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लोकसभा में अभिषेक का पद छीनने की तैयारी, TMC के बागी गुट का ऐलान- NDA को करेंगे सपोर्ट

INDIA ब्लॉक की मीटिंग में शामिल होने दिल्ली आई ममता बनर्जी को पार्टी में व्यापक फूट का सामना करना पड़ रहा है. TMC के लोकसभा सांसदों के एक गुट ने पार्टी से अलग होकर NDA को समर्थन देने की घोषणा कर दी है. 20 सांसदों का ये गुट लोकसभा में अभिषेक बनर्जी की बजाय काकोली घोष को अपना नेता सदन में बनाना चाहता है.

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TMC के 20 लोकसभा सांसदों ने पार्टी से अलग गुट बनाने का ऐलान किया है. (Photo: ITG)
TMC के 20 लोकसभा सांसदों ने पार्टी से अलग गुट बनाने का ऐलान किया है. (Photo: ITG)

तृणमूल कांग्रेस की कोलकाता की बगावत अब दिल्ली तक पहुंच चुकी है. कोलकाता में ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में विधायक अलग गुट बना चुके हैं, अब बारी सांसदों की है. सोमवार को पार्टी के 14 लोकसभा सांसदों ने बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव के घर पर पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी से मुलाकत की. 

पार्टी की सीनियर सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया कि TMC के लगभग 20 सांसदों ने NDA का समर्थन करने का फ़ैसला किया है और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को अपनी स्थिति के बारे में बता दिया है. 

अभी TMC के 28 लोकसभा सांसद और 12 राज्यसभा सांसद हैं. टीएमसी के लोकसभा सांसदों को कोई भी नया गुट बनाने के लिए कम से कम 12 सांसदों की जरूरत होगी. बागी सांसदों ने 20 सांसदों के समर्थन का दावा किया है.

स्पीकर को भेजा गया पत्र, NDA को समर्थन करेगा TMC का बागी गुट 

काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि स्पीकर को पहले ही एक पत्र भेजा जा चुका है, जिसमें केंद्र में सत्ताधारी गठबंधन का समर्थन करने की ग्रुप की इच्छा बताई गई है.

उन्होंने कहा, "मेरे समेत TMC के लगभग 20 सांसदों ने NDA का समर्थन करने के अपने फ़ैसले के बारे में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखा है."

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अभिषेक के बजाय काकोली को नेता चाहते हैं बागी

रिपोर्ट के अनुसार ममता के बागी सांसद लोकसभा में बतौर नेता काकोली घोष को चाहते हैं. अभी अभिषेक बनर्जी लोकसभा में टीएमसी के नेता हैं. इस तरह से ममता के सांसदों ने विधायकों का फार्मूला अपनाया है. 

कोलकाता में ममता ने जब शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष घोषित किया तो पार्टी में बगावत की शुरुआत यहीं से हुई. लगभग 60 विधायकों के एक गुट ने ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता घोषित किया. विधानसभा स्पीकर ने इस गुट को विधानसभा में 'असली टीएमसी' माना और ऋतब्रत को नेता प्रतिपक्ष की मान्यता दे दी.

अब दिल्ली में TMC के लोकसभा सांसद यही फॉर्मूला अपना रहे हैं.

काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया कि वह लोकसभा में पार्टी की चीफ व्हिप बनी हुई हैं. उन्होंने कहा कि यह फ़ैसला साथी सांसदों के साथ बातचीत के बाद लिया गया. 

यह घटनाक्रम ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के अंदर बढ़ते आंतरिक संकट के बीच हुआ है, जिसमें हाल के दिनों में सीनियर नेताओं की खुली नाराज़गी और इस्तीफ़े देखे गए हैं. घोष दस्तीदार ने कहा कि ग्रुप ने NDA के साथ राजनीतिक रूप से जुड़ने का फ़ैसला किया है, और तर्क दिया कि यह जनता के जनादेश को दर्शाता है.

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उन्होंने कहा, "हमने जनता के फ़ैसले को स्वीकार कर लिया है और हमारा मानना ​​है कि हमारी भविष्य की राजनीतिक दिशा NDA के साथ होनी चाहिए."

काकोली ने कहा कि उन्हें हटाने का फ़ैसला मनमाना और एकतरफ़ा था. उन्होंने कहा, "पार्टी अध्यक्ष ने भले ही इस पद पर मेरी जगह किसी और के आने की घोषणा कर दी हो, लेकिन इससे संवैधानिक और संसदीय स्थिति रातों-रात नहीं बदल जाती. हमने जनता के फ़ैसले को स्वीकार कर लिया है और हमारा मानना ​​है कि हमारी भविष्य की राजनीतिक दिशा NDA के साथ होनी चाहिए. इसी के अनुसार, हम स्पीकर को अपने फ़ैसले के बारे में बताएंगे. हम NDA का हिस्सा बनना चाहते हैं."

TMC में काकोली घोष की हैसियत

बारासात लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार TMC की वरिष्ठ नेता हैं, लेकिन अभी वह पार्टी में बड़े विद्रोह का चेहरा बन चुकी हैं. मई 2026 में विधानसभा चुनाव हार के बाद उन्होंने बारासात जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया, फिर सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया. वे लोकसभा सांसद बनी हुई हैं, पार्टी पूर्ण रूप से नहीं छोड़ी, लेकिन असंतोष खुलकर व्यक्त कर रही हैं. काकोली ने कल्याण बनर्जी पर महिलाओं के प्रति गलत व्यवहार का आरोप लगाया है.  

मैं TMC में फैले भ्रष्टाचार से तंग आ चुकी हूं: शर्मिला

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बागी गुट की सांसद डॉ शर्मिला सरकार ने आजतक के साथ बातचीत में कहा कि हमने आज CM से मुलाकात की. हमारे साथ 20 सांसद हैं और हमने काकोली घोष (चीफ व्हिप) और शताब्दी रॉय (डिप्टी लीडर) के नेतृत्व में एक अलग गुट बनाया है. उन्होंने ने कहा, "मैं विकास का हिस्सा बनना चाहती हूं, मैं TMC में फैले भ्रष्टाचार से तंग आ चुकी हूं." उन्होंने कहा कि हम TMC के साथ हैं, लेकिन TMC के भीतर ही एक अलग गुट के तौर पर. अभी हमारे पास 20 सांसद हैं और यह संख्या बढ़ भी सकती है. 

शर्मिला सरकार ने कहा कि पार्टी में पुराने नेताओं को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया था. पार्टी के अंदर बहुत ज़्यादा आपसी कलह थी. मैंने पार्टी को उन नेताओं के बारे में एक इंटरनल रिपोर्ट भेजी थी जिन्होंने चुनाव के दौरान काम नहीं किया था, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई करने के बजाय वह रिपोर्ट उसी व्यक्ति के पास पहुंच गया जिसका नाम मैंने उसमें लिखा था. 

इस बीच ममता गुट के TMC सांसद कीर्ति आजाद ने पार्टी में टूट से इनकार किया है. उन्होंने कहा है कि बागी सांसदों की संख्या 13 ही है. 
 

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