क्या पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी ही बनाई पार्टी तृणमूल कांग्रेस पर से अपना नियंत्रण खोने वाली हैं? जिस पार्टी को उन्होंने तीन दशक पहले अपने खून-पसीने से सींचकर खड़ा किया था, आज उसी के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडराते दिखाई दे रहे हैं. मौजूदा सियासी हालात को देखते हुए यह बिल्कुल भी असंभव नहीं लगता. विधायकों के संभावित दलबदल, दर्जनों विधायकों की कथित गुप्त बैठक और एक बागी गुट के उभरने से संकेत मिल रहे हैं कि वे TMC और उसके चुनाव चिह्न पर अपना दावा ठोकने की कोशिश में जुटे हैं.
TMC के बागी खेमे में तेजी से हो रहे घटनाक्रमों को लेकर पार्टी से निलंबित राष्ट्रीय प्रवक्ता रिजू दत्ता ने इंडिया टुडे डिजिटल को कई चौंकाने वाली जानकारियां दी हैं. तृणमूल कांग्रेस के भीतर का संकट लगातार गहराता जा रहा है. अब सियासी गलियारों में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या ममता बनर्जी अपने विधायकों को एकजुट रख पाएंगी और TMC पर अपना नियंत्रण बनाए रख पाएंगी. इन गंभीर चर्चाओं के बीच रिजू दत्ता ने दावा किया कि करीब 50 विधायक ममता बनर्जी के नेतृत्व से अलग होने और 'दो फूलों' वाले चुनाव चिह्न पर दावा ठोकने की तैयारी में हैं.
ये दावे ऐसे समय में सामने आए हैं, जब TMC अपने सबसे बड़े आंतरिक संकट से गुजर रही है. इसकी झलक मंगलवार को कोलकाता के रानी रासमणि एवेन्यू में देखने को मिली. जिस दिन यह दावा सामने आया कि TMC के करीब 50 विधायक एक अलग बैठक में शामिल हुए थे, उसी दिन पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी के विरोध प्रदर्शन में केवल मुट्ठी भर विधायक और सांसद ही नजर आए. वहां मौजूद गिने-चुने नेताओं में विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय, नैना बंद्योपाध्याय, मदन मित्रा, अशोक देब और असीमा पात्रा के साथ सांसद डोला सेन और कल्याण बनर्जी शामिल थे.
कई दिग्गज नेताओं की अनुपस्थिति ने बगावत की खबरों को और बल दिया है. पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता विपक्ष की नियुक्ति में जाली हस्ताक्षरों को लेकर खड़ा हुआ विवाद अब तूल पकड़ चुका है. इस विवाद के बाद दो विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा का निष्कासन कर दिया गया. इसके बाद से ही विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के बीच बढ़ती बेचैनी की खबरों ने पार्टी के भीतर बगावत की अटकलों को और हवा दे दी है. रिजू दत्ता ने इंडिया टुडे डिजिटल को बताया कि TMC के कई विधायक चाहते थे कि ऋतब्रत बनर्जी को नेता विपक्ष (LoP) बनाया जाए.
ममता बनर्जी का बड़ा आरोप: विधायकों को धमकाया जा रहा है
हालांकि, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने LoP पद के लिए शोभनदेव चट्टोपाध्याय के नाम का प्रस्ताव आगे बढ़ा दिया, जिससे नाराजगी और बढ़ गई. वैसे ऋतब्रत बनर्जी ने खुद पार्टी में किसी भी तरह की फूट की योजना की पुष्टि करने से साफ इनकार किया है. इंडिया टुडे डिजिटल ने मंगलवार को उनसे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया. इस घमासान के बीच ममता बनर्जी और उनके करीबी सहयोगी कुणाल घोष सहित TMC के शीर्ष नेतृत्व ने सोमवार को पार्टी के भीतर चल रही दरार की बात को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया.
