पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को एक नया विवाद सामने आया, जब पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया कि उन्हें एक मैसेज मिला था. इसमें अभिषेक बनर्जी को संगठन के नेतृत्व से हटाने की शर्त पर कुछ नेताओं की पार्टी में वापसी की बात कही गई थी. सोमवार को पार्टी कार्यकर्ताओं व समर्थकों को वर्चुअली संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने बताया कि उन्होंने इस शर्त को सिरे से खारिज कर दिया है. इसके साथ ही उन्होंने हाल ही में निकाले गए विधायकों पर नाराजगी जताई और कोलकाता में 2 जून के प्रस्तावित धरने की अनुमति न मिलने पर दिल्ली में अकेले प्रदर्शन करने का एलान किया. उन्होंने कहा कि राज्य में इस वक्त पूरी तरह पुलिस राज चल रहा है.
ममता बनर्जी ने साफ शब्दों में कहा कि 'मैं इन लोगों को बहुत अच्छे से जानती हूं. जिन लोगों की कोई विचारधारा या सिद्धांत नहीं होता, वे हमें अपनी शर्तें नहीं बता सकते.' उन्होंने साफ किया कि टीएमसी किसी के दबाव में आकर फैसले लेने वाली पार्टी नहीं है.
दो निष्कासित विधायकों पर भड़कीं ममता
यह बयान ऐसे समय आया है जब टीएमसी ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में दो विधायकों को निष्कासित कर दिया है. इस मुद्दे पर बोलते हुए ममता ने रीताब्रत बनर्जी पर सीधा निशाना साधा. उन्होंने कहा कि जब रीताब्रत 2017 में CPI(M) से निकाले जाने के बाद टीएमसी में आए थे, तब दूसरों का टिकट काटकर उन्हें मौका दिया गया था. लेकिन अब उन्होंने जनता के भरोसे को तोड़ा है.
ममता ने कहा कि 'हमें खुशी है कि ऐसे लोग चले गए, क्योंकि वे कभी हमारी ताकत नहीं थे. अब संगठन को नए सिरे से मजबूत किया जाएगा.' उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेता सालों तक पद व सत्ता का सुख भोगने के बाद अपने निजी स्वार्थ के लिए दल बदल रहे हैं.
इसी राजनीतिक उठापटक के बीच सोमवार को ममता बनर्जी के आवास पर होने वाली विधायकों की एक अहम बैठक को रद्द करना पड़ा. इस बैठक में शामिल होने के लिए 80 में से केवल 20 विधायक ही पहुंचे थे. इस पर TMC प्रमुख ने आरोप लगाया कि विरोधी दल पुलिस का इस्तेमाल करके उनके विधायकों को डरा रहे हैं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से जबरन इस्तीफे दिलवाए जा रहे हैं.
'आखिरी समय पर रोक लगाना ठीक नहीं'
धरने पर लगी रोक को लेकर ममता बनर्जी ने कहा कि टीएमसी ने पुलिस को पहले ही पत्र भेज दिया था. उनका कहना था कि अगर प्रशासन को तय जगह से कोई आपत्ति थी, तो दूसरी जगह का सुझाव दिया जा सकता था. उनके मुताबिक, कार्यक्रम पहले से तय था, ऐसे में आखिरी समय पर इस तरह रोक लगाना बिल्कुल ठीक नहीं है.
उन्होंने बताया कि यह धरना टीएमसी नेताओं पर हुए हालिया हमलों के खिलाफ था. उनका दावा है कि पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी व सांसद कल्याण बनर्जी को जानबूझकर निशाना बनाया गया है. इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं को डराने तथा कमजोर करने की कोशिश की जा रही है.