scorecardresearch
 

सड़क पर खड़ी दीदी की पॉलिटिक्स! क्या पुराने तेवर से टीएमसी को बचा पाएंगी ममता?

पश्चिम बंगाल की सत्ता परिवर्तन होते ही पूरी सियासत ही बदल गई है. टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी की राजनीति फिर से सड़क पर खड़ी है और वो सड़क के जरिए अपनी सियासत को बचाए रखने की राह पर चल पड़ी हैं, क्योंकि उनके सामने टीएमसी को बचाए रखने के साथ-साथ अपने सियासी आधार को बचाए रखने की चुनौती है.

Advertisement
X
टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी की सड़क पालिटिक्स (Photo-TMC)
टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी की सड़क पालिटिक्स (Photo-TMC)

पश्चिम बंगाल की राजनीति में 'दीदी' के नाम से मशहूर टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी की सियासत की शुरुआत ही सड़क से हुई थी. सिंगूर और नंदीग्राम के आंदोलनों के जरिए सड़क पर उतरकर उन्होंने 34 साल के वामपंथी किले को ढहाया था, लेकिन डेढ़ दशक तक सत्ता में रहने के बाद ममता बनर्जी की सियासत एक बार फिर 'सड़क' पर आ गई है. 

बंगाल की सत्ता से बाहर होते ही ममता बनर्जी के सामने अपनी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को बिखरने से बचाने की सबसे बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है. पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय जो स्थितियां दिख रही हैं, वे केवल बाहरी विरोध तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पार्टी के भीतर 'आंतरिक विद्रोह' यानी विधायकों और सांसदों की बगावत टीएमसी के लिए मुश्किलें पैदा कर रही हैं. 

बीजेपी के सरकार बनते और ममता बनर्जी से सत्ता से बेदखल होने के बाद बंगाल की सियासत हिंसक हो गई है. अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी पर हुए हमले से टीएमसी के कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा हुआ है.  चुनौतियों से घिरी ममता बनर्जी सड़क पर फिर से उतर रही हैं ताकि टीएमसी के अस्तित्व व अपने सियासी साख को बचाए रख सकें? 

ममता बनर्जी की सड़क पालिटिक्स?

Advertisement

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद से टीएमसी नेताओं पर लगातार हमले हो रहे हैं. टीएमसी के वरिष्ठ नेता व लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी पर हुए हमले से पार्टी कार्यकर्ताओं हताश हैं तो ममता बनर्जी की चिंता बढ़ गई है. ममता ने शुभेंदु सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव के बा 2500 टीएमसी पार्टी कार्यालय तोड़ दिए गए. 10000 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया. पुलिस टीएमसी विधायकों को घर से बाहर न निकलने की धमकी दे रही है.

टीएमसी नेताओं पर हो रहे हमले के विरोध में ममता बनर्जी ने अब सड़क पर उतरने का फैसला किया है. ममता बनर्जी ने मंगलवार को दोपहर एक बजे रानी रशमोनी रोड पर धरना देने के लिए पुलिस को आवेदन दिया था, लेकिन प्रशासन ने इजाजत नहीं दी.  इसके बाद भी ममता बनर्जी धरना देने की जिद पर अड़ी हैं.

कोलकाता से दिल्ली तक धरने देने का ऐलान कर दिया है. कोलकाता में धरना करने की तैयारी में है, लेकिन इजाजत नहीं मिली तो ममता दिल्ली में प्रदर्शन करेंगी. इस तरह ममता अब सड़क आंदोलन के जरिए अपनी आवाज बुलंद करने की रणनीति पर काम कर रही है.

टीएमसी को टूट से बचाने की टेंशन

ममता बनर्जी के सामने सबसे बड़ी टेंशन टीएमसी को बचाए रखने की है, क्योंकि सत्ता से बाहर होते ही टीएमसी के नेता बेचैन हैं. ममता बनर्जी ने पार्टी की बैठक रखी थी, जिसमें टीएमसी के 80 में से 60 विधायक पहुंचे ही नहीं. ममता बनर्जी ने सोमवार को दो टीएमसी विधायकों को पार्टी से निष्कासित कर दिया है. ममता ने बीजेपी पर टीएमसी को तोड़ने का आरोप भी लगाया. ममता बनर्जी ने कहा कि पैसे और पुलिस से टीएमसी को तोड़ा नहीं जा सकता. कुछ सांसदों-विधायकों को पैसे देकर ज़्यादा फायदा नहीं होगा. टीएमसी और मज़बूत होकर उभरेगी.'

Advertisement

बंगाल की सत्ता बदलते ही टीएमसी के कई मौजूदा विधायकों और सांसदों में असुरक्षा की भावना उपजी है. अब उन्हें ये  लगता है कि टीएमसी के साथ रहने से उनका राजनीतिक और व्यक्तिगत भविष्य दांव पर लग सकता है. यही वजह थी कि ममता बनर्जी की बैठक से टीएमसी विधायक किनारा कर लिए हैं, क्योंकि बीजेपी सरकार बहुत ही आक्रामक तरीके से राजनीति कर रही और सरकार चला रही है. इसके चलते टीएमसी के नेता बेचैन हैं, जिसने ममता बनर्जी की टेंशन बढ़ा दी है. 

टीएमसी से लोगों का मोहभंग

पश्चिम बंगाल में कोलकाता और अन्य शहरी इलाकों का पढ़ा-लिखा मध्यवर्ग और युवा अब टीएमसी की कार्यशैली, सिंडिकेट राज और रोजगार के अभाव से नाराज था, जिसका असर विधानसभा के चुनाव में दिखा. यह वही वर्ग है जो कभी वामपंथ के खिलाफ ममता बनर्जी की सबसे बड़ी ताकत बना था, जिसके भोहभंग होते ही ममता बनर्जी सत्ता से बाहर हो गईं.

विधायकों और सांसदों का बागी होना टीएमसी के लिए एक गंभीर 'अलार्म बेल' है. यह दिखाता है कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है. हालांकि, पश्चिम बंगाल की राजनीति का इतिहास रहा है कि नेता बदलते हैं, लेकिन वोट बैंक ममता बनर्जी के नाम पर ही पड़ता है.

Advertisement

टीएमसी में 'ओल्ड गार्ड बनाम न्यू गार्ड' की जंग ने ही पहले से ही सियासी टेंशन बढ़ा रखी थी.  सत्ता से बाहर होते ही पार्टी के भीतर ममता बनर्जी के वफादार पुराने नेताओं और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाले युवा गुट के खिलाफ खुलकर सामने आ गई. टीएमसी में बढ़ता आंतरिक असंतोष ममता बनर्जी के लिए सियासी चिंता का सबब बन गई है. इस चौतरफा संकट के बावजूद, ममता बनर्जी को भारतीय राजनीति की सबसे जुझारू नेताओं में गिना जाता है. टीएमसी को इस संकट से उबारने के लिए उनके पास सड़क पर उतरने का ही विकल्प है. 

टीएमसी का कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं है

ममता बनर्जी ही टीएमसी हैं और टीएमसी ही ममता बनर्जी है.' ममता बनर्जी की सियासत आज इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रही है. अब चुनौतियां पहले से कहीं अधिक सांगठनिक और वैचारिक हैं. ममता बनर्जी टीएमसी को बचा पाएंगी या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि वे इन बागियों के जाने से पैदा हुए खालीपन को कितनी जल्दी अपने 'करिश्मे' और नए नेतृत्व से भर पाती हैं.

हालांकि, संकट के समय सीधे जनता के बीच (सड़क पर) चले जाना और खुद को 'बंगाल की बेटी' के रूप में पेश करना उनकी सबसे बड़ी ताकत है. जनता आज भी टीएमसी के स्थानीय नेताओं से नाराज हो सकती है, लेकिन ममता बनर्जी की व्यक्तिगत लोकप्रियता अब भी एक बड़ा फैक्टर है. इसीलिए टीएमसी को बचाने के लिए ममता बनर्जी अब खुद एक सड़क पर उतरकर सियासी वजूद को बचाना चाहती हैं.

Advertisement

ममता बनर्जी का विक्टिम कार्ड क्या होगा सफल

ममता बनर्जी का सबसे बड़ा हथियार उनका 'विक्टिम कार्ड' और बंगाली अस्मिता (Bengali Pride) का नैरेटिव है. अक्सर देखा गया है कि ममता जनता के बीच जाकर यह संदेश देने की कोशिश करती हैं कि दिल्ली की ताकतें बंगाल की बेटी को घेरने की साजिश रच रही हैं और गद्दार नेता पार्टी छोड़ रहे हैं. बंगाल में ममता बनर्जी के इस आक्रामक और जुझारू रूप से जुड़ाव महसूस करता है.

ममता बनर्जी विपक्ष में रहते हुए फिर से सड़क की राजनीति करने का फैसला किया है.  बंगाल की अस्मिता (बंगाली सेंटिमेंट) का कार्ड क्या ममता के पक्ष में खेल बदल सकता है. टीएमसी बचेगी या बिखरेगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि ममता बनर्जी 'सड़क की सियासत से कितना डैमेज कन्ट्रोल कर पाएंगी.

टीएमसी का पूरा ढांचा ममता बनर्जी के चेहरे पर टिका है. बागी विधायकों या सांसदों के जाने से कैडर का एक हिस्सा जरूर टूटता है, लेकिन अगर जमीनी कार्यकर्ता ममता के साथ खड़े रहे, तो अपनी राजनीति को बचाए रख ले जाएंगी? 


 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement