पश्चिम बंगाल की राजनीति में गहमागहमी बढ़ गई. तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक कुणाल घोष ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कुछ ऐसा किया, जिससे वे चर्चा का विषय बन गए है. दरअसल, कुणाल घोष ने शनिवार को टीएमसी के दोनों विरोधी गुटों द्वारा आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रमों में हिस्सा लिया.
ममता बनर्जी के मुखर समर्थक माने जाने वाले कुणाल घोष के इस कदम के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं.
ममता कैंप के बाद विरोधी गुट के कार्यक्रम में पहुंचे
सबसे पहले कुणाल घोष ने कालीघाट स्थित पुराने टीएमसी ऑफिस में ममता कैंप के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लिया. उन्होंने वहां राष्ट्रीय ध्वज फहराया. इसके तुरंत बाद, वह अपने विधानसभा क्षेत्र बेलेघाटा के मेट्रोपॉलिटन इलाके में स्थित पार्टी के किराए के कार्यालय पहुंचे.
यह कार्यालय पार्टी के रितब्रत बनर्जी गुट का माना जाता है. वहां उन्होंने शहीद स्मारक पर फूल चढ़ाए. साथ ही एक छोटी सी सभा को भी संबोधित किया. इस कार्यक्रम में चंद्रिमा भट्टाचार्य, अरूप रॉय और बिप्लब मित्रा जैसे रितब्रत गुट के कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे.
कुणाल घोष के इस तरह दोनों कैंपों में जाने से यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या वह पार्टी के अंदर पाला बदलने की कोशिश कर रहे हैं? रितब्रत गुट के प्रवक्ता कोहीनूर मजूमदार ने तो यहां तक कह दिया कि कुणाल घोष के आने का मतलब है कि उन्होंने दरवाजा खटखटाया है. वह जल्द ही अपना सामान लेकर इस तरफ आ सकते हैं.
कुणाल घोष ने दिया करारा जवाब
इन तमाम अटकलों और चर्चाओं पर कुणाल घोष ने तुरंत सफाई दी. उन्होंने पाला बदलने की बात को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने साफ किया कि इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि वह अपनी साइड बदल रहे हैं.
उन्होंने बताया कि जब वह कालीघाट के मुख्य कार्यक्रम से लौट रहे थे, तो रास्ते में उन्होंने देखा कि कुछ लोग टीएमसी के नाम पर पार्टी ऑफिस में झंडा फहरा रहे हैं. चूंकि वह जगह उनके विधानसभा क्षेत्र में आती है, इसलिए वह वहां रुक गए.
कुणाल घोष ने उन लोगों पर भी निशाना साधा जो ममता बनर्जी से दूर होकर बीजेपी के करीब जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि उन्होंने वहां जाकर अपना रुख बिल्कुल साफ कर दिया है.
कुणाल ने कहा कि, 'टीएमसी ममता दीदी के नेतृत्व में बनी है. कुछ लोग ममता दीदी का नाम मिटाना चाहते हैं. मैंने उनके ही कैंप में खड़े होकर शेर की तरह ममता दीदी का नाम लिया. उन्होंने तंज कसते हुए यह भी कहा कि कुणाल घोष के पैर कभी दो नावों में नहीं रहते.
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रितब्रत गुट के कार्यक्रम में बोलते हुए कुणाल घोष ने बीजेपी पर भी तीखा हमला बोला. उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर दिए गए बयानों को लेकर बीजेपी के राज्यसभा सांसद अनंत महाराज को पार्टी से बाहर निकालने और गिरफ्तार करने की मांग की.
उन्होंने कहा कि बीजेपी को नेताजी के प्रति सम्मान दिखाना चाहिए. अनंत महाराज की सदस्यता तुरंत रद्द करनी चाहिए. आखिर में उन्होंने दोहराया कि हम ममता बनर्जी के नेतृत्व में बीजेपी के खिलाफ अपनी लड़ाई पूरी ताकत से जारी रखेंगे.
वहीं, टीएमसी की वरिष्ठ नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य ने इस मामले पर ज्यादा कुछ न कहते हुए कहा कि हम लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं, अगर कोई रास्ते से गुजरते हुए भी सम्मान देने आ जाए, तो इसमें कोई बुराई नहीं है.