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Exclusive: 'हमसे कहा अभिषेक के लिए खड़े होकर तालियां बजाओ', ममता बनर्जी के बागी विधायक का खुलासा

पश्चिम बंगाल में टीएमसी की अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आने लगी है. बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया है कि चुनावी हार की समीक्षा बैठक में विधायकों को अभिषेक बनर्जी के सम्मान में खड़े होकर तालियां बजाने के लिए कहा गया था. उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके साथ अब 61 विधायक हैं, दूसरी तरफ पार्टी नेतृत्व ने सभी संगठनात्मक समितियां भंग कर दी हैं.

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ऋतब्रत ने अभिषेक बनर्जी को तृणमूल कांग्रेस की सबसे बड़ी कमजोरी तक कह दिया (फाइल फोटो)
ऋतब्रत ने अभिषेक बनर्जी को तृणमूल कांग्रेस की सबसे बड़ी कमजोरी तक कह दिया (फाइल फोटो)

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने नया खुलासा किया है. रविवार को इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में उन्होंने पार्टी की आंतरिक कार्यप्रणाली की जमकर आलोचना की और आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन की समीक्षा के लिए बुलाई गई बैठक में विधायकों को अभिषेक बनर्जी के लिए खड़े होकर तालियां बजाने का निर्देश दिया गया था.

ऋतब्रत बनर्जी ने बताया कि ऐसा चुनाव परिणामों के दो दिन बाद 6 मई को कालीघाट में हुई एक बैठक में हुआ था. उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक दल के प्रदर्शन की औपचारिक समीक्षा करने के बजाय, एकमात्र प्रस्ताव जो पारित किया गया वह अभिषेक बनर्जी को सार्वजनिक रूप से सम्मानित करना था.

उन्होंने कहा, 'विधायी दल के संबंध में कोई प्रस्ताव नहीं था. केवल एक ही प्रस्ताव था. सभी को खड़े हो जाना चाहिए. अभिषेक बनर्जी के लिए खड़े होकर तालियां बजाएं.'

47 वर्षीय बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी के मुताबिक, इस प्रस्ताव का कई विधायक सहयोग करने को तैयार नहीं थे. वह बोले, 'सभी झिझक रहे थे. मैं भी झिझक रहा था. लेकिन मुझमें खड़े न होने का साहस नहीं था. इसलिए मैं आधा ही खड़ा हुआ. मैं कुर्सी से पूरी तरह से नहीं उठा.'

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उन्होंने इशारों-इशारों में अभिषेक बनर्जी को तृणमूल कांग्रेस की सबसे बड़ी कमजोरी तक कह दिया. वह बोले कि हर कोई जानता है कि तृणमूल कांग्रेस की सबसे बड़ी कमजोरी कौन है.

बता दें कि पार्टी की चुनावी हार के बाद कई टीएमसी नेताओं ने अभिषेक बनर्जी की नेतृत्व शैली की सार्वजनिक रूप से आलोचना की है.

ऋतब्रत ने विधायकों के बीच बढ़ते समर्थन का भी दावा किया और कहा कि उनके गुट से जुड़े विधायकों की संख्या अब 61 हो गई है और यह आगे भी बढ़ेगी.

बीते हफ्ते, टीएमसी विधायक दल में बड़ी फूट देखी गई. उसके दो-तिहाई से अधिक, यानी 80 विधायकों में से 58 विधायकों ने आधिकारिक दल से अलग होकर विधानसभा में निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में प्रमुख विपक्षी दल के रूप में मान्यता प्राप्त की. टीएमसी के 28 साल के इतिहास में यह पहला विभाजन था.

बागी विधायक ने आगे दावा किया कि पार्टी नेतृत्व का रवैया ऐसा है जो इंसानों को इंसान नहीं मानता.

इस बीच, टीएमसी नेतृत्व ने सभी संगठनात्मक समितियों को भंग कर दिया है और पार्टी संरचना की समीक्षा की घोषणा की है, जो हाल के वर्षों में पार्टी के भीतर की सबसे महत्वपूर्ण चुनौतियों में से एक के बीच आंतरिक पुनर्गठन संकेत है.

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