scorecardresearch
 

गुजरने वाले जहाजों से 18 करोड़ की कमाई? ड्रोन-मिसाइल ही नहीं, ईरान ने होर्मुज को भी बना लिया हथियार

ईरान ने युद्ध शुरू होने के बाद से लगभग 20 जहाजों पर हमला किया है, जिन्होंने बिना उसकी अनुमति होर्मुज पार करने की कोशिश की. तेहरान ने बार-बार चेतावनी दी है कि केवल उसके दुश्मनों और उनके सहयोगियों को निशाना बनाया जाएगा, हालांकि उसने स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया कि इसमें कौन-कौन से देश शामिल हैं.

Advertisement
X
होर्मुज को कैसे हथियार बना रहा ईरान. (Photo: AP)
होर्मुज को कैसे हथियार बना रहा ईरान. (Photo: AP)

ये एक बेहद दिलचस्प विरोधाभास है कि दुनियाभर में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला होर्मुज ना तो अभी पूरी तरह से खुला है और ना ही औपचारिक रूप से बंद है. दुनिया के इस सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग में से जहाजों की आवाजाही लगभग बंद है. इसका असर ये हुआ कि तेल की कीमतों में 40 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी देखने को मिली है. मूल रूप से दुनिया उस युद्ध की आर्थिक कीमत चुका रही है जो तीन देशों के बीच लड़ा जा रहा है.

ऐसा नहीं है कि 28 फरवरी को जब अमेरिका या इजराइल ने ईरान पर हमला किया तो उसे युद्ध के नतीजों का अंदाजा नहीं था.  ईरान, होर्मुज के किनारे स्थित है. इस शिपिंग रूट को प्रभावी रूप से नियंत्रित करता है. यह होर्मुज की खाड़ी इतनी संकरी है कि जहाज ईरान द्वारा दावा किए गए जलक्षेत्र से बचकर गुजरने में असमर्थ होते हैं. ईरान इसका हमेशा से प्रेशर पॉलिटिक्स के तौर पर इस्तेमाल करता है.

लेकिन चार हफ्ते से तीन देशों के बीच चल रहे इस युद्ध में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. ईरान ने होर्मुज पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है. ईरान ने इसे पूरी तरह बंद ना करके अपनी शर्तों पर इसे इसका इस्तेमाल करना शुरू किया है. ईरान इस शिपिंग रूट से जहाजों की आवाजाही के लिए ऐसे मुल्कों से अच्छा-खासा शुल्क ले रहा है, जिनसे उनके संबंध बिगड़े हुए नहीं हैं. 

Advertisement

ईरान ने युद्ध शुरू होने के बाद से लगभग 20 जहाजों पर हमला किया है, जिन्होंने बिना उसकी अनुमति होर्मुज पार करने की कोशिश की. तेहरान ने बार-बार चेतावनी दी है कि केवल उसके दुश्मनों और उनके सहयोगियों को निशाना बनाया जाएगा, हालांकि उसने स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया कि इसमें कौन-कौन से देश शामिल हैं.

एनालिसिस फर्म Kpler के अनुसार, मार्च में अब तक केवल 138 जहाज इस संकरे जलमार्ग से गुजरे हैं, जिनमें 87 तेल और गैस टैंकर शामिल हैं यानी प्रतिदिन सिर्फ 5 से 6 जहाज. लेकिन युद्ध से पहले रोजाना लगभग 138-140 जहाज होर्मुज से गुजरते थे. अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के अनुसार, मौजूदा समय में लगभग 2,000 जहाज होर्मुज के आसपास के समुद्री क्षेत्र में फंसे हुए हैं. 

किन देशों को ईरान की मंजूरी मिली?

बहुत कम देशों को अपने टैंकर इस शिपिंग रूट से निकालने की अनुमति मिली है. प्रतिबंधित टैंकर और तथाकथित शैडो फ्लीट अब अधिकांश आवाजाही का हिस्सा बन चुके हैं. 28 फरवरी के बाद से अधिकतर तेल एशिया, विशेष रूप से चीन की ओर गया है. चीन को ईरान का सहयोगी भी माना जाता है. इस अवधि में 1.2 करोड़ बैरल से अधिक तेल चीन पहुंच चुका है.

कुछ टैंकरों ने सुरक्षित मार्ग पाने के लिए खुद को चीन से जुड़ा हुआ भी घोषित किया है. लॉयड्स के एनालिसिस के अनुसार, लगभग एक-तिहाई जहाज ईरान से जुड़े या उसके स्वामित्व वाले थे. इसके बाद ग्रीक और चीन के जहाज हैं. भारत के लिए जा रहे छह टैंकर इस मार्ग से गुजर चुके हैं, जबकि लगभग 20 भारतीय झंडे वाले जहाज, जिनमें 540 भारतीय नाविक हैं, अभी भी पार होने का इंतजार कर रहे हैं. पाकिस्तान और तुर्की के जहाजों को भी ईरान ने अनुमति दी है.

Advertisement

जहाज होर्मुज से कैसे गुजर रहे हैं?

यह मार्ग सभी के लिए खुला नहीं है. ड्रोन, मिसाइल और समुद्र के भीतर बिछी माइंस बड़ी चुनौती बन चुकी हैं. भौगोलिक स्थिति ईरान के पक्ष में है. पहाड़ी तटरेखा उसे ऊंचाई से हमला करने की सुविधा देती है. शुरुआत में कुछ जहाज अपनी पहचान छिपाने के लिए AIS (ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) बंद कर देते थे, लेकिन 12 मार्च को अमेरिकी टैंकर MT Safesea Vishnu पर हमले के बाद यह प्रथा लगभग बंद हो गई.

‘तेहरान टोल बूथ’

अब ईरानी अधिकारी प्रत्येक देश के अनुरोध को अलग-अलग आधार पर देख रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान सुरक्षित मार्ग के लिए प्रति जहाज 20 लाख डॉलर (करीब 18 करोड़ रुपये) तक वसूल रहा है, हालांकि ईरान ने इस दावे से इनकार किया है.

वास्तव में, इस पूरे मार्ग को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा नियंत्रित किया जा रहा है, जिसने एक अलग प्रणाली विकसित कर ली है. अगर कोई टैंकर होर्मुज पार करना चाहता है, तो उसे पहले आईआरजीसी से जुड़े मध्यस्थों के जरिए जहाज की जानकारी, स्वामित्व, माल और चालक दल की लिस्ट जमा करनी होती है. इसके बाद इन दस्तावेजों की जांच होती है, जिसमें तेल ले जाने वाले जहाजों को प्राथमिकता दी जाती है.

Advertisement

अनुमति मिलने पर जहाज को एक कोड और निर्धारित मार्ग दिया जाता है. जैसे ही जहाज होर्मुज के पास पहुंचता है, संचार वीएचएफ रेडियो पर शिफ्ट हो जाता है. इसके बाद गश्ती नौकाएं उसे सबसे संकरे हिस्से से सुरक्षित निकालती हैं. हालांकि होर्मुज तकनीकी रूप से खुला है, लेकिन इसके माध्यम से गुजरना अत्यधिक जोखिम भरा हो गया है. इसका असर बीमा बाजार पर पड़ा है. युद्ध जोखिम प्रीमियम अब तीन से 7.5 फीसदी तक पहुंच गया है.

पहले जहां 200–300 मिलियन डॉलर के बड़े टैंकरों के लिए बीमा प्रीमियम लगभग 0.25 फीसदी होता था. अब यह तीन फीसदी तक पहुंच गया है. इससे प्रति यात्रा बीमा लागत छह लाख डॉलर से बढ़कर 70-90 लाख डॉलर तक पहुंच गई है. इस तरह जब जोखिम का आकलन करना मुश्किल हो जाता है, तो जहाज गायब होने लगते हैं. 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement