चीन ने पहली बार सरेआम यह स्वीकार किया है कि पिछले साल मई में भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे चार दिनों के संघर्ष के दौरान उसने पाकिस्तान को सीधी तकनीकी मदद दी थी. चीन का स्टेट मीडिया CCTV ने एक इंजीनियर से बात की जिसका नाम है झांग हेंग. वो चीन की एक बड़ी कंपनी के पास काम करता है जो लड़ाकू विमान बनाती है. उसने पाकिस्तान के युद्ध के मैदान में जाकर सीधे पाकिस्तानी विमानों को ठीक करने और उन्हें सही तरीके से चलाने में मदद की. ये खुलासा दिखाता है कि चीन कितनी गहराई से पाकिस्तान का साथ दे रहा है.
भारतीय सेना के डिप्टी चीफ लेफिटेनेंट जनरल राहुल सिंह ने कहा था कि चीन ने पाकिस्तान को सीधी सैन्य सहायता दी. चीन के उपग्रह यानी सैटेलाइट भारतीय सेना की गतिविधियों को देख रहे थे और पाकिस्तान को सीधे जानकारी दे रहे थे. अब चीन खुद स्वीकार कर रहा है कि उसने पाकिस्तान के पास जाकर लड़ाकू विमानों की तकनीकी सहायता दी.
झांग हेंग कौन है और क्या करता है?
झांग हेंग चीन की एविएशन इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन यानी AVIC की चेंगदू एयरक्राफ्ट डिज़ाइन इंस्टीट्यूट में काम करता है. ये वही कंपनी है जो चीन के सबसे उन्नत लड़ाकू विमान और ड्रोन बनाती है. पाकिस्तान के पास जो J-10CE लड़ाकू विमान हैं वो इसी कंपनी से बने हैं.
पाकिस्तान के पास कौन से विमान हैं?
पाकिस्तान के पास J-10CE नाम के लड़ाकू विमान हैं. ये चीन ने बनाए हैं. J-10CE चीन के J-10C का निर्यात संस्करण है. ये एक 4.5 पीढ़ी का लड़ाकू विमान है जिसमें AESA रडार यानी एक शक्तिशाली राडार है. इसमें हवा से हवा में मारने वाली मिसाइलें भी लगाई जा सकती हैं. पाकिस्तान ने 2020 में 36 J-10CE विमान और 250 PL-15 मिसाइलें खरीदीं.
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झांग हेंग ने क्या बताया?
चीन के CCTV को दिए इंटरव्यू में झांग ने कहा कि मई की शुरुआत में जब वो पाकिस्तान पहुंचे तो तापमान 50 डिग्री सेल्सियस था यानी 122 डिग्री फारेनहाइट. ये बेहद गर्म है. लड़ाकू विमानों की गड़गड़ाहट सुनाई दे रही थी. हवाई हमलों की सायरन सुनाई दे रही थीं. मानसिक और शारीरिक दोनों दृष्टि से ये एक बहुत बड़ी परीक्षा थी. लेकिन उन्हें जो प्रेरणा मिलती थी वो ये थी कि वो पाकिस्तान को सही से मदद दे सकें और उनके विमान अपनी पूरी ताकत दिखा सकें.
दूसरा चीनी इंजीनियर क्या कहता है?
एक दूसरा इंजीनियर का नाम है शू डा. वह भी चेंगदू संस्थान में काम करता है और वह भी युद्ध के दौरान पाकिस्तान गया था. उसने J-10CE विमान की तुलना एक बच्चे से की. उसने कहा कि 'हमने इसे पाला-पोसा, संभाला और आखिरकार इसे उपयोगकर्ता को सौंप दिया. और फिर ये एक बड़ी परीक्षा का सामना कर रहा था.'
उसने कहा कि J-10CE ने जो शानदार परिणाम दिए वो आश्चर्य की बात नहीं है. 'असल में ये अनिवार्य था. विमान को सही मौका चाहिए था. और जब वह मौका आया तो ये बिल्कुल वैसे ही काम करा जैसे हमने जाना था.'
चीन के सरकारी अधिकारी क्या कहते हैं?
चीन के विदेश मंत्रालय और सैन्य अधिकारियों ने पहले इस बात को नकारा या कम आंका था. लेकिन अब ये इंजीनियर सरेआम कह रहे हैं कि चीन ने पाकिस्तान को तकनीकी सहायता दी.
भारतीय सेना के जनरल ने कहा था कि चीन ने भारत के खिलाफ पाकिस्तान को मदद दी. चीन यह कहता था कि 'ये अपना काम, वो अपना काम' लेकिन अब खुद के इंजीनियरों के मुंह से पूरी बात बाहर आ गई.
चीन के सोशल मीडिया और मीडिया ने क्या किया?
चीन के सरकारी मीडिया और सोशल मीडिया ने पाकिस्तान के दावों को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया कि पाकिस्तान ने भारतीय विमान मार गिराए. इससे चीनी तकनीक की श्रेष्ठता दिखानी थी. लेकिन पाकिस्तान को जो नुकसान हुआ, उसके बारे में चीनी मीडिया चुप रहा.
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पाकिस्तान को क्या नुकसान हुआ?
पाकिस्तान को भारी नुकसान हुआ. आतंकवादियों के कई मुख्यालय नष्ट हुए. महत्वपूर्ण हवाई अड्डे नष्ट हुए. चीन के रडार विफल हुए. भारत की वायु सेना ने हवा में अपनी श्रेष्ठता दिखाई.
चीन क्या बेचने की योजना बना रहा है?
सूचना है कि चीन अब अपने J-35 स्टेल्थ बॉम्बर को पाकिस्तान को बेचने की योजना बना रहा है. J-35 एक बेहद आधुनिक और लुप्त रहने वाला बॉम्बर है.
विशेषज्ञों का कहना है कि चीन के इंजीनियरों के ये खुलासे असल में एक 'बिक्री की चाल' है. चीन यह दिखा रहा है कि उसकी तकनीक कितनी अच्छी है ताकि दूसरे देश भी उससे हथियार खरीदें.