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किराएदार या मकान मालिक? घर की मरम्मत का पैसा किसे देना होगा

किराए के घर में होने वाली टूट-फूट को लेकर अक्सर किराएदार और मकान मालिक के बीच विवाद हो जाता है. नियमों के अनुसार, छत, पाइपलाइन और वायरिंग जैसी बड़ी मरम्मत की जिम्मेदारी आमतौर पर मकान मालिक की होती है, जबकि छोटी-मोटी मरम्मत और नियमित रखरखाव का खर्च किराएदार को उठाना पड़ता है.

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यदि नुकसान किराएदार की गलती से हुआ है, तो उसकी भरपाई भी उसी को करनी पड़ सकती है. ( Photo: ITG)
यदि नुकसान किराएदार की गलती से हुआ है, तो उसकी भरपाई भी उसी को करनी पड़ सकती है. ( Photo: ITG)

आज के समय में लाखों लोग नौकरी, पढ़ाई या बिजनेस के लिए किराए के मकानों में रहते हैं. लेकिन किराए के घर में रहने के दौरान अक्सर एक सवाल सामने आता है कि अगर घर में कोई चीज टूट जाए, दीवारों में दरार आ जाए, नल खराब हो जाए या बिजली की वायरिंग में दिक्कत आ जाए, तो उसकी मरम्मत का खर्च कौन देगा? मकान मालिक या किराएदार? इसको लेकर कई बार दोनों पक्षों के बीच विवाद भी हो जाता है.

भारत में इस तरह के मामलों को लेकर कुछ सामान्य नियम और दिशानिर्देश मौजूद हैं. खासतौर पर मॉडल टेनेंसी एक्ट 2021 में यह स्पष्ट करने की कोशिश की गई है कि किस तरह की मरम्मत की जिम्मेदारी मकान मालिक की होगी और किस तरह की किराएदार की. तो चलिए जानते हैं. 

बड़ी मरम्मत की जिम्मेदारी किसकी?
अगर घर में कोई बड़ी समस्या आ जाती है, जैसे छत से पानी टपकना, दीवारों में बड़ी दरार पड़ना, पाइपलाइन खराब होना, बिजली की वायरिंग में खराबी आना या घर की संरचना से जुड़ी कोई समस्या होना, तो आमतौर पर इसकी जिम्मेदारी मकान मालिक की मानी जाती है. मकान मालिक का कर्तव्य होता है कि वह घर को रहने लायक स्थिति में बनाए रखें. उदाहरण के लिए यदि बारिश में छत टपकने लगे या घर की मुख्य पानी की लाइन खराब हो जाए, तो उसका खर्च आमतौर पर मकान मालिक को उठाना पड़ता है.

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छोटी-मोटी मरम्मत कौन कराएगा?
वहीं, दूसरी तरफ रोजमर्रा की छोटी समस्याओं की जिम्मेदारी अक्सर किराएदार पर होती है. जैसे बल्ब बदलना, टोंटी या नल की छोटी खराबी ठीक कराना, फ्यूज बदलना या सामान्य रखरखाव से जुड़े काम कराना. ऐसी मरम्मत को नियमित रखरखाव माना जाता है और इसका खर्च आमतौर पर किराएदार को ही उठाना पड़ता है. 

अगर नुकसान किराएदार की वजह से हुआ हो तो?
मान लीजिए किसी किराएदार ने जानबूझकर या लापरवाही से घर को नुकसान पहुंचा दिया. जैसे दरवाजा तोड़ दिया, खिड़की का शीशा तोड़ दिया, फिटिंग निकाल दीं या दीवारों को गंभीर नुकसान पहुंचाया. ऐसी स्थिति में मरम्मत का खर्च किराएदार से वसूला जा सकता है. कानून के अनुसार किराएदार को मकान उसी स्थिति में लौटाना चाहिए, जैसी स्थिति में उसने उसे लिया था. 

सिक्योरिटी डिपॉजिट से पैसे काटे जा सकते हैं?
हां, अगर मकान को हुआ नुकसान किराएदार की गलती से हुआ है और उसका सबूत मौजूद है, तो मकान मालिक सिक्योरिटी डिपॉजिट में से मरम्मत का खर्च काट सकता है. लेकिन मकान मालिक बिना वजह पूरी सिक्योरिटी राशि नहीं रोक सकता. उसे यह साबित करना होगा कि नुकसान वास्तव में किराएदार की वजह से हुआ था और खर्च उचित है.

विवाद से बचने के लिए क्या करें?
विशेषज्ञों का कहना है कि किराए पर घर लेते समय हमेशा लिखित रेंट एग्रीमेंट बनवाना चाहिए. इसमें साफ-साफ लिखा होना चाहिए कि किस प्रकार की मरम्मत की जिम्मेदारी मकान मालिक की होगी और किस प्रकार की किराएदार की. इसके अलावा घर में प्रवेश करते समय उसकी तस्वीरें और वीडियो भी सुरक्षित रखनी चाहिए. इससे बाद में किसी विवाद की स्थिति में सबूत के तौर पर मदद मिल सकती है.

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मकान मालिक मरम्मत न कराए तो क्या करें?
यदि कोई बड़ी खराबी है और उसकी जिम्मेदारी मकान मालिक की है, लेकिन वह मरम्मत कराने से इनकार करता है, तो किराएदार पहले उसे लिखित रूप में सूचना दे सकता है. कई मामलों में कानून किराएदार को मरम्मत करवाकर उसका खर्च किराए से समायोजित करने की भी अनुमति देता है, हालांकि इसके नियम राज्य और एग्रीमेंट के अनुसार अलग हो सकते हैं.

किराए के घर में होने वाली हर टूट-फूट की जिम्मेदारी केवल एक पक्ष पर नहीं होती. बड़ी मरम्मत आमतौर पर मकान मालिक की जिम्मेदारी होती है, जबकि रोजमर्रा के रखरखाव और छोटी-मोटी मरम्मत का खर्च किराएदार को उठाना पड़ता है. वहीं अगर नुकसान किराएदार की गलती से हुआ है, तो उसका खर्च भी उसी को देना पड़ सकता है. इसलिए किराएदार और मकान मालिक दोनों के लिए सबसे जरूरी है कि रेंट एग्रीमेंट स्पष्ट हो और हर बात लिखित रूप में तय की जाए. इससे भविष्य में होने वाले विवादों से बचा जा सकता है.

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