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सीमा विवाद पर नरम पड़ा नेपाल! विदेश मंत्री शिशिर खनल बोले- डिप्लोमेसी से सुलझेंगे मतभेद

सीमा विवाद को लेकर हाल के महीनों में बढ़ी बयानबाजी के बीच नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनल का भारत दौरा कई मायनों में अहम माना जा रहा है. दिल्ली में हुई बैठकों के बाद उन्होंने कहा कि सीमा से जुड़े मुद्दों का समाधान बातचीत, कूटनीति और द्विपक्षीय तंत्र के जरिए ही निकाला जा सकता है.

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भारत-नेपाल सीमा विवाद पर बड़ी टिप्पणी, विदेश मंत्री शिशिर खनल ने सीधा संवाद पर जोर दिया. (File Photo: PTI)
भारत-नेपाल सीमा विवाद पर बड़ी टिप्पणी, विदेश मंत्री शिशिर खनल ने सीधा संवाद पर जोर दिया. (File Photo: PTI)

भारत और नेपाल के बीच चले रहे सीमा विवाद को लेकर कूटनीतिक हलचल तेज है. ऐसे समय में जब नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के बयान ने दोनों देशों के रिश्तों में नई बहस छेड़ दी थी, नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनल का तीन दिवसीय भारत दौरा कई अहम संकेत दिया. दिल्ली से लौटने के बाद खनल ने अपने दौरे को सफल बताया. उन्होंने कहा कि हमने आपसी संबंधों को मजबूत करने और सीमा विवाद समेत कई मुद्दों पर आगे बढ़ने के लिए ठोस कदम उठाए हैं.

5 से 7 जून तक चले अपने आधिकारिक भारत दौरे के दौरान शिशिर खनल ने विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ विस्तृत बातचीत की थी. इसके अलावा उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी मुलाकात की थी. रविवार को त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचने के बाद खनल ने कहा कि भारत और नेपाल के बीच विकास सहयोग, संपर्क विस्तार, व्यापार, पारगमन, ऊर्जा सहयोग, कूटनीति और लोगों के बीच संबंधों जैसे अहम विषयों पर सार्थक चर्चा हुई है.

हालांकि, इस पूरे दौरे का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील पहलू सीमा विवाद ही रहा. शिशिर खनल ने कहा कि नेपाल और भारत की संस्थाएं मौजूदा सीमा विवाद के समाधान की दिशा में काम कर रही हैं. उन्होंने दोहराया कि नेपाल का मानना है कि सीमा विवाद, क्षेत्रीय मतभेद और सीमा प्रबंधन जैसे मामलों को बातचीत, कूटनीति और पहले से मौजूद द्विपक्षीय तंत्र के जरिए ही सुलझाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि हम खुले दिल और आपसी समझ से समाधान निकाला सकते हैं. 

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शिशिर खनल का बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल ही में नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने भारत-नेपाल सीमा विवाद के समाधान के लिए चीन और यूनाइटेड किंगडम जैसे तीसरे पक्षों को शामिल करने का सुझाव दिया था. बालेंद्र शाह के इस बयान ने दिल्ली में असहजता पैदा कर दी थी. भारत ने साफ कर दिया था कि सीमा विवाद एक द्विपक्षीय मामला है. इसके समाधान में किसी तीसरे पक्ष की भूमिका स्वीकार नहीं की जाएगी. इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

ऐसे में शिशिर खनल का बयान दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संतुलन बहाल करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. दिल्ली में हुई बैठकों के दौरान केवल सीमा विवाद ही नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक सहयोग पर भी चर्चा हुई. उन्होंने बताया कि भारत और नेपाल ने मिलकर भारत की एकीकृत भुगतान प्रणाली (UPI) और नेपाल की राष्ट्रीय भुगतान प्रणाली (NPI) के बीच संपर्क सेवा शुरू की है. इससे दोनों देशों के बीच डिजिटल भुगतान व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी.

दौरे के दौरान भारत ने साल 2015 के विनाशकारी भूकंप के बाद पुनर्निर्माण सहायता के तहत तैयार की गई 72 स्वास्थ्य सुविधाएं और 12 सांस्कृतिक विरासत परियोजनाएं भी नेपाल को वर्चुअल माध्यम से हस्तांतरित की हैं. नेपाल के विदेश मंत्री ने इस सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि यह दोनों देशों के ऐतिहासिक रिश्तों की मजबूती का प्रमाण है. उन्होंने कहा कि वॉयस-फर्स्ट ट्रांसलेशन प्लेटफॉर्म को लेकर हुआ समझौता दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग को नई दिशा देगा. 

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इसके अलावा भैरहवा स्थित गौतम बुद्ध अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के संचालन को लेकर हवाई मार्ग से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत हुई है. उन्होंने बताया कि इस विषय पर जल्द ही दोनों देशों की तकनीकी टीमों के बीच बैठक होगी. विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरे की सबसे बड़ी उपलब्धि सीमा विवाद को लेकर संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है. भारत और नेपाल के बीच कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा जैसे क्षेत्रों को लेकर वर्षों से मतभेद रहे हैं, जो कि हालिया दिनों में बढ़ गए हैं.

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