भारत और अमेरिका के बीच पिछले सोलह महीनों में उतार-चढ़ाव से भरे कूटनीतिक रिश्तों को एक बार फिर नई मजबूती मिल गई है. अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की पर्दे के पीछे की गई कड़ी मेहनत, रणनीतिक फैसलों और अभूतपूर्व कूटनीति के चलते ही दोनों देशों के बीच पैदा हुआ बड़ा गतिरोध पूरी तरह खत्म हो गया.
विदेश नीति के जानकारों का कहना है कि जी7 में पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप का हैंडशेक भारत-अमेरिका के बीच 21वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण जियोपॉलिटिक्स पार्टनरशिप को टूटने से बचा लिया है.
टूटने लगी थी 20 सालों की मेहनत
दरअसल, फरवरी 2025 की मोदी-ट्रंप बैठक के बाद भारत द्वारा व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने से इनकार करने, पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद अमेरिका द्वारा पाकिस्तानी सैन्य कमांडर की तारीफ करने और भारत पर सख्त टैरिफ लगाने से दोनों देशों के रिश्ते बेहद खराब हो गए थे. राजदूत सर्जियो गोर ने सितंबर 2025 में अपनी सीनेट पुष्टि के तुरंत बाद रणनीतिक कदम उठाते हुए दोनों नेताओं के बीच फोन कॉल कराई, वाशिंगटन में दिवाली कार्यक्रम के जरिए कूटनीतिक रास्ते खोले और जनवरी 2026 में दिल्ली लौटकर अंतरिम व्यापार ढांचे के तहत टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करवाकर रिश्तों को दोबारा पटरी पर ला खड़ा किया है.
पाकिस्तानी कमांडर की तारिफ
दोनों देशों के बीच तनाव तब और बढ़ गया जब वॉशिंगटन ने एक पाकिस्तानी सैन्य नेता की सराहना की. इसके अलावा दोनों परमाणु संपन्न पड़ोसियों को अलग करने के लिए अमेरिकी हस्तक्षेप की बार-बार याद दिलाई जाने लगी. भारत जिसे एक राज्य प्रायोजित आतंकवाद वाला देश मानता था, वहां से एक अजीबोगरीब नोबेल शांति पुरस्कार अभियान शुरू हो गया. साथ ही राष्ट्रपति ट्रंप के करीबी होने का दावा करने वाले लोगों ने टीवी चैनलों पर आकर भारत की सार्वजनिक रूप से निंदा की और देश के संवेदनशील आंतरिक मुद्दों में दखल दिया.
सर्जियो गोर की एंट्री
वहीं, जब यूएस ने दंडात्मक टैरिफ लागू किए तो दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत पूरी तरह थम गई. पिछले दो दशकों से बड़ी मेहनत से बनाई गई रणनीतिक गतिशीलता पूरी तरह से टूटती हुई दिखाई दे रही थी. इस बड़े संकट के बीच 11 सितंबर 2025 को सर्जियो गोर सीनेट की विदेश संबंध समिति के सामने अपनी पुष्टि सुनवाई के लिए उपस्थित हुए. इस सीट पर बैठने से बहुत पहले गोर ने अपना पूरा होमवर्क कर लिया था. उन्होंने अपने पूर्ववर्ती एरिक गार्सेटी से सलाह ली और साझेदारी की ऐतिहासिक गलतियों का गहन विश्लेषण किया.
रिश्तों में सुधार की शुरुआत
सर्जियो गोर ने केवल ये नहीं देखा कि रिश्तों में क्या टूटा था, बल्कि इस बात पर ध्यान दिया कि अभी-भी क्या बचाया जा सकता है. सीनेट की मंजूरी मिलने के छह दिन बाद ही 17 सितंबर को राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को उनके जन्मदिन पर बधाई देने के लिए फोन किया. आम जनता के लिए ये केवल एक औपचारिक प्रोटोकॉल था, लेकिन वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बैकचैनल कूटनीतिक हलकों में इसे जमी हुई बर्फ को पिघलाने की दिशा में एक पहला और बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम माना गया था.
फिर खुले कूटनीतिक रास्ते
सीनेट की पुष्टि के ठीक दो दिन बाद नौ अक्टूबर को सर्जियो गोर ने अपना पहला सार्वजनिक कदम उठाया. वाशिंगटन में भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित दिवाली समारोह में उपस्थित होकर उन्होंने दोनों देशों के बीच के तनाव को बिल्कुल नहीं छिपाया. चुनौतियों को स्वीकार करते हुए उन्होंने बेहद नपे-तुले शब्दों में संदेश दिया कि भारत का अभी-भी व्हाइट हाउस में एक मजबूत दोस्त है. उन्होंने भारतीय राजदूत विनय क्वात्रा के साथ अपने सीधे और उच्च स्तरीय कूटनीतिक चैनलों को सार्वजनिक रूप से उजागर किया, जिससे कूटनीतिक रास्ते फिर खुल गए.
दिवाली कार्यक्रम के अगले ही दिन गोर नई दिल्ली में थे, जहां उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप का एक विशेष संदेश खुद प्रधानमंत्री मोदी को सौंपा. ये कोई अंतिम समाधान नहीं था, लेकिन रिश्तों की एक नई शुरुआत जरूर थी. जब गोर उसी महीने वॉशिंगटन लौटे तो राजनीतिक माहौल बदलने लगा था. अमेरिकी केबल न्यूज चैनलों पर महीनों से चल रही तीखी भारत विरोधी बयानबाजी अचानक पूरी तरह से गायब हो गई. Beltway के अनुभवी जानकार समझ गए कि सर्जियो गोर ने पर्दे के पीछे से अपना काम करना शुरू कर दिया है.
राजदूत गोर के आंतरिक कूटनीतिक प्रभाव की असली झलक 10 नवंबर को केनेडी सेंटर में आयोजित उनके रिसेप्शन कार्यक्रम के दौरान देखने को मिली. उस कमरे में राष्ट्रपति ट्रंप के आंतरिक चक्र के सबसे प्रमुख चेहरे जैसे विदेश मंत्री मार्को रुबियो, वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक, चीफ ऑफ स्टाफ सूसी विल्स और यूएसटीआर जेमिसन ग्रीर शामिल थे. वहां विदेश मंत्री रुबियो ने ब्रिटेन के एक डिनर का मजेदार किस्सा सुनाया, जिसमें गोर ने बिना किसी हिचकिचाहट के म्यूजिक लीजेंड मिक जैगर की टेबल पर जाकर रुबियो की तरफ से सीधे बात शुरू कर दी थी.
जनवरी 2026 में दिल्ली लौटने के बाद सर्जियो गोर ने कूटनीतिक मशीनरी को और तेज कर दिया. कुछ ही हफ्तों के अंदर दोनों देशों ने एक अंतरिम व्यापार ढांचा तैयार कर लिया, जिसके तहत भारत पर लगे 25 प्रतिशत के दंडात्मक टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया. इसके बाद उन्होंने 'पैक्स सिलिका' (Pax Silica) पहल में भारत की रणनीतिक भागीदारी सुनिश्चित की. अपनी अप्रैल की वाशिंगटन यात्रा के दौरान गोर ने 10 दिनों में पेंटागन और व्हाइट हाउस के 60 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठकें कीं.
मार्को रुबियो का भारत दौरा
सर्जियो गोर ने भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री की व्हाइट हाउस में विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ एक अनियोजित बैठक भी आयोजित करवाई, जिसने रुबियो की भारत यात्रा की नींव रखी. गोर ने इस दौरे से महीनों पहले ही क्वाड (Quad) विदेश मंत्रियों की बैठक को इस यात्रा के केंद्र में सुनिश्चित कर दिया था. रुबियो के दिल्ली, कोलकाता, आगरा और जयपुर के चार दिनों के व्यस्त और कड़े दौरे के दौरान गोर बैकस्टेज काम करते रहे, ताकि पूरी व्यवस्था बिना किसी गड़बड़ी को हो सके.
वहीं, सर्जियो गोर की महीनों की मेहनत की असली परीक्षा 17 जून को जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान देखने को मिली. पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच की केमिस्ट्री वहां साफ नजर आई, जहां पीएम मोदी ने समुद्री सुरक्षा की चिंताएं उठाईं और ट्रंप ने खोए हुए नाविकों के प्रति संवेदना व्यक्त की. अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक कदम आगे बढ़ते हुए साफ ऐलान किया कि यदि भारत पर कभी-भी हमला होता है तो संयुक्त राज्य अमेरिका पूरी मजबूती के साथ उसकी रक्षा के लिए आगे आएगा.