ममता बनर्जी ने Facebook Live के दौरान सीधा आरोप लगाते हुए कहा, "TMC विधायकों को पुलिस के दबाव के जरिए धमकाया जा रहा है. उन्हें कुछ खास लोगों से संपर्क करने का निर्देश दिया जा रहा है." वहीं दूसरी ओर कुणाल घोष ने बागी विधायकों से हाथ जोड़कर अपील की है कि वे किसी के बहकावे में न आएं. उन्होंने आरोप लगाया कि ऋतब्रत बनर्जी पार्टी नेतृत्व को बताए बिना यह गुप्त बैठक आयोजित कर पार्टी में फूट डालने की गंभीर कोशिश कर रहे हैं. हालांकि, सोमवार को बांग्ला चैनल ABP आनंदा को दिए इंटरव्यू में ऋतब्रत बनर्जी ने आरोपों को खारिज कर दिया.
उनसे जब पार्टी से अलग होने वाले संभावित गुट के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "मैं इस बारे में कोई अटकल नहीं लगा सकता."
तृणमूल कांग्रेस के लिए 50+ विधायकों का महत्व क्यों है?
इंडिया टुडे डिजिटल से बातचीत रिजू दत्ता ने कहा, "नए TMC विधायकों का एक तबका चाहता था कि निष्कासित MLA ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष के नेता के तौर पर पेश किया जाए. वे उस गुट के तौर पर दावा ठोकने की संभावना तलाश रहे थे, जिसे वे 'असली तृणमूल कांग्रेस' मानते हैं. मेरे सूत्रों के मुताबिक करीब 50 विधायक तृणमूल कांग्रेस को तोड़ने की फिराक में हैं." गौरतलब है कि बंगाल में चुनावी नतीजों के बाद 9 मई को TMC ने अपने राष्ट्रीय प्रवक्ता रिजू दत्ता को 6 साल के लिए पार्टी से निलंबित कर दिया था. उन पर पार्टी विरोध और अनुशासनहीनता का आरोप लगाया था.
इससे पहले रिजू दत्ता ने एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि TMC कार्यकर्ता उन्हें और उनके परिवार को धमका रहे हैं. उन्होंने BJP नेताओं का उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए धन्यवाद भी किया था. बागी TMC विधायकों की हालिया बैठक को लेकर उनका दावा इसलिए बेहद दिलचस्प है, क्योंकि इसमें एक खास राजनीतिक और कानूनी गणित जुड़ा हुआ है. बंगाल विधानसभा में TMC के पास 80 विधायक हैं. दलबदल विरोधी कानून के तहत, अलग होने वाले गुट को अयोग्य होने से बचने के लिए लगभग दो-तिहाई विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी.
ऐसे में यह संख्या लगभग 53 विधायकों की बनती है. यही वजह है कि कोई भी गुट जो विधायक दल पर ममता बनर्जी के नियंत्रण को चुनौती देने की उम्मीद रखता है, उसे इस 50+ के आंकड़े के काफी करीब पहुंचना होगा. हालांकि, यह दावा अभी तक आधिकारिक रूप से सत्यापित नहीं हुआ है. किसी भी विधायक ने सार्वजनिक तौर पर रिजू दत्ता के इस दावे का समर्थन नहीं किया है और न ही चुनाव आयोग के सामने TMC के चुनाव चिह्न को लेकर अभी तक कोई औपचारिक दावा पेश किया गया है. लेकिन सोमवार शाम को सीक्रेट मीटिंग के बाद फूट की चर्चा तेज हो गई है.
विधायकों की सीक्रेट मीटिंग ने बढ़ाई TMC की चिंता
TMC नेता कुणाल घोष ने दावा किया कि विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा ने दक्षिण कोलकाता के एक होटल में कई अन्य विधायकों के साथ एक सीक्रेट मीटिंग की थी. लेकिन ऋतब्रत बनर्जी ने इस आरोप को सिरे से इनकार कर दिया और कुणाल घोष के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की धमकी दे दी. हालांकि, सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि पश्चिम मिदनापुर की एक महिला विधायक भी उन लोगों में शामिल थीं, जिन्होंने ऋतब्रत और संदीप से मुलाकात की थी.
