मध्य पूर्व में चल रही तनातनी के बीच होर्मुज स्ट्रेट से एक बड़ी खबर सामने आई है, जिसने अमेरिका की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं. ईरान की सख्त चेतावनी के बाद एक अमेरिकी युद्धपोत को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से पीछे हटना पड़ा. यह घटना ऐसे समय हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप लगातार दावा कर रहे हैं कि अमेरिका इस अहम समुद्री रास्ते को "खोलने" की प्रक्रिया शुरू कर चुका है.
ईरानी स्टेट टीवी का कहना है कि अमेरिकी मिलिट्री शिप को चेतावनी दी गई है कि अगर वह होर्मुज स्ट्रेट पार करता है तो 30 मिनट के अंदर उस पर हमला किया जाएगा. वरिष्ठ ईरानी मिलिट्री अधिकारी ने स्टेट टीवी को बताया कि चेतावनी के बाद अमेरिकी नौसैनिक जहाज वापस चला गया.
यह भी पढ़ें: शुरू होगी बमबारी या जारी रहेगी शांति? इस्लामाबाद में US-ईरान की सीधी बातचीत, PAK भी शामिल
इससे थोड़ी देर पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, "हम अब होर्मुज स्ट्रेट को साफ करने की प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं, ताकि दुनिया के कई देशों जैसे कि चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, फ्रांस, जर्मनी और अन्य देशों को फायदा हो सके." उन्होंने यह भी कहा कि ये देश खुद यह काम करने की हिम्मत नहीं दिखा पा रहे हैं. हालांकि जमीनी स्थिति ट्रंप के दावों से काफी अलग नजर आ रही है.
ईरान की सरकारी प्रेस टीवी के मुताबिक, उसकी चेतावनी के बाद अमेरिकी युद्धपोत को पीछे हटना पड़ा. यह दिखाता है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अब भी ईरान की पकड़ मजबूत बनी हुई है. यही वजह है कि इस क्षेत्र में हर सैन्य कदम बेहद संवेदनशील और जोखिम भरा हो गया है.
होर्मुज स्ट्रेट पर पाबंदी से सप्लाई चेन पर असर
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से करीब 20% वैश्विक तेल सप्लाई गुजरती है. ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर सीधे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. यही कारण है कि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ते ही तेल की कीमतों में उछाल देखा जा रहा है.
इसी बीच, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का दौर भी शुरू हो गया है. इस्लामाबाद में हो रही इन चर्चाओं में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं, जबकि ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर ग़ालिबाफ शामिल हैं. दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत भी चल रही है, जिसमें पाकिस्तान को भी शामिल किया गया है.
यह भी पढ़ें: पाकिस्तान में होने वाली बातचीत सफल होगी? एक्सपर्ट ने अमेरिका को दी ये सलाह
ईरान के लिए होर्मुज स्ट्रेट एक हथियार
विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की पकड़ ही उसकी सबसे बड़ी ताकत बन गई है. यही वजह है कि वह बातचीत में ईरान दबाव बना पा रहा है. दूसरी तरफ, अमेरिका इस स्थिति को अपनी रणनीतिक चुनौती के तौर पर देख रहा है.
इस पूरी घटना का असर सिर्फ सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं है. वॉल स्ट्रीट में शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव देखा गया है, जबकि तेल की कीमतों में भी अस्थिरता बनी हुई है. अमेरिका में महंगाई दर में भी चार साल का सबसे बड़ा उछाल दर्ज किया गया है, जिसकी एक बड़ी वजह ईंधन की बढ़ती कीमतें हैं.