बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण-2 (ICT-2) ने प्रतिबंधित अवामी लीग के सात नेताओं को मौत की सजा सुनाई है. इन सभी नेताओं को साल 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हिंसा भड़काने और मानवता के खिलाफ अपराध करने का दोषी पाया गया है.
मंगलवार को जस्टिस मोहम्मद नजरुल इस्लाम चौधरी की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने ये फैसला सुनाया. सभी सातों नेताओं की गैर-मौजूदगी में सुनवाई हुई, जिनकी पैरवी सरकार की ओर से नियुक्त वकीलों ने की.
सजा पाने वालों में अवामी लीग के महासचिव और पूर्व मंत्री ओबैदुल कादर, संयुक्त महासचिव AFM बहाउद्दीन नसीम और पूर्व सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री मोहम्मद अली अराफात शामिल हैं.
इनके अलावा युबो लीग के अध्यक्ष शेख फजले शम्स पारश, महासचिव मैनुल हुसैन खान निखिल, छात्र लीग के अध्यक्ष सद्दाम हुसैन और महासचिव शेख वली आसिफ एनान को भी मौत की सजा सुनाई गई है.
हिंसा भड़काने और मीडिया नियंत्रण का आरोप
अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि इन नेताओं ने उकसाने वाले बयान देकर, बैठकें करके और हिंसक योजनाओं को अंजाम देकर छात्र प्रदर्शनों को दबाने की कोशिश की. आरोपी देशभर में हुई मौतों, दमन और मीडिया पर नियंत्रण करने की कोशिशों में भी शामिल थे.
इस मामले में 22 जनवरी को सात आरोप तय किए गए थे और 17 फरवरी से सुनवाई शुरू हुई थी. इन विरोध प्रदर्शनों के बाद ही 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना की सरकार गिर गई थी और वो भारत आ गई थीं. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, जुलाई और अगस्त 2024 के बीच हिंसा में लगभग 1,400 लोग मारे गए थे.
शेख हसीना को भी मिल चुकी है फांसी की सजा
इससे पहले, नवंबर 2025 में इसी अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए मौत की सजा सुनाई थी. कोर्ट ने हसीना को कमांड जिम्मेदारी के तहत दोषी माना था. हालांकि, एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने निष्पक्ष सुनवाई की प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए थे.
इस बीच, नई दिल्ली से शेख हसीना ने एक ऑडियो प्रेस कॉन्फ्रेंस जारी किया था. इसमें उन्होंने कहा था कि वो जेल या मौत की सजा की परवाह किए बिना इस साल दिसंबर में बांग्लादेश लौटने के लिए तैयार हैं.