इस पूरे घटनाक्रम पर कोलकाता के सेंट जेवियर्स कॉलेज में मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज़्म के प्रोफेसर सयंतन घोष ने कहा, "ऋतब्रत बनर्जी और संदीप साहा को पार्टी से निकाले जाने के बाद खबर है कि कई TMC विधायक कोलकाता के विवान्ता होटल में मिले हैं. एक मुमकिन हालात यह हो सकता है कि 30 से ज्यादा विधायक पार्टी से अलग हो जाएं और खुद को 'असली TMC' होने का दावा करें. इससे उनके पास विधानसभा में विपक्ष की जगह पर दावा करने और मान्यता मांगने के लिए जरूरी संख्या हो जाएगी."
प्रोफेसर सयंतन घोष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, "बंगाल में TMC टूट रही है. यदि मौजूदा रुझान जारी रहा, तो जिस रूप में हम पार्टी को जानते हैं, वो 18 जून के आस-पास शुरू होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा के बजट सत्र तक पूरी तरह से खत्म हो सकती है." यह कथित बैठक उन दो विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीप साहा को TMC से निकाले जाने के कुछ दिनों बाद हुई, जिन्होंने विपक्ष के नेता के नामांकन और नियुक्ति के लिए TMC विधायकों के कथित तौर पर जाली दस्तखत किए जाने के खिलाफ पुरजोर आवाज उठाई थी.
TMC नेता कुणाल घोष के भावुक अपील का वीडियो
कोलकाता के बांग्ला न्यूज़ आउटलेट 'संगबाद प्रतिदिन' द्वारा शेयर किए गए एक वीडियो क्लिप में कुणाल घोष को बेहद भावुक होकर यह कहते हुए सुना गया, "मैं अपने विधायकों से हाथ जोड़कर गुजारिश करूंगा. हम यहां अपने दम पर चुनाव जीतकर नहीं आए हैं. हम यहां तृणमूल कांग्रेस की वजह से आए हैं. ममता बनर्जी की तस्वीर का इस्तेमाल किया जा रहा था. हम उन वोटों की बदौलत यहां आए हैं जो ममता ने कमाए हैं." अपनी सीने की ओर इशारा करते हुए उन्होंने आगे कहा, "लोगों में कुछ तो जमीर होना चाहिए. मैं उन लोगों को दोष दूंगा जो इस लालच में फंसने की कोशिश कर रहे हैं."
TMC के अंदर मची इस घबराहट को आसानी से समझा जा सकता है. यह बैठक की खबरें TMC के लिए एक बड़ी घटना के ठीक बाद आई हैं. रविवार 31 मई को पार्टी के 80 विधायकों में से करीब 60 विधायक ममता बनर्जी द्वारा आपातकाल में बुलाई गई एक बेहद अहम बैठक में शामिल नहीं हुए थे. हालांकि पार्टी ने इन गैर-हाजिरियों के महत्व को कम करके दिखाने की पूरी कोशिश की, लेकिन इस घटनाक्रम ने सियासी गलियारों में चर्चा को भड़का दिया कि TMC के अंदर कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है. हालांकि, इन सब के बीच ऋतब्रत बनर्जी ने किसी भी सुनियोजित योजना से इनकार किया है.
ABP आनंदा से बातचीत में ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि उन्हें 20-25 विधायकों द्वारा नई पार्टी बनाने की किसी भी कोशिश के बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं है. हालांकि, उन्होंने पार्टी के कुछ हिस्सों में नेतृत्व के खिलाफ मौजूद भारी गुस्से और असंतोष से इनकार नहीं किया. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "तृणमूल में बोलने की कोई गुंजाइश नहीं है. यह बात हर कोई जानता है. TMC खत्म होने की राह पर है. यह बच नहीं पाएगी. पार्टी बच नहीं पाएगी, मुझे इस बात का पूरा यकीन है. यह सिर्फ मैं ही नहीं कह रहा हूँ. हमारे कई वरिष्ठ सांसदों ने भी कहा है कि पार्टी बच नहीं पाएगी. कई नेता यही कह रहे हैं.''