पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने मंगलवार को नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर पूरी तरह से दोबारा मतदान कराने की मांग की. इन दोनों सीटों पर उपचुनाव के लिए मतदान चल रहा था. सरकार ने आरोप लगाया कि मतदाताओं को डराया गया और कांग्रेस के पोलिंग एजेंटों को जबरन बाहर निकाला गया.
कांग्रेस के नंदीग्राम उम्मीदवार मिलन प्रधान ने आरोप लगाया कि इस सीट पर उपचुनाव में वोट लूट, मतदाताओं को डराने और पुलिस तथा सुरक्षा बलों की पक्षपातपूर्ण कार्रवाई देखने को मिली है. वहीं, कांग्रेस के रेजीनगर उम्मीदवार मोहम्मद अब्दुल्लाहिल काफी ने स्थानीय पुलिस स्टेशन के बाहर धरना दिया और उपचुनाव रद्द कर दोबारा मतदान कराने की मांग की.
शुभंकर सरकार ने कोलकाता स्थित कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय ‘विधान भवन’ में प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि रेजीनगर के 100 से ज्यादा बूथों से कांग्रेस के एजेंटों को जबरन बाहर निकाला गया. उन्होंने कहा कि बाद में पता चला कि रेजीनगर के लगभग सभी बूथों से कांग्रेस एजेंटों के साथ मारपीट की गई और उन्हें बाहर जाने के लिए मजबूर किया गया.
क्या है कांग्रेस का आरोप
शुभंकर सरकार ने कहा कि कांग्रेस ने सोमवार रात चुनाव आयोग को बताया था कि रेजीनगर पुलिस स्टेशन के प्रभारी इंस्पेक्टर और प्रशासन के सभी स्तरों के नेतृत्व में चुनाव में गड़बड़ी की साजिश रची गई है. उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा माहौल बनाया गया है कि बीजेपी कार्यकर्ताओं को छोड़कर कोई भी मतदान केंद्र के अंदर नहीं रह सकता.
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि नंदीग्राम ब्लॉक-2 के सभी बूथ और ब्लॉक-1 के कई मतदान केंद्रों पर सत्तारूढ़ बीजेपी ने कब्जा कर लिया है. सरकार ने कहा कि अगर आम मतदाता बाहर आकर वोट कर पाते तो मतदान प्रतिशत ज्यादा होता, लेकिन बीजेपी ईवीएम बदल देती. अधिकारियों के मुताबिक, नंदीग्राम विधानसभा सीट पर दोपहर 3 बजे तक 71.79 प्रतिशत मतदान हुआ था. शुभंकर सरकार ने दावा किया कि नंदीग्राम में मतदान की पूरी प्रक्रिया फिलहाल बीजेपी के नियंत्रण में है और वहां चुनाव आयोग का कोई अधिकारी या पर्यवेक्षक मौजूद नहीं है.
लाठियों से पीटा गया
नंदीग्राम के कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान ने भी आरोप लगाया कि मतदान के दौरान पुलिस ने उनकी आवाजाही को रोकने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से नंदीग्राम में डर और कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति का माहौल है. उन्होंने आरोप लगाया कि रात में मोटरसाइकिलों पर कुछ लोग घूमकर उनके एजेंटों और समर्थकों को बाहर निकलने और वोट देने से मना कर रहे हैं. प्रधान ने आरोप लगाया कि पुलिस उनसे इलाका छोड़ने के लिए कह रही है और CRPF जवानों ने सीनियर अधिकारियों के सामने उन्हें लाठियों से पीटा. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस लोगों को बीजेपी के पक्ष में वोट देने के लिए मजबूर कर रही है और अल्पसंख्यक मतदाताओं की दुकानों में लूट हो रही है.