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पहले SIR, फिर होल्डिंग सेंटर और अब अमित शाह की कमेटी... बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ ऑल आउट वार

बांग्लादेश से सटे भारत के राज्यों में घुसपैठ और डेमोग्राफिक बदलाव पर बीजेपी ने मिशन मोड पर काम करना शुरू कर दिया है, पश्चिम बंगाल में होल्डिंग सेंटर एक्टिवेट हो गए हैं जहां घुसपैठियों को पकड़कर रखा जा रहा है. इस बीच केंद्र ने बॉर्डर राज्यों में जनसंख्या असंतुलन पर एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर दिया गया है. इससे पहले SIR के खौफ से भी सैकड़ों बांग्लादेशी बंगाल छोड़ चुके हैं.

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पश्चिम बंगाल-बांग्लादेश बॉर्डर पर तैनात BSF के जवान. (Photo: PTI)
पश्चिम बंगाल-बांग्लादेश बॉर्डर पर तैनात BSF के जवान. (Photo: PTI)

भारत की सीमाओं पर लंबे समय से चल रही अवैध घुसपैठ के खिलाफ सरकार की लड़ाई अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है. सरकार चरणबद्ध तरीके से इनके खिलाफ एक्शन ले रही है. पहले चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन से संदिग्ध नामों की छंटनी की जा रही है. अब केंद्र सरकार ने अपने वादे के मुताबिक सीमावर्ती जिलों में हो रहे डेमोग्राफिक बदलाव पर हाई लेवल कमेटी का गठन कर दिया है. 

इस बीच पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने घुसपैठियों को चुन-चुनकर बाहर करना शुरू कर दिया है. राज्य सरकार ने हर जिले में बांग्लादेशी घुसपैठियों को पकड़कर रखने के लिए होल्डिंग सेंटर को एक्टिवेट कर दिया है. सरकार के अनुसार मालदा और मुर्शिदाबाद में कुछ घुसपैठियों को पकड़कर रखा भी गया है.

ये कदम स्पष्ट संकेत देते हैं कि केंद्र सरकार अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को चिन्हित कर उन्हें डिटेन और डिपोर्ट करने की दिशा में एक्शन लेना शुरू कर दिया है. 

बीजेपी लंबे समय से दावा करती रही है कि पश्चिम बंगाल और सीमावर्ती इलाकों में बड़े पैमाने पर बांग्लादेशियों की घुसपैठ हुई है. बीजेपी के अनुसार इसका असर स्थानीय जनसंख्या संरचना, जमीन, रोजगार और वोट बैंक की राजनीति पर पड़ा है. हाल के वर्षों में केंद्र सरकार ने सीमा पर फेंसिंग तेज की है, BSF की तैनाती बढ़ाई है और राज्य सरकारों से अवैध प्रवासियों की पहचान करने को कहा है. अब डेमोग्राफिक बदलावों की जांच के लिए प्रस्तावित कमेटी को इसी रणनीति का अगला चरण माना जा रहा है. 

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पश्चिम बंगाल इस बहस का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है. राज्य के कई सीमावर्ती जिलों में पिछले कुछ दशकों में मुस्लिम आबादी में तेज वृद्धि दर्ज की गई है. बीजेपी और कई हिंदू संगठनों का आरोप है कि यह वृद्धि केवल प्राकृतिक जनसंख्या बढ़ोतरी का परिणाम नहीं है, बल्कि अवैध घुसपैठ से भी जुड़ी हुई है. गृह मंत्री अमित शाह और पीएम मोदी बार-बार कहते हैं कि घुसपैठ से बॉर्डर राज्यों जैसे असम, पश्चिम बंगाल में अप्राकृतिक जनसंख्या परिवर्तन हो रहा है, जो रोजगार, सुरक्षा और स्थानीय संस्कृति को प्रभावित कर रहा है. बीजेपी इसे हिंदू-भारतीय पहचान की रक्षा और सीमा सुरक्षा के मुद्दे के रूप में प्राथमिकता देती है. 

