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काकोली का दावा, महुआ का निशाना... आखिर किसके साथ खड़े हैं यूसुफ पठान?

ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी में सियासी संग्राम छिड़ गया है. विधायकों के बाद सांसद भी टूटते नजर आ रहे हैं. बागी रह अपनाने वाले टीएमसी नेताओं का दावा है कि उनके साथ यूसुफ पठान भी हैं. इसके बाद महुआ मोइत्रा ने यूसुफ पठान पर तीखे हमले किए. ऐसे में सवाल उठता है कि यूसुफ पठान किसके साथ खड़े हैं.

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टीएमसी सांसद यूसुफ पठान किसके साथ (Photo-ITG)
टीएमसी सांसद यूसुफ पठान किसके साथ (Photo-ITG)

पश्चिम बंगाल की सत्ता बदले ही सियासत में भूचाल आया हुआ है. टीएमसी के विधायकों के टूट के बाद लोकसभा सांसदों की बगावत ने 'दीदी' यानी ममता बनर्जी के अभेद्य किले की दीवारों को हिलाकर रख दिया है. दिल्ली से लेकर कोलकाता तक कयासों का बाजार गर्म है कि टीएमसी से कौन-कौन टूटने वाला है और कौन नेता ममता बनर्जी के वफादार सिपाही बने रहेंगे? 

टीएमसी के बागी गुट की अगुवाई कर रही सांसद काकोली घोष दस्तीदार के दावों और तेजतर्रार महुआ मोइत्रा के तीखे बयानों ने राजनीतिक पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है. इन दोनों के केंद्र में बहरामपुर से टीएमसी के लोकसभा सांसद यूसुफ पठान हैं. 

काकोली घोष का दावा है कि लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखने वाले टीएमसी सांसदों में यूसुफ पठान में शामिल हैं. इसके बाद ही महुआ मोइत्रा ने यूसुफ पठान को लेकर तबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए. काकोली का अपना दावा है और महुआ का निशाना साधे जाने के बाद सवाल खड़े हो रहे हैं कि यूसुफ पठान टीएमसी के राजनीतिक पिच पर किसके साथ खड़े हैं?

काकोली का दावा पठान हमारे साथ
ममता बनर्जी की सबसे करीबी माने जाने वाले सांसद काकोली घोष दस्तीदार बगावत की राह पर चल पड़ी है. काकोली घोष की अगुवाई में सोमवार को तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखा. इसमें उन्होंने सदन में अलग बैठने और एनडीए में शामिल होने की इच्छा जताई है है.  काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया है  कि उनके साथ टीएमसी के 28 में से 20 सांसद हैं.  

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काकोली घोष ने कहा कि पूर्व क्रिकेटर और टीएमसी सांसद यूसुफ पठान भी उनके बागी गुट में शामिल हैं और एनडीए को समर्थन कर रहे हैं. काकोली घोष का दावा है कि यूसुफ पठान भी बागी सांसदों के समूह में शामिल हैं. घोष के बयान और युसुफ पठान पर दावे किए जाने से टीएमसी के भीतर जारी सियासी उथल-पुथल मच गई है.

महुआ के निशाने पर युसुफ पठान
टीएमसी की फॉयर ब्रांड सांसद महुआ मोइत्रा ने सोमवार को युसुफ पठान पर जमकर निशाना साधा. महुआ ने कहा कि   यूसुफ पठान आप दिल्ली जा रहे हैं, क्योंकि आपको अमित शाह का कॉल आया है? थोड़ी हिम्मत तो रखो. आप भारत के लिए खेले हैं. हमारे जिले ने आपको बड़े अंतर से जिताया है. थोड़ी शर्म और रीढ़ की हड्डी को मजबूत रखो. 

महुआ मोइत्रा ने आगे कहा कि 2024 लोकसभा चुनाव में सभी सांसद टीएमसी के टिकट पर जीते थे. मैंडेट एनडीए के लिए नहीं था. बीजेपी में जाना है तो पहले अपनी सीटों से इस्तीफा दें और बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ें. देखते हैं आप कितने बड़े हीरो हैं. महुआ मोइत्रा ने यूसुफ पठान के साथ गृह मंत्री अमित शाह को टैग किया है. 

काकोली घोष दस्तीदार के दावे के बीच  कृष्णानगर से सांसद महुआ मोइत्रा ने जिस तरह युसुफ पठान पर निशाना साधा है. उसके चलते सियासी सस्पेंस और बढ़ गया है. महुआ मोइत्रा, जो हमेशा सीधे हमले के लिए जानी जाती हैं, उन्होंने बिना नाम लिए बागी रुख अपनाने की सोच रहे नेताओं पर निशाना साधा है. महुआ के इस तीखे बयान को सीधे तौर पर यूसुफ पठान से जोड़कर देखा जा रहा है. 

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सस्पेंस की पिच पर पठान किसके साथ
यूसुफ पठान को ममता बनर्जी 2024 में खुद राजनीति में लेकर आई थीं और उन्हें बहरामपुर सीट से कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के खिलाफ चुनाव लड़ाकर सांसद बनाया. युसफ पठान क्या इस सियासी संकट की घड़ी में ममता बनर्जी का साथ छोड़कर काकोली घोष के साथ जाएंगे?

टीएमसी में जब से सांसदों की बगावत की खबर आई है, यूसुफ पठान ने पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है. पठान की चुप्पी ने टीएमसी खेमे की धड़कनें बढ़ा दी हैं. यूसुफ पठान जानते हैं कि बहरामपुर में अधीर रंजन चौधरी जैसे कद्दावर नेता को हराने में ममता बनर्जी के चेहरे और टीएमसी के काडर ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई थी. टीएमसी में टूट के बाद भी युसुफ पठान की तरफ से कोई सफाई नहीं है. 

हालांकि, पहले खबर आई थी कि टीएमसी ने बहरामपुर से सांसद यूसुफ पठान को अपनी सीट से इस्तीफा देने के लिए मनाने की कोशिश की थी. साथ ही इसके लिए भी पूर्व क्रिकेटर सौरव गांगुली की मदद ली गई. ऐसा इसलिए ताकि ममता बनर्जी सीट से उपचुनाव लड़ सकें. उन्होंने इस्तीफा देने से मना कर दिया था, जिसके बाद लेकिन बाद युसुफ पठान खुद सामने आए थे और वीडियो जारी करके अपनी बात रखी थी. 

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युसुफ पठान ने कहा था कि ममता बनर्जी की तरफ से उनसे इस्तीफा देने की बात नहीं कही गई और न ही आधिकारिक रूप से पार्टी के किसी नेता ने कहा.  सौरव गांगुली ने भी तमाम दावों को खारिज कर दिया था. हालांकि, युसुफ पठान ने बहुत ही सधे के अंदाज में अपनी बात रखी थी.

गुजरात कनेक्शन और बीजेपी का साया
टीएमसी से बगावत करने खेमे का दावा है कि यूसुफ पठान उनके साथ है और लोकसभा स्पीकर को लिखे पत्र में उनका भी नाम है. राजनीतिक गलियारों में इस बात से जोड़ा जा रहा है कि गुजरात से ताल्लुक रखने के चलते यूसुफ पठान क्या सियासी पाला बदलकर बीजेपी को समर्थन करने वाले गुट के साथ जा सकते हैं. टीएमसी में जिस तरह से टूट का खतरा मंडरा रहा है, उसके चलते युसुफ पठान पर सभी की निगाहें हैं. 

काकोली घोष दस्तीदार का दावा अपनी जगह है और महुआ मोइत्रा का आक्रामक अंदाज अपनी जगह. लेकिन यूसुफ पठान अच्छी तरह जानते हैं कि सियासत की 'गूगली' को कैसे खेलना है. टीएमसी सांसदों की इस बगावत ने ममता बनर्जी की नींद उड़ा रखी है और ऐसे में यूसुफ पठान का अगला कदम टीएमसी की आगे की दिशा तय करेगा. क्या पठान इस मुश्किल वक्त में ममता बनर्जी के संकटमोचक बनेंगे या फिर एक नया 'धमाका' कर बंगाल की राजनीति को पूरी तरह पलट देंगे? 
 

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