मक्का में अपने दो नागरिकों को मौत की सजा दिए जाने के मामले में बांग्लादेश ने सऊदी अरब के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. बांग्लादेश ने सऊदी अरब से इस पूरी कार्रवाई, अदालत के फैसले, कानूनी सहायता और शवों की स्थिति को लेकर छह अहम सवालों के जवाब मांगे हैं.
बांग्लादेशी समाचार पत्र 'प्रथम आलो' के मुताबिक, ढाका ने सऊदी अरब से 6 सवाल किए. पहला ये कि दोनों नागरिकों पर क्या आरोप थे और कथित घटना कब और कहां हुई थी. दूसरा सवाल ये कि दोनों बांग्लादेश नागरिकों की गिरफ्तारी की तारीखें क्या थीं और अदालत के फैसलों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराई जाएं.
तीसरा सवाल ये कि मृत्युदंड किस तरीके से दिया गया- उनका सिर कलम करके या किसी और तरह से? चौथा सवाल था कि दोनों के शव कहां रखे गए हैं, क्या उन्हें बांग्लादेश वापस भेजा जाएगा या सऊदी अरब में ही दफना दिया गया है?
कानूनी सहायता को लेकर भी मांगा जवाब
पांचवां सवाल ये है कि क्या जांच और सुनवाई के दौरान दोनों को वकील या किसी तरह की कानूनी सहायता मिली थी या उन्होंने इसकी मांग की थी? छठा और आखिरी सवाल ये कि सितंबर में सऊदी अधिकारियों ती सौंपी गई बांग्लादेशी कैदियों की लिस्ट में दोनों पर व्यभिचार और आईटी संबंधी अपराधों का जिक्र था, लेकिन सजा का जिक्र नहीं था. इस विवरण और सऊदी गृह मंत्रालय के सार्वजनिक बयान के बीच विरोधाभास क्यों है?
क्या है पूरा मामला?
बता दें कि मक्का की एक मस्जिद के भीतर अश्लील हरकत करने का दोषी ठहराए जाने के बाद 14 अक्टूबर को बांग्लादेशी मूल के एक पुरुष और एक महिला को सजा-ए-मौत दे दी गई थी. इस घटना की जानकारी आधिकारिक तौर पर पहले न मिलने से बांग्लादेश सरकार हैरान है.
इसके बाद जेद्दा स्थित बांग्लादेशी दूतावास ने 19 अक्टूबर को मक्का में सऊदी विदेश मंत्रालय की शाखा को एक नोट वर्बल भेजा था. दूतावास के कांसुल जनरल ने उसी दिन सऊदी विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी से मुलाकात कर इस मुद्दे पर चर्चा की थी.
20 कैदियों पर भी बांग्लादेश ने पूछे सवाल
बांग्लादेश सरकार ने ढाका में तैनात सऊदी राजदूत के सामने भी इस मुद्दे को उठाया है. बांग्लादेशी अधिकारियों का कहना है कि सजा पर अमल होने से पहले उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई थी. इसके अलावा, बांग्लादेश ने उन 20 नागरिकों के बारे में भी जानकारी मांगी है, जिनके नाम कैदियों की लिस्ट में दोषी के रूप में दर्ज हैं लेकिन उनकी सजा स्पष्ट नहीं की गई है. फिलहाल सऊदी की ओर से इस पत्र का जवाब आना बाकी है.