, पाकिस्तान पर यह टैरिफ 19% है.
अमेरिका से ट्रेड डील के बाद जयशंकर पहुंचे अमेरिका
भारत से ट्रेड डील के तुरंत बाद अमेरिका ने भारत को क्रिटिकल मिनरल्स पर आयोजित पहली मंत्री स्तरीय बैठक में शामिल होने का बुलावा भेजा. इस बैठक के लिए विदेश मंत्री 2-4 फरवरी के बीच अमेरिका में थे जिस दौरान उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की तरफ से आयोजित मीटिंग में हिस्सा लिया.
बुधवार को हुई इस मीटिंग से पहले जयशंकर ने रूबियो से द्विपक्षीय वार्ता की जिसमें दोनों पक्षों ने क्वाड (अमेरिका, भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान का समूह) के जरिए 'द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग” को आगे बढ़ाने पर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई. जयशंकर ने बातचीत को लेकर कहा कि दोनों नेताओं ने परमाणु सहयोग, रक्षा संबंधों, अहम खनिजों, व्यापार और ऊर्जा सहित कई मुद्दों पर बातचीत की.
इससे पहले दिन में जयशंकर ने अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट से भी मुलाकात की. दोनों पक्षों ने भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाने और रणनीतिक सहयोग मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की.
जयशंकर अमेरिका तो सऊदी पहुंचे अजित डोभाल
मंगलवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल पांच दिवसीय दौरे पर सऊदी अरब पहुंचे. पिछले साल सितंबर में पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ म्यूचूअल डिफेंस एग्रीमेंट किया था और इस समझौते के बाद पहली बार भारत से कोई वरिष्ठ अधिकारी डोभाल पहुंचा है.
मामले से परिचित सूत्रों ने बताया कि डोभाल के इस दौरे में सऊदी अरब पाकिस्तान के साथ हुए डिफेंस पैक्ट पर भारत को ब्रीफ करेगा. इस दौरान गाजा पीस प्लान पर हुए विकास पर भी चर्चा होगी.
डोभाल का सऊदी अरब दौरा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल-नाहयान की भारत यात्रा के कुछ दिनों बाद हो रहा है. नाहयान जब भारत आए थे तब भारत-यूएई ने रणनीतिक रक्षा साझेदारी को अंतिम रूप देने की प्लानिंग बनाई थी और द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 200 अरब डॉलर तक ले जाने का टार्गेट तय किया था.
सऊदी ने की पाकिस्तान स्पॉन्सर पहलगाम हमले की निंदा
28 जनवरी को सऊदी अरब ने द्विपक्षीय सिक्योरिटी वर्किंग ग्रुप की बैठक में पहलगाम आतंकी हमले और लाल किले पर हुए आतंकी हमले की निंदा की थी. दोनों पक्षों ने जारी सुरक्षा सहयोग की समीक्षा की और वैश्विक स्तर पर तथा अपने-अपने क्षेत्रों में आतंकी संगठनों से पैदा होने वाले खतरों पर चर्चा की.
22 अप्रैल को हुए पहलगाम हमले के लिए भारत ने पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया था. इस हमले के जवाब में भारत ने 7 मई को पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) स्थित आतंकी ठिकानों को टार्गेट किया था. दोनों देशों के बीच चार दिनों का युद्ध हुआ जो 10 मई को संघर्षविराम पर आपसी सहमति के बाद समाप्त हुआ.
पाकिस्तान ने इस युद्ध के बाद सऊदी के साथ डिफेंस पैक्ट किया लेकिन अब सऊदी ने ही पहलगाम हमले की निंदा कर पाकिस्तान के आंतकवादी चेहरे पर करारा तमाचा मारा है.
सऊदी अरब ने वीकेंड में नई दिल्ली में हुई भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लिया, जिसमें फिलिस्तीनी मुद्दे पर टू-स्टेट सॉल्यूशन का समर्थन किया गया.