
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 2019 के बाद पहली बार उत्तर कोरिया गए. वहां उन्होंने किम जोंग उन से मुलाकात की और कहा कि चीन हमेशा उत्तर कोरिया के साथ है. लेकिन असली सवाल यह है कि आखिर इस दौरे की जरूरत क्यों पड़ी?
शी जिनपिंग दो दिन के दौरे पर उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग पहुंचे. यह इस साल उनकी पहली विदेश यात्रा थी. जब उनका विमान उतरा तो खुद किम जोंग उन और उनकी पत्नी री सोल-जू एयरपोर्ट पर लेने आए.
इसके बाद दोनों नेता किम इल-सुंग चौक पर एक बड़े स्वागत समारोह में शामिल हुए. शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन को राजकीय अतिथि भवन में ठहराया गया.
शी जिनपिंग ने क्या कहा?
शी जिनपिंग ने किम जोंग उन से बात करते हुए साफ कहा कि चीन का रुख कभी नहीं बदलेगा. उन्होंने तीन बड़ी बातें कहीं. पहली बात उन्होंने कहा, "दुनिया में चाहे कुछ भी हो जाए, चीन उत्तर कोरिया की दोस्ती को हमेशा बहुत अहमियत देता रहेगा."
दूसरी बात - किम जोंग उन की अगुआई में उत्तर कोरिया के समाजवाद के रास्ते को चीन की पूरी और अटल हिमायत मिलती रहेगी.
तीसरी बात - दोनों देशों के साझा हितों और अच्छे माहौल को बनाए रखने का इरादा पक्का है.
एक बात खास रही कि शी जिनपिंग ने परमाणु हथियारों का कोई जिक्र नहीं किया. जबकि चीन हमेशा से कहता आया है कि कोरिया प्रायद्वीप पर परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए.

किम जोंग उन ने क्या कहा?
किम जोंग उन ने शी जिनपिंग को "सबसे खास मेहमान" कहा और इस दौरे को "बहुत बड़ी हिम्मत" बताया. उन्होंने कहा कि चीन और उत्तर कोरिया का रिश्ता हमेशा "इतिहास के सही पक्ष पर खड़ा रहा है."
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किम ने यह भी कहा कि उत्तर कोरिया, चीन के साथ मिलकर व्यापार, बुनियादी ढांचे, तकनीक, शिक्षा और लोगों के आपसी संपर्क में सहयोग बढ़ाएगा. उन्होंने चीन को अपना "सबसे पहला और सबसे जरूरी रणनीतिक साझेदार" बताया.
असली वजह - चीन क्यों चिंतित है?
पिछले कुछ सालों में उत्तर कोरिया और रूस बहुत करीब आ गए हैं. किम जोंग उन ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से गहरी दोस्ती बना ली. यहां तक कहा जाता है कि उत्तर कोरिया ने यूक्रेन के खिलाफ रूस की जंग में अपने सैनिक भी भेजे.
यह देखकर चीन बेचैन हो गया. चीन को डर है कि अगर उत्तर कोरिया रूस के और करीब चला गया तो इस पूरे इलाके में चीन का असर कम हो जाएगा. पश्चिमी देशों के कूटनीतिक सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि चीन इस बढ़ती दोस्ती से काफी घबराया हुआ है.
चीन के लिए उत्तर कोरिया क्यों जरूरी है?
उत्तर कोरिया, चीन का पड़ोसी देश है. चीन चाहता है कि उसकी सीमा पर स्थिरता बनी रहे. लेकिन उत्तर कोरिया पर पूरी तरह काबू नहीं किया जा सकता और न ही उसे खोया जा सकता है.
जानकारों का कहना है कि चीन की कोशिश है कि उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों की वजह से कोई बड़ा संकट न खड़ा हो जो चीन को भी मुश्किल में डाल दे. साथ ही चीन यह भी चाहता है कि प्योंगयांग में उसकी पकड़ बनी रहे.
पुतिन से मिलने के बाद किम पर नजर
हाल ही में पुतिन बीजिंग आए थे और शी जिनपिंग से मिले थे. उसके कुछ ही वक्त बाद शी जिनपिंग उत्तर कोरिया चले गए. यह संयोग नहीं लगता. विश्लेषकों का मानना है कि शी जिनपिंग यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि जिस तरह वे दुनिया में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं, उसमें किम जोंग उन उनके हिसाब से चलें. यह दौरा दरअसल चीन की उस कोशिश का हिस्सा है जिसमें वह अपने इस जरूरी लेकिन मुश्किल पड़ोसी पर फिर से अपना प्रभाव जमाना चाहता है.
इनपुट: रॉयटर्स