बीजेपी के लिए बांग्लादेशी घुसपैठ राष्ट्रीय सुरक्षा, सांस्कृतिक पहचान और डेमोग्राफिक संतुलन का प्रमुख मुद्दा रहा है.

अब बीजेपी ने चरणबद्ध रूप से इसके खिलाफ काम शुरू किया है. 

बांग्लादेश बॉर्डर पर 'घुसपैठियों' की भीड़

पश्चिम बंगाल की शुभेंदु सरकार ने शपथ ग्रहण के बाद से ही घुसपैठियों के खिलाफ एक्शन को अपने टॉप एजेंडे में रखा है. 

यह अभियान ‘Detect, Delete and Deport’ की रणनीति पर आधारित है.  BJP सरकार के सत्ता में आने के बाद सभी 23 जिलों में होल्डिंग सेंटर्स बनाने के निर्देश दिए गए हैं. मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे बॉर्डर जिलों में पहले सेंटर पहले ही चालू हो चुके हैं, जहां संदिग्ध बांग्लादेशियों को रखा जा रहा है.

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इसके बाद पश्चिम बंगाल में मौजूद घुसपैठियों में हड़कंप मचा हुआ है. अब कथित तौर पर घुसपैठियों के कई जत्थे पश्चिम बंगाल से बांग्लादेश बॉर्डर की ओर जा रहे हैं. 

उत्तरी 24 परगना और मालदा से आ रहे तस्वीरों से पता चलता है कि उत्तरी 24 परगना के बशीरहाट सब-डिवीजन में स्थित हकीमपुर चेकपॉइंट पर, मंगलवार सुबह सौ से ज्यादा बांग्लादेशी पुरुष और महिलाएं इकट्ठा हुए. ये सभी अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके वापस अपने देश लौटना चाहते थे. रिपोर्ट यह है कि इनमें से कई लोग पश्चिम बंगाल के अलग-अलग इलाकों में अवैध रूप से रह रहे थे. विदेशी नागरिकों को देश से निकालने और उनके लिए होल्डिंग सेंटर बनाने के संबंध में सरकार की ताजा घोषणाओं के बाद वे चेकपॉइंट पर पहुंचे.

उत्तरी 24 परगना हकीमपुर बॉर्डर पर भी ऐसी तस्वीरें देखने को मिली है. यहां बंगाल में अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशी पूरे परिवार के साथ वापस बांग्लादेश लौटने की कोशिश कर रहे हैं. 

नवंबर 2025 में भी देखने को मिली थी ऐसी तस्वीरें

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव से पहले जब राज्य में SIR की प्रक्रिया हो रही थी तो उस दौरान भी भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर सैकड़ों बांग्लादेशी प्रवासियों का रेला देखने को मिला था. तब हकीमपुर चेकपोस्ट पर सतखीरा और खुलना जिले के सैकड़ों घुसपैठिए भारी-भरकम सामान लिए बांग्लादेश वापस लौटने की कोशिश करते दिखे थे. 

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इन प्रवासियों का कहना था कि वे भारत के अलग अलग राज्यों में प्रवासी मजदूर के रूप में काम कर रहे थे. वे रिक्शा चालक, बिल्डिंग मजदूर और भट्ठे में काम करके गुजारा कर रहे थे. इनमें से ज्यादातर लोग बांग्लादेश के सतखिरा और खुलना जिलों के निवासी थे.

कइयों ने यह स्वीकार भी किया कि वे वर्षों पहले अवैध तरीके से भारत में घुसे थे और यहां के झुग्गियों और कस्बों में अपने परिवारों के साथ रह रहे थे. तब यहां 300 से ज्यादा लोग जमा हो गए थे. 

SIR ने वोटर लिस्ट को साफ करने में मदद की लेकिन इससे विवाद भी खड़ा हुआ. पर  इससे बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान और डिटेक्शन की प्रक्रिया तेज हुई. हालांकि इस मुद्दे पर अभी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है.

केंद्र ने गठित की उच्च स्तरीय कमेटी

मंगलवार को ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अप्राकृतिक जनसंख्या बदलाव पर एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाने की घोषणा की है.

अमित शाह ने एक्स पर पोस्ट में कहा कि घुसपैठ और अन्य कारणों से अप्राकृतिक जनसंख्या बदलाव किसी भी राष्ट्र के वर्तमान व भविष्य के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है. 

इसी चुनौती से निपटने के लिए 15 अगस्त 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनसांख्किीय बदलाव पर उच्च स्तरीय कमेटी के गठन की घोषणा की थी. मंगलवार को इस कमेटी का गठन कर लिया है. 

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गृह मंत्री ने कहा कि जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नावलेकर (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में बनी इस कमिटी में जनगणना आयुक्त के साथ दुर्गा शंकर मिश्रा (Retd IAS), बालाजी श्रीवास्तव (Retd IPS) और डॉ. शमिका रवि समिति के सदस्य होंगे. संयुक्त सचिव (Foreigners-I), गृह मंत्रालय, इस समिति के सदस्य सचिव होंगे. 

गृह मंत्री ने साफ कर दिया कि डेमोग्राफिक बदलाव हमारी संप्रभुता के साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून व्यवस्था, सामाजिक संरचना में गंभीर बदलाव और जनजातीय समाज के संरक्षण से जुड़ी एक गंभीर समस्या है. यह कमिटी, अवैध प्रवास और अन्य असामान्य कारणों से पूरे भारत में हो रहे डेमोग्राफिक बदलाव का व्यापक मूल्यांकन करेगी और धार्मिक एवं सामाजिक समुदायों के स्तर पर असामान्य जनसंख्या परिवर्तनों के पैटर्न का विश्लेषण करेगी तथा इसका सुनियोजित और समयबद्ध समाधान प्रस्तुत करेगी. 

ऐतिहासिक संदर्भ

1947 में देश के विभाजन, 1971 की बांग्लादेश मुक्ति संग्राम और उसके बाद की आर्थिक-राजनीतिक अस्थिरता ने बांग्लादेश से भारत में खासकर पश्चिम बंगाल और असम में बड़े पैमाने पर माइग्रेशन को बढ़ावा दिया. अनुमान है कि लाखों लोग अवैध रूप से आए. ये शुरू में शरणार्थी थे लेकिन बाद में आर्थिक कारणों और जनसंख्या दबाव से घुसपैठ बढ़ी. पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश के साथ 2000 किलोमीटर से ज्यादा लंबी सीमा इस घुसपैठ को और भी आसान बनाती है. बीजेपी इस घुसपैठ को लंबे समय से उठाती रही है.

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पश्चिम बंगाल में अप्राकृतिक डेमोग्राफिक असंतुलन

2011 की जनगणना के अनुसार राज्य में मुस्लिम जनसंख्या 27% के करीब है. बॉर्डर जिलों में यह बदलाव ज्यादा स्पष्ट है.
पश्चिम बंगाल का मुर्शिदाबाद ऐसा जिला है जहां मुस्लिम जनसंख्या 66.27% है. 
मालदा में ये आंकड़ा 51.27% है. यानी कि यहां की आधी आबादी मुस्लिम है. उत्तर दिनाजपुर की लगभग 50% मुस्लिम है. 
दक्षिण 24 परगना में 35.57% मुस्लिम रहते हैं. उत्तर 24 परगना में मुस्लिम आबादी 25.8O है. नादिया, दक्षिण दिनाजपुर और अन्य बॉर्डर क्षेत्रों में भी मुस्लिम जनसंख्या वृद्धि दर सामान्य से ज्यादा दर्ज की गई है. 

पश्चिम बंगाल में पहली बार सरकार बनाने के बाद बीजेपी ने घुसपैठ और जनसंख्या असंतुलन के मुद्दे पर पर एक्शन शुरू कर दिया है.
 

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