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'मैं पद छोड़ने को तैयार, किसी को भी बना दो शिवसेना अध्यक्ष...', पार्टी में टूट के बीच उद्धव ने की इस्तीफे की पेशकश

शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि यदि पार्टी के कार्यकर्ता या नेता महसूस करें कि वे प्रमुख पद के लिए उपयुक्त नहीं हैं, तो वे उस पद को छोड़ने के लिए तैयार हैं.

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उद्धव ठाकरे ने पार्टी में टूट के बीच इस्तीफे की पेशकश की है (Photo_ PTI)
उद्धव ठाकरे ने पार्टी में टूट के बीच इस्तीफे की पेशकश की है (Photo_ PTI)

शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख Uddhav Thackeray ने शुक्रवार को पार्टी के 60वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में भाजपा, शिंदे गुट और दल-बदल करने वाले नेताओं पर तीखा हमला बोला. अपने संबोधन में उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि उन्हें किसी आदेश का इंतजार करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि बालासाहेब ठाकरे बहुत पहले ही गद्दारों के खिलाफ रुख स्पष्ट कर चुके थे. इसी दौरान उन्होंने अपने भाषण में बड़ी बात भी कह दी. 

किसी भी योग्य व्यक्ति को बना दो शिवसेना अध्यक्ष

उन्होंने कहा कि, 'अगर पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को लगता है कि वह शिवसेना प्रमुख पद के लिए ठीक नहीं हैं, तो वह पद छोड़ने के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा, 'मैं किसी भी योग्य व्यक्ति को शिवसेना का अध्यक्ष बनाने के लिए तैयार हूं. मैं संघर्ष से पीछे हटने वाला नहीं हूं, लेकिन जिस दिन आपको लगे कि मैं इस जिम्मेदारी के लिए सही नहीं हूं, उसी दिन मैं यह पद छोड़ दूंगा.'

शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि 'कुछ लोग यह सोच रहे होंगे कि शिवसेना टूटने और राजनीतिक चुनौतियों के बाद उनका हौसला टूट जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं होने वाला. उन्होंने कहा कि वह किसी भी परिस्थिति में हार मानने वाले नहीं हैं.

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देश अराजकता की ओर बढ़ रहा है- उद्धव

उद्धव ठाकरे ने कहा कि इन दिनों बालासाहेब ठाकरे का एक पुराना भाषण वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने पार्टी से विश्वासघात करने वालों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने की बात कही थी. उन्होंने कहा कि यदि ऐसे राजनीतिक अभियान चलते रहे तो फिर "ऑपरेशन कमल" का जवाब "ऑपरेशन तोड़वा" से दिया जाएगा. उन्होंने आरोप लगाया कि देश अराजकता की ओर बढ़ रहा है और विपक्षी उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने तक नहीं दिया जा रहा.

उन्होंने भाजपा को चेतावनी देते हुए कहा, "मेरी भाजपा को सलाह है कि अगर आप इसी रास्ते पर चलते रहे तो आपका भविष्य नहीं है. युवाओं को कम मत आंकिए. आजादी की लड़ाई युवाओं ने लड़ी थी और वे बड़े बदलाव लाने की ताकत रखते हैं."

उद्धव ने पार्टी छोड़कर जाने वाले सांसदों और विधायकों पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं और मतदाताओं ने मेहनत करके उन्हें जिताया था, इसलिए अब जनता को उनसे जवाब मांगने का अधिकार है. उन्होंने कहा, "किसानों ने चंदा दिया, कार्यकर्ताओं ने मेहनत की और ये नेता जीतकर चले गए. मेरे आदेश का इंतजार मत कीजिए, उनसे हिसाब मांगिए."

चुनावी नतीजों से होना चाहिए राजनीतिक दल की सफलता का आकलन

उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल की सफलता का आकलन चुनावी नतीजों से होना चाहिए, उद्धव ने पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री इंद्रजीत गुप्ता का जिक्र करते हुए कहा कि बालासाहेब ने उनसे कहा था कि सत्ता से उन्हें कोई मोह नहीं है और सरकार गिर भी जाए तो कोई फर्क नहीं पड़ता. कांग्रेस के साथ गठबंधन पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए उद्धव ने कहा कि यदि शिवसेना 30 वर्षों तक भाजपा के साथ रहकर भी उसमें विलय नहीं हुई, तो कांग्रेस में विलय होने का सवाल ही नहीं उठता. उन्होंने दावा किया कि राज्य में भाजपा खुद शिंदे गुट की वजह से परेशान है.

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उद्धव ने कांग्रेस को लेकर कहा कि अतीत में दोनों दलों के बीच मतभेद रहे, लेकिन कांग्रेस ने कभी 'मातोश्री' का अपमान नहीं किया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने वादे निभाए हैं. साथ ही उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि शिवसेना का समर्थन न मिलता तो भाजपा बहुत पहले खत्म हो जाती. 

'किसी में विलय के लिए नहीं बनी थी शिवसेना'

उद्धव ठाकरे ने शिवसेना (यूबीटी) के कांग्रेस में विलय की अटकलों को भी खारिज किया. उन्होंने कहा कि शिवसेना किसी में विलय होने के लिए नहीं बनी थी, बल्कि मराठी लोगों के अधिकारों और हिंदुत्व की रक्षा के लिए बनी थी. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब स्थिति ऐसी बन रही है कि भाजपा को ही शिंदे की शिवसेना में शामिल होना पड़ सकता है. अगर पार्टी कार्यकर्ताओं को लगता है कि वह शिवसेना प्रमुख पद के योग्य नहीं हैं, तो वह पद छोड़ने के लिए तैयार हैं, लेकिन संघर्ष से पीछे नहीं हटेंगे